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ओलंपिक जुनून से अछूते हैं हम

Last Updated- December 07, 2022 | 3:44 PM IST

पेइचिंग ओलंपिक-2008 का बुखार देश पर कितना चढ़ा है यह जानने के लिए यदि ट्रैवल इंडस्ट्री का थर्मामीटर उपयोग में लाया जाए तो कहा जा सकता है कि इस बार ओलंपिक का बुखार थोड़ा कम चढ़ा है।


जानकारों के अनुसार इसकी बड़ी वजह यह है, ओलंपिक में भारतीय खिलाड़ियों का खराब ट्रैक रिकॉर्ड और कड़े वीजा नियम। साथ ही, बढ़ती महंगाई और आर्थिक मंदी की वजह से भी ओलंपिक को देखने के लिए चीन जाने की ख्वाहिश रखने वाले लोगों की तादाद टूर और ट्रैवल उद्योग की अपेक्षाओं पर खरी नहीं उतर रही।

ट्रैवल एजेंट्स एसोसियशन ऑफ इंडिया के उपाध्यक्ष और स्विफ्टट्रैवल इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड के अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक राजिंदर राय ने बताया कि चीन ने खेलों के सफल आयोजन को देखते हुए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। इससे लोगों को वीजा हासिल करने में भी थोड़ी मुश्किल आ रही है।

लेकिन एसोसियशन के प्रबंध समिति सदस्य और इंटर स्काईलिंक्स प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंध निदेशक जगदीप एस. रिक्खी महंगाई को पर्यटकों की उदासीनता की मुख्य वजह मानते हैं। उनके मुताबिक लोग पर्यटन का लुत्फ बचत के पैसों से उठाते हैं। लेकिन महंगाई दर के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचने के बाद लोगों का बचत एकाएक कम हो गया है। पर्यटन उद्योग से जुड़े दूसरे कारोबारियों ने भी इस तथ्य की पुष्टि की।

कारोबारियों के मुताबिक अनुमान है कि 10 से 15 फीसदी लोगों ने पेइचिंग जाने की योजना महंगाई बढ़ने से टाल दी है। जानकारों के मुताबिक, इस समय न केवल चीन बल्कि यूरोप और अमेरिका की यात्रा को भी कई लोगों ने टाल दी है। इनके मुताबिक, इस समय मंदी और महंगाई का जो आलम पूरी दुनिया में पसरा है, उससे समूचा पर्यटन उद्योग प्रभावित हुआ है।

टूर और ट्रैवल कारोबार तो पर्यटन उद्योग का प्रमुख घटक है लिहाजा वह भी इसकी चपेट में है। ओलंपिक जाने वाले लोगों की तादाद अपेक्षा के मुताबिक नहीं रही है तो इसके पीछे इन्हीं चीजों का योगदान है। अंबे वर्ल्ड ट्रैवल्स के प्रमुख अनिल कलसी ने बिानेस स्टैंडर्ड को बताया कि टूर और ट्रैवल एजेंसियों को उम्मीद थी कि भारत से ओलंपिक का मजा लेने के लिए वहां 8 हजार लोग जाएंगे।

अब कहा जा रहा है कि यह संख्या 5 से 6 हजार के बीच ही रहेगी। जाहिर है पर्यटकों की वास्तविक तादाद अनुमान से कम रहने वाली है। व्यंग्य के लहजे में अनिल ने कहा कि यदि भारतीय ओलंपिक दल को शामिल कर लें तो खेल पर्यटकों की संख्या में हुई कमी पूरी हो जाएगी। मालूम हो कि खिलाड़ियों और अधिकारियों सहित भारतीय ओलंपिक दल के सदस्यों की कुल संख्या 1,200 के आसपास है।

राजिंदर राय ने कहा कि ओलंपिक हमेशा से भारत के पर्यटन उद्योग के लिए विश्व कप क्रिकेट जितना सफल नहीं रहता। इसे लेकर भारत में उस हद तक दीवानगी का आलम देखा जाता, जितना क्रिकेट को लेकर होता है। मजे की बात यह है कि विश्व कप क्रिकेट का आयोजन ओलंपिक की तुलना में काफी छोटा होता है।

ओलंपिक के प्रति कम रुचि की वजह जानने की कोशिश की तो पता चला कि दूसरे खेलों के खिलाड़ी और ब्रांड एंबेस्डर क्रिकेट स्टार जितने लोकप्रिय नहीं है। इस बार तो हद हो गई जब पुरुषों की हॉकी टीम ओलंपिक के लिए क्वालीफाई ही नहीं कर पायी। दूसरे खेलों की तुलना में कम से कम हॉकी के प्रशंसकों की तादाद तो निश्चित तौर पर ज्यादा है।

एक टूर ऑपरेटर ने कहा कि हो सकता था हॉकी टीम के वहां जाने पर कुछ सौ पर्यटक और पेइचिंग जाने वाले लोगों की सूची में शामिल हो जाते। जगदीप रिक्खी बताते हैं कि जो पर्यटक 6 से 7 दिनों के लिए चीन जाना चाहते हैं, उन्हें अपने जेब से प्रति व्यक्ति लगभग 1  से 1.5 लाख खर्च करना पड़ता है। इनमें से 80 से 85 हजार रुपये 6-7 दिनों तक चीन में रहने का खर्च है और 40 से 45 हजार रुपये विमान का किराया है।

एयर टरबाइन फ्यूल (एटीएफ) की कीमतों में जोरदार वृद्धि के बाद सभी एयरलाइनों ने अपनी किराए में वृद्धि की है। इससे चीन जाने-आने का किराया काफी बढ़ गया है। अनिल कलसी ने कहा कि एक दिन चीन में रहने का खर्च तकरीबन 2 हजार डॉलर पड़ रहा है। ट्रैवल एजेंटों के मुताबिक अभी का ट्रेंड ये चल रहा है कि जो पर्यटक 6 से 7 दिनों के लिए चीन जा रहे हैं वे पेइचिंग और शंघाई ही जा पाते हैं।

बहुत हुआ तो हांगकांग चले गए। लेकिन जो 10 से 12 दिनों के लिए चीन जा रहे हैं उनकी बुकिंग पेइचिंग, शंघाई और हांगकांग के अलावा जियान और ग्विलान के लिए भी हो रही है। मालूम हो कि इन दोनो शहरों में कई ऐतिहासिक  धरोहर पाये जाते हैं। ट्रैवल एजेंटों ने बताया कि चीन के लिए बुकिंग अब लगभग पूरी हो चुकी है। कलसी के अनुसार ज्यादातर पर्यटकों ने दो हफ्तों तक चलने वाले इस आयोजन के लिए अंतिम दिनों की बुकिंग कराई है।

First Published - August 7, 2008 | 10:42 PM IST

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