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क्या होगा सहारा का भविष्य

Last Updated- December 07, 2022 | 6:41 AM IST

सहारा मामले में भारतीय रिजर्व बैंक के फैसले का मतलब है कि कुछ ही समय में अब सहारा अब गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी नहीं रह जाएगी।


हालांकि, कंपनी दूसरे सभी कारोबारों से पहले की तरह ही जुड़ी रहेगी। यह परिवर्तन एक ही रात में होना मुमकिन नहीं है और इसमें कुछ समय लगेगा। आरबीआई ने एक दो हफ्ते पहले जो आदेश जारी किया था अगर उसी के मुताबिक चीजें चलतीं तो सहारा के लिए इस कारोबार को समेटने में कम समय लगता।

आरबीआई ने कुछ समय पूर्व कंपनी को यह आदेश दिया था कि वह लोगों के पैसों को जमा करना बंद कर दे। पर सहारा ने उच्चतम न्यायालय में अपील कर अपने कुछ समय की मोहलत ले ली है ताकी वह मौजूदा खातों का सही तरीके से निपटारा कर सके।

हालांकि यह कोई अपवाद नहीं है क्योंकि भले ही कंपनी को कुछ अतिरिक्त समय मिल गया है फिर भी आदेश का पालन तो होगा ही और आरबीआई ने इस अंतरिम अवधि के लिए एक नियामक का गठन कर दिया है जिसके जिम्मे इस बात की जांच करना होगा कि आदेश का साफगोई के साथ पालन किया जा रहा है या नहीं।

सबसे अहम बात जिसका ध्यान रखा जाना है वह है कि मौजूदा जमा राशि का क्या किया जाएगा और अगर आगे नई रकम जमा की जाएगी तो वे किन शर्तों पर होंगी और उनका इस्तेमाल कैसे किया जाएगा। यहां यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि समूह के संस्थापक सुब्रतो रॉय, जिनके काफी अच्छे राजनीतिक संबंध हैं, वह इस मोहलत का कैसे फायदा उठाते हैं। यह भी जानना रोचक होगा कि क्या वह इस दौरान आरबीआई से और रियायतें लेने में सफल होते हैं या नहीं।

आरबीआई ने अभी जो आदेश जारी किए हैं वे एक दिन की नहीं बल्कि लंबी प्रक्रिया के तहत लिया गया फैसला है। करीब पांच साल पहले ही आरबीआई ने सहारा के मामलों पर करीब से नजर रखनी शुरू कर दी थी। आरबीआई को तब से ही कंपनी में पारदर्शिता, अकाउंटिंग, लोगों से जमा राशि की शर्तों और उन पैसों की सुरक्षा को लेकर खामियां नजर आने लगी थीं।

सहारा मामले में आरबीआई को कुछ ऐसा ही संदेह होने लगा था जो करीब दो दशक पहले कोलकाता की गैर-वित्तीय कंपनी पीयरलेस के मामले में था। तब से ही सहारा पर शिकंजा कसा जाने लगा था और एक समय यह फैसला भी दिया गया था कि सभी गैर-वित्तीय कारोबारों को इक्विटी और रिजर्व के जरिए फंड जारी किया जाएगा, लोगों की जमा राशियों के जरिए नहीं। अब सहारा के लिए सबसे बड़ी चुनौती अपने कारोबारी मॉडल को फिर से तैयार करने की है।

सहारा की सबसे बड़ी संपत्ति उसकी तरलता के अलावा उसका ब्रांड वैल्यू है। सहारा जिन दूसरे कारोबारों से जुड़ी हुई है, उनमें से कुछ में उसे खास मुनाफा नहीं हो रहा है। जिस गैर-वित्तीय कारोबार के जरिए इन परियोजनाओं को फंड उपलब्ध कराया जाता था, उस पर आरबीआई ने रोक लगा दी है। ऐसे में कैसे सहारा बेहतर प्रबंधन के जरिए इस कारोबारी चक्रव्यूह से निकलेगा, यह देखने लायक है।

First Published - June 19, 2008 | 10:20 PM IST

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