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हंगामा है क्यों बरपा आईपीएल पर?

Last Updated- December 07, 2022 | 1:00 AM IST

खेल को बस खेल ही रहने दीजिए
सुवीन कुमार सिन्हा, संपादक, इंडियन मैनेजमेंट


बीसीसीआई की चल रही डीएलएफ इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) ने क्रिकेट में कई नये आयाम जोड़े हैं। इसमें विजय माल्या का अहं भी शामिल है।

क्रिकेट में विदेशी कोचों के संक्षिप्त इतिहास में सबसे सफल कोच जॉन राइट ने अपनी पुस्तक में एक शख्स के बारे में लिखा है। राइट ने लिखा है कि एक बड़े रईस आदमी को वे अक्सर टीम के आसपास देखा करते थे।

यह तब की बात है जब माल्या ने अपने आपको वैश्विक स्तर पर नहीं प्रचारित किया था जैसा कि उन्होंने पिछले साल जाने-माने ब्रांड ‘वाइट एंड मैके’ के अधिग्रहण के समय किया था। इसके अलावा टूर्नामेंट शुरू होने से पहले माल्या ने कई कारनामे किए। उन्होंने वाशिंगटन रेडस्किन्स से चीयरलीडर्स बुलाईं। फ्रेम में अक्सर माल्या भी नजर आए।

आईपीएल में उनकी टीम जब 9 में से 7 मैच हार गई तो उन्होंने टीम के मुख्य कार्यकारी (सीईओ) चारू शर्मा को बाहर का रास्ता दिखा दिया। उन्होंने मामले को इसी तरह प्रचारित किया कि शर्मा ने निजी कारणों से इस्तीफा दिया है। इसके लिए कप्तान राहुल द्रविड़ को भी जिम्मेदार ठहराया गया।

वैसे तो माल्या की छवि विजयी व्यवसायी की रही है लेकिन उनके हाल के कुछ कदमों ने उनकी छवि को क्षति पहुंचाई है, खासकर क्रिकेट के क्षेत्र में माल्या साख अर्जित नहीं कर पाए हैं। खेलों में खेल भावना बहुत ही महत्त्वपूर्ण होती है। इसके अलावा खेल के नजरिये से आंकड़े भी बहुत अहम होते हैं। तभी तो इस तरह अंतहीन बहसें चलती रहती हैं कि कौन बेहतर बल्लेबाज, गेंदबाज या हरफनमौला है। 

क्या माल्या को ऐसा लगता है कि उनकी खेल की समझ द्रविड़ से बेहतर है? क्या वह खिलाड़ियों के बारे में द्रविड़ से बेहतर जानते थे? वह शायद यह भूल गए हैं कि सबसे बेहतरीन चुनी गई टीम भी हार रही है। ॅदूसरी बात यह भी है कि शुरूआती दौर में हार पर इतनी अधिक प्रतिक्रिया देने की भी जरूरत नहीं थी। यदि कोई जिम्मेदारी उठाना चाहता है तो वह कॉर्पोरेट भारत की सीख से अधिक तो खुद स्वयं ही सीख सकता है।

जरा सोचिए कि जब प्रबंधन के गलत निर्णयों और कारोबारियों के परिवारों में मची सिरफुटव्वल की वजह से लाखों निवेशकों को जो नुकसान होता है तब कौन जिम्मेदार होता है? आईपीएल के टाइटल प्रायोजक डीएलएफ ने ही जब आईपीएल में प्रायोजन को लेकर सोचने में काफी समय लिया।  उनका मानना था कि इसके चलते कहीं उनके छोटे निवेशकों के हित प्रभावित न हों।

पैसा खेल की प्रकृति को नहीं बदल सकता। खासकर अनिश्चितताओं से भरे क्रिकेट जैसे  खेल को तो बिलकुल भी नहीं जिसमें हर गेंद पर मैच का रुख बदलता रहता है। किसी भी खेल में हर समय सफलता केवल समय के विरुद्ध जाकर हो सकती है। दरअसल जीत  भावना और हौसले से मिलती है।

मनोरंजन का तगड़ा है तड़का
अरुण जेटली, अध्यक्ष दिल्ली ऐंड डिस्ट्रिक्ट क्रिकेट एसोसिएशन

क्रिकेट के अति लघु संस्करण टी-20 का अभी तक पूरा उपयोग नहीं किया गया है। वैसे जबसे इसकी शुरुआत हुई है तबसे हर कोई इससे लाभान्वित हो रहा है। इससे खिलाड़ियों को बहुत अच्छा पैसा मिल रहा है।

क्रिकेट संघ स्टेडियम के जरिये कमाई कर रहे हैं। इस कमाई से बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने में मदद मिल रही है। बात दर्शकों को बेहतरीन मनोरंजन मिल रहा है जिसकी कोई तुलना नहीं की जा सकती है। इसमें क्रिकेट के अलावा चीयरलीडर्स और डांसर भी दर्शकों का मनोरंजन करती नजर आ रही हैं।

मैंने अपने जीवन में कभी इतना बढ़िया मनोरंजन नहीं देखा है। आईपीएल के जरिये बीसीसीआई, राज्य क्रिकेट संघों के साथ-साथ दर्शकों की भी जीत हुई है। इसने भारत  को क्रिकेट का मक्का बन दिया। खिलाड़ियों को अगर पैसा और प्रसिद्धि चाहिए तो भारत आकर खेलना ही होगा।

आईपीएल की वजह से खिलाड़ियों को उनके नाम और प्रदर्शन के मुताबिक पैसा मिल रहा है। इससे खिलाड़ी बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रोत्साहित हो रहे हैं और इसके नतीजे भी देखने को मिलने लगे हैं। और फ्रेंचाइजी भी उसी खिलाड़ी को ज्यादा धन देंगे जो अच्छा प्रदर्शन करेगा।

इस लीग से खिलाड़ियों की एक नई खेप तैयार करने में भी मदद मिली है। रोहित शर्मा, एम एस धोनी, शिखर धवन और एस बद्रीनाथ और इन जैसे कई खिलाड़ी अपने करियर में रणजी ट्रॉफी तक सिमटे हुए थे लेकिन अब  लीग के जरिये धमाल मचा रहे हैं। कुल मिलाकर इस लीग से इन जैसे खिलाड़ियों को प्रतिष्ठा मिली है। ठीक यही बात पुराने दिग्गजों पर लागू होती है।

कुछ खराब मैचों से उन पर दबाव आ सकता है क्योंकि इस स्थिति में टीमें उनको अंतिम एकादश में खिलाने का जोखिम नहीं ले सकेंगी। वास्तव में इस समय टीमों के कप्तान और कोच ही टीम के चयनकर्ता हैं। लेकिन जल्द ही जनता टीम चयन प्रक्रिया का  खास हिस्सा बन जाएगी। तब उस खिलाड़ी का चयन करना बहुत मुश्किल होगा जो प्रदर्शन नहीं कर रहा होगा।

First Published - May 22, 2008 | 12:48 AM IST

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