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उपभोक्ता रुझान में बरकरार है अनिश्चितता

Last Updated- December 11, 2022 | 6:12 PM IST

मई 2022 में उपभोक्ता रुझान सूचकांक (आईसीएस) 0.8 फीसदी बढ़ा। यह बहुत मामूली बढ़ोतरी थी। बीते कुछ महीनों में आईसीएस की मासिक वृद्धि एक अंक में और काफी कम रही है लेकिन इसका एक फीसदी से भी कम हो जाना गिरावट का नया स्तर है।
मई में गिरावट चौंकाने वाली नहीं है क्योंकि यह फरवरी 2022 से आईसीएस में हो रही गिरावट का ही विस्तार नजर आता है। मई में गिरावट का लगातार चौथा महीना था। मई में आईसीएस के दो अहम गुण थे- पहला, ग्रामीण भारत के रुझानों पर बड़ा असर और दूसरा भविष्य को लेकर अपेक्षाओं का खामोश होना।
मई में शहरी भारत के आईसीएस और ग्रामीण भारत में आईसीएस में काफी अंतर देखने को मिला। शहरी आईसीएस में 7.8 प्रतिशत की उछाल देखने को मिली जबकि ग्रामीण आईसीएस में 2.3 प्रतिशत की गिरावट आई। शहरी आईसीएस में यह 10 महीनों की सबसे बड़ी उछाल थी। वहीं ग्रामीण भारत में यह पांच महीनों की सबसे बड़ी गिरावट थी। मई 2022 ऐसा दुर्लभ महीना था जब आईसीएस शहरी और ग्रामीण इलाकों में एकदम विपरीत गति से विभाजित हुआ।
मई के आईसीएस का दूसरा हासिल थोड़ा जटिल है। भविष्य के अनुमान मई में 0.9 प्रतिशत बढ़े। यह वर्तमान आर्थिक परिस्थिति सूचकांक (आईसीसी) से अधिक है जो कि 0.7 प्रतिशत है। जटिलता आईसीई के घटकों में निहित है जो अनुमानों में व्यापक कमजोरी की ओर संकेत करते हैं।
संक्षेप में जटिलता यह है कि भविष्य को लेकर आशावादी परिवारों की संख्या में कमी आ रही है लेकिन इसके साथ ही निराशावादी परिवारों की तादाद भी कम हो रही है। बाद वाली परिस्थिति अच्छा संकेत है लेकिन पहले वाली नहीं। तीन ऐसे संकेतक हैं जो हमें बताते हैं कि उपभोक्ताओं की क्या आकांक्षाएं हैं। हम इनके बारे में नीचे चर्चा करेंगे।
पहली बात, आम परिवार आने वाले वर्ष में अपनी पारिवारिक आय के बारे में क्या सोचते हैं? अप्रैल 2022 में 12.7 प्रतिशत परिवारों का मानना था कि उनकी आय में सुधार होगा। मई में इनकी तादाद गिरकर 10.9 प्रतिशत रह गई। लेकिन अप्रैल में ऐसे परिवारों की तादाद 33.5 प्रतिशत थी जिन्हें लग रहा था कि उनकी आय में कमी आएगी। मई में यह अनुपात घटकर 32.9 प्रतिशत रह गया। इससे विरोधाभासी संकेत निकलते हैं। हालांकि विशुद्ध आधार पर हमें भविष्य के अगले वर्ष में आय के अनुमानों में मामूली गिरावट देखने को मिलती है। अप्रैल में विशुद्ध आधार पर 20.8 प्रतिशत परिवारों ने अनुमान जताया कि आय में कमी आएगी जबकि मई में 22 प्रतिशत परिवारों ने ऐसा ही अनुमान प्रकट किया।
दूसरा संकेतक है आने वाले 12 महीनों के दौरान कारोबारी तथा आर्थिक संभावनाओं से संबंधित अनुमान। यहां एक बार फिर आशावादी परिवारों की तादाद मई में कम हुई। अप्रैल में 11.2 प्रतिशत परिवार आशान्वित थे लेकिन मई में केवल 10.8 प्रतिशत परिवार ही आशावादी रह गए। परंतु इस मोर्चे पर निराशावादी परिवारों की तादाद में ज्यादा गिरावट आई और वे 39.5 प्रतिशत से घटकर 37.3 प्रतिशत रह गए। ऐसे में विशुद्ध आधार पर देखें तो एक वर्ष की अवधि में आर्थिक या कारोबारी अनुमान अपेक्षाकृत बेहतर नजर आए। निराशावादी रुख रखने वाले परिवारों की हिस्सेदारी 28.3 प्रतिशत से घटकर 26.5 प्रतिशत रह गई। इसी तरह पांच वर्ष की अवधि में कारोबारी और आर्थिक संभावनाओं पर आधारित परिदृश्य की बात करें तो निराशावादी परिवारों की कुल हिस्सेदारी अप्रैल के 22.2 फीसदी से घटकर मई में 20.4 फीसदी रह गई। जैसा कि स्पष्ट है दूसरे और तीसरे संकेतक का विशुद्ध संदेश पहले संकेतक के साथ सुसंगत नहीं है।
इन तीनों संकेतकों का विशुद्ध प्रभाव जहां आईसीई में 0.9 प्रतिशत का मामूली इजाफा करता है, वहीं यह बात भी ध्यान देने लायक है कि यह अनुमानों में कोई मजबूत और समग्र सुधार नहीं है। मई 2022 में आईसीई में सुधार यह बताता है कि भविष्य को लेकर निराशा कम हुई लेकिन इसके साथ ही आशावाद में भी कमी नजर आ रही है।
देश के ग्रामीण इलाकों में उपभोक्ताओं की अपेक्षाएं मई में 1.7 प्रतिशत कम हुईं जबकि शहरी भारत में इनमें 6.4 प्रतिशत का सुधार देखने को मिला। जैसा कि हमने सीएमआईई के आईसीएस में देखा भविष्य को लेकर शहरी भारत का आशावाद, आरबीआई के भविष्य की अपेक्षाओं से संबंधित सूचकांक के विरोधाभासी है।
रिजर्व बैंक का भविष्य की अपेक्षाओं से संबंधित सूचकांक दरअसल उपभोक्ता आत्मविश्वास सूचकांक का हिस्सा है जो 19 बड़े शहरों से मिली करीब 6,000 प्रतिक्रियाओं पर आधारित है। इसका दायरा जनवरी 2022 के 13 शहरों से बढ़ाकर मार्च में 19 शहरों तक कर दिया गया। सूचकांक बताता है कि मार्च और मई 2022 के बीच भविष्य की अपेक्षाओं में 1.9 प्रतिशत की गिरावट आई। इसी अवधि में सीएमआईई के उपभोक्ता अपेक्षा संबंधी सूचकांक में 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखने को मिली। सीएमआईई सूचकांक 300 से अधिक कस्बों की प्रतिक्रिया पर आधारित है।
शहरी आईसीएस में जून में सुधार का सिलसिला जारी है। 12 जून को समाप्त सप्ताह के लिए शहरी आईसीएस, 29 मई को समाप्त सप्ताह की तुलना में 8.8 फीसदी अधिक था। इसी अवधि में ग्रामीण आईसीएस में 7.6 प्रतिशत का सुधार देखने को मिला। ग्रामीण आईसीएस साप्ताहिक आधार पर अस्थिर रहा है। यह अस्थिरता देश में उपभोक्ता रुझान के भविष्य को अनिश्चित बनाती है।
(लेखक सीएमआईई के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्याधिकारी हैं)

First Published - June 17, 2022 | 12:19 AM IST

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