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…कहीं सिर के ऊपर से न गुजर जाए पानी

Last Updated- December 06, 2022 | 11:41 PM IST

दुनिया भर में जारी खाद्यान्न संकट पर जॉर्ज बुश ने जो भी कहा, वह बहस का विषय है। पर इस बात में कोई दो राय नहीं इस संकट की जड़ें गहरी होती जा रही हैं और इसे गंभीरता से नहीं लिया गया तो आने वाले दिनों में हालात बेहद गंभीर हो सकते हैं।


संयुक्त राष्ट्र और उसकी विभिन्न संस्थाओं समेत कई दूसरे संगठन भी इस बारे में लगातार आगाह कर रहे हैं। यहां हम खाद्य संकट की मौजूदा स्थिति और इसके हल के लिए चल रही कवायदों का जायजा पेश कर रहे हैं :


ग्लोबल हलचल


वर्ल्ड बैंक के आंकड़ों के मुताबिक ग्लोबल लेवल पर खाद्य पदार्थों की कीमतें पिछले तीन साल में करीब दोगुनी हो गई हैं। वर्ल्ड बैंक का कहना है कि व्यापार संबंधी पाबंदियों, मौसम के बदलते मिजाज और बायोफ्यूल के बढ़ते इस्तेमाल की वजह से खाद्यान्न संकट पैदा हुआ है।


वर्ल्ड बैंक के प्रमुख रोबर्ट जॉलिक ने हाल ही में कहा था कि बढ़ी खाद्य कीमतों से दुनिया की 2 अरब आबादी प्रभावित है और गरीब देशों की 10 करोड़ जनता पर इस समस्या की वजह से गरीबी की जकड़न और बढ़ जाएगी। बढ़ती खाद्य कीमतों के विरोध में दुनिया भर में प्रदर्शन हो रहे हैं। कच्चे तेल की कीमतों में लगी आग को (यह फिलहाल 125 डॉलर प्रति बैरल के आसपास है) भी खाद्य पदार्थों की कीमतों में बढ़ोतरी के लिए जिम्मेदार बताया जा रहा है।


भारत की दशा


भारत में भी महंगाई का मुद्दा काफी गंभीर हो चुका है। मुद्रास्फीति या महंगाई दर का पारा लगतार चढ़ रहा है। मुद्रास्फीति की दर 7.61 फीसदी हो गई है, जो पिछले 4 वर्षों में सबसे ज्यादा है। सरकार ने महंगाई पर अंकुश लगाने के लिए निर्यात संबंधी पाबंदियां लगाई हैं, आयात शुल्क में कटौती की है और जमाखोरी रोकने के लिए कई सख्त कदम उठाए गए हैं। भारतीय रिजर्व बैंक ने भी अपने स्तर से कई पहलें की हैं। पर इन तमाम कदमों का जमीनी असर अब तक देखने को नहीं मिला है।


अमेरिका बनाम भारत


अमेरिका के कृषि विभाग के आंकड़े बताते हैं कि अमेरिका में अनाज की खपत भारत के मुकाबले 5 गुना ज्यादा है। एक भारतीय व्यक्ति साल भर में 178 किलोग्राम अनाज की खपत करता है, जबकि एक अमेरिकी व्यक्ति साल भर में 1,046 किलोग्राम अनाज का उपभोग करता है। इसी तरह, भारत में एक व्यक्ति साल भर में 11 किलोग्राम खाद्य तेल की खपत करता है, जबकि एक अमेरिकी व्यक्ति साल भर में 41 किलोग्राम खाद्य तेल का उपभोग करता है।


आगाह किया यूएन ने


संयुक्त राष्ट्र (यूएन) के प्रमुख बान की-मून ने बढ़ती खाद्य कीमतों के प्रति विश्व नेतृत्व को आगाह किया है। संयुक्त राष्ट्र ने एक टास्क फोर्स गठित की है। टास्क फोर्स के गठन का मकसद खाने के सामान की बढ़ती कीमतों से निपटने के लिए दुनिया भर की सरकारों और प्रभावित आबादी के लिए व्यापक और एकीकृत अभियान चलाने की है।


संयुक्त राष्ट्र खाद्य और कृषि संगठन (एफएओ) खाद्य सुरक्षा पर 3 से 5 जून के बीच रोम में एक बैठक करने जा रहा है। संयुक्त राष्ट्र की टास्क फोर्स इस बैठक के लिए भी जमीन तैयार कर रही है। टास्क फोर्स की पहली बैठक पिछले सोमवार को हुई । बैठक में मून ने कहा – ‘इस समस्या से निपटने के लिए बड़े स्तर पर समन्वय की जरूरत है।’


गौरतलब है कि संयुक्त राष्ट्र पहले कह चुका है कि खाद्य संकट की वजह से विश्व खाद्य कार्यक्रम पर भी बुरा असर पड़ सकता है और इससे 1 लाख अतिरिक्त लोगों को खाद्य सहायता मुहैया करानी पड़ सकती है। विश्व खाद्य कार्यक्रम के लिए आर्थिक अनुदान देने वाले देशों से संयुक्त राष्ट्र गुजारिश कर चुका है कि वे 80 करोड़ डॉलर की अतिरिक्त धनराशि मुहैया कराएं।

First Published - May 15, 2008 | 12:16 AM IST

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