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जेटा से भारतीय सड़कों पर धूम मचाने की तैयारी

Last Updated- December 07, 2022 | 9:42 AM IST

सिंड्रेला की कहानियों से प्रसिद्धि पाने वाले ब्रदर्स ग्रिम ने 19वीं शताब्दी में फिर से स्लीपिंग ब्यूटी लिखी। इस परी कथा को सबसे पहले चार्ल्स पेरो ने लिखा था।


पहली बार भले ही इस कहानी को फ्रांसीसी लेखक ने लिखा था, पर सही मायनों में तो इसे लोकप्रियता तब मिली जब ब्रदर्स ग्रिन ने इसे लिखा और उसके बाद इस कहानी का कई दूसरी भाषाओं में अनुवाद भी किया गया।

जब मैं डॉर्नरोनशेंशक्लोस के सामने खड़ा था तो मैं उस राजकुमारी, उन टावरों और यहां तक कि उन दीवारों को भी महसूस कर सकता था, जिसका इस्तेमाल ब्रदर्स ग्रिन ने अपनी कहानी में किया था। इस किलानुमा होटल को 1341 में बनाया गया था। इस कहानी में बताया गया है कि आखिर कैसे एक राजकुमार एक सोती हुई राजकुमारी को समय की जंजीरों से छुड़ाता है।

अगर फोक्सवैगन इंडिया को लगता है कि जेटा कार का एक ऐसा मॉडल है जो उस राजकुमार की तरह है तो यह भी देखने लायक होगा कि उसका यह नजरिया कितना सही है और कितना गलत। फोक्सवैगन इंडिया पसैट के बाद अपना दूसरा सबसे खास मॉडल बाजार में उतारने की तैयारी में है जिसे संभवत: इस महीने के मध्य तक उतारा जाएगा। हां आपके पास अपनी पसंदीदा कार टॉरेग बुक करने का अवसर भी है पर इस एसयूवी से किसी को कोई टक्कर दी जा सकेगी, ऐसा नहीं लगता। हालांकि ऐसा माना जा रहा है कि जेटा के आने से इस रेंज की बाकी गाड़ियों में कुछ हलचल देखने को मिलेगी।

चाहे वह होंडा सिविक हो, या फिर एकॉर्ड या फिर कोई दूसरी गाड़ी, तय है कि जेटा के आने से बाजार में एक नई सुगबुगाहट तो होगी ही। हम सभी जानते हैं कि जेटा गोल्फ पर आधारित है और यह इसका पांचवां वर्जन है। इस कार के पेट्रोल और डीजल वाले कई वर्जन मौजूद हैं पर शुरुआत में 1.6 लीटर पेट्रोल और 1.9 लीटर पंप-डयूज डीजल वर्जन को देश के बाजार में उतारा जाएगा। भारत में इन दोनों ही मॉडलों में या तो 5 स्पीड मैनुअल या डीएसजी गियरबॉक्स मौजूद होगा।

हम 1.9 लीटर पीडी इंजन से तो वाकिफ ही हैं जो बुलेट प्रूफ है और लॉरा में लगा होता है। 1.6 लीटर इंजन के बारे में अभी लोगों को खास जानकारी नहीं है और इससे वाकिफ होना जरूरी है। इस इंजन की क्षमता 5600 आरपीएम पर 102 बीएचपी की है और इसका टॉर्क 15 किलो से कुछ अधिक का है। यह इंजन कई वीडब्लू कारों में लगा हुआ है, जिनमें गोल्फ और पोलो भी शामिल है। पर मुझे ठीक से इस बात का अंदाजा नहीं है कि भारत के लिए ये इंजन कितने मुफीद बैठेंगे क्योंकि अगर शक्ति और टॉर्क के हिसाब से देखा जाए तो होंडा सिविक और टोयोटा की कोरोला भारत के लिए फिट नहीं बैठती।

पर गैसोलीन के मसले को लेकर चलें तो फोक्सवैगन के पास कोई और विकल्प हो भी नहीं सकता था क्योंकि उसके नए इंजन भारतीय ईंधनों के लिए कुछ ज्यादा ही हाइटेक हैं। अब फोक्सवैगन की नई मॉडल जेटा शक्तिशाली इंजनों के साथ कैसे तालमेल बिठा पाएगी इसके लिए कंपनी के अधिकारियों ने जर्मनी जाकर इसका पता लगाने की कोशिश की। इससे भारत में इस ब्रांड के पड़ने वाले प्रभाव को भी समझने में आसानी हुई। कंपनी के पास वैसे 1.4 टीएसआई और 2.0 टीडीआई इंजन का भी विकल्प था जो पसैट में लगा होता है।

यूरोप और अमेरिका में ज्यादातर जेटा मॉडलों में 1.4 टीएसआई युक्त इंजन को ही लगाया जाता है। और इसकी एक बड़ी वजह है कि इस इंजन को बनाने में जिस तकनीक का इस्तेमाल किया गया है वह काफी उच्च कोटि की है। पर अर्थव्यवस्था और कार्बन डाई ऑक्साइड गैस के उत्सर्जन को लेकर जो दबाव था उसे ध्यान में रखते हुए फोक्सवैगन ने इस बार एक छोटा इंजन उपयोग में लाने का मन बनाया। पर टि्वन चार्जिंग तकनीक के इस्तेमाल से और अतिरिक्त टर्बोचार्जर और सुपरचार्जर को जोड़कर कंपनी ने इंजन की क्षमता और शक्ति को लेकर जो समस्या हो रही थी उसे सुलझा लिया।

साथ ही कार में 2.0 लीटर इंजन का टॉर्क इस्तेमाल किया गया और कार्बन डाई ऑक्साइड  के उत्सर्जन को लेकर भी जो समस्या थी, उसका भी समाधान ढूंढ लिया गया। इसके लिए डीएसजी 7 स्पीड वैरिएंट और 120 बीएचपी को कार में शामिल किया गया। आश्चर्यजनक रूप से 7 स्पीड डीएसजी वाला यह पहला टीएसआई वैरिएंट है। अगर 120 बीएचपी की बात सुनकर ही आप चौंक गए हैं तो जरा ठहरिए 140 और 170 बीएचपी पावर के विकल्प भी मौजूद हैं। इसे सुनकर क्या आपको गोल्फ जीटीआई की याद नहीं आती है? पर इसके लिए आपको 95 आरओएन ईंधन की जरूरत होगी पर भारत में 87 आरओएन से ज्यादा की गारंटी नहीं दी जा सकती।

अब इतना सुनने के बाद आपकी समझ में आ ही गया होगा कि आखिर क्यों फिलहाल फोक्सवैगन से इससे ज्यादा शक्तिशाली इंजन की अपेक्षा नहीं की जा सकती है। अगर आप मुझसे पूछें कि इन इंजनों का प्रदर्शन कैसा है तो बस गुणगान करने से काम पूरा नहीं होगा, यह भी बताना जरूरी होगा कि कार की टेस्ट ड्राइव करने पर क्या अनुभव हुआ। फोर्स्ड इंडक्शन के पीछे वास्तव में क्या जादू छिपा है इसे जानने का मौका तो मुझे तब मिला जब मैंने 140 बीएचपी के वैरिएंट को फ्रैंकफर्ट से कसेल के बीच दौड़ा कर देखा।

चाहे कितनी भी रफ्तार और आरपीएम हो, इससे लो एंड, मिड रेंज और हाई एंड परफॉर्मेंस प्राप्त किया जा सकता है। सुपरचार्जर गतिशीलता लाने में मदद करता है और जब टर्बो की हालत बिगड़ने लगती है तो सुपरचार्जर एक बार फिर अपना काम शुरू कर देता है।  जिस कार पर मैंने सवारी की थी वह 5 स्पीड मैनुअल ट्रैनी को ध्यान में रखकर तैयार किया गया था और दमदार गियर लीवर से अलग हटकर भी अगर बात करें तो इस पर सवारी करते हुए ऐसा लग रहा था मानो हम गोल्फ जीटीआई पर चल रहे हों।

अगर ताकत पर आपकी नजर हो तो यह कार आपको कभी दोबारा सोचने का मौका नहीं देगी और किसी दूसरी गाड़ी को ओवरटेक करने के लिए भी आपको हिचकिचाने की जरूरत नहीं होगी। हां जिस कार में 120 बीएचपी क्षमता का ऑप्शन है वहां आपको थोड़ी मायूसी जरूर हो सकती है क्योंकि कार का वजन भी उस लिहाज से 1,250 किलो है जो कम नहीं है। इसमें पावर टू वेट अनुपात 95 बीएचपी प्रति टन का है जिससे आप ऐसी रफ्तार की उम्मीद कर सकते थे जो आपको खुशी से झूमने पर मजबूर कर देती, पर अफसोस कि ऐसा हुआ नहीं। कार से जो मूमेंटम मिलता है वह काबिले तारीफ नहीं लगता है।

इस परफॉर्मेंसस को देखते हुए तुरंत इस बात की जरूरत महसूस होने लगी कि टॉर्क में कुछ परिवर्तन किया जाना चाहिए। ऐसे में 140 बीएचपी का 2.0 टीडीआई एक अच्छा विकल्प बन कर सामने आया। आपको यह भी ध्यान में रखना चाहिए कि पसैट का वजन जेट से केवल 70 किलो अधिक है और उसमें भी कुछ इसी तरह का इंजन लगा हुआ है तो ऐसे में जेटा से भी यह उम्मीद जायज है कि वह स्मार्ट कार के रूप में उभर कर आए। और जेटा यहां निराश करती भी नहीं है। इसमें लगे हुए इंजन की तारीफ आपको करनी ही पड़ेगी। इसमें 6 स्पीड डीएसजी लगा हुआ होता है जो 1.9 पीडी में भी पाया जाता है।

इस इंजन की क्षमता और टॉर्क भी काबिले तारीफ है, जो कार की बूट पर आरएस का ठप्पा लगाने के लिए काफी है। इसका बूट भी काफी पड़ा है और इसे आसानी से रियर सीट से भी उपयोग में लाया जा सकता है। गाड़ी में स्पेस भी काफी है और अगर इस कार की पूरी बॉडी की बनावट पर गौर करें तो यह काफी आकर्षक है। भारत में बेची जा रही स्कोडा की तुलना में तो यह एक कदम आगे ही है। कार कई मोर्चों पर आपको पसैट सा लुक देती है, खासतौर पर स्टीयरिंग। तो अगर आपको पसैट से लगाव है और फिर भी आप जेटा खरीदते हैं तो भी आपको पसैट की कमी नहीं लगेगी।

कार में ड्राइविंग सीट पर बैठे व्यक्ति की सुविधाओं का खास खयाल रखा गया है हालांकि पैडल की पोजिशनिंग थोड़ी गड़बड़ जरूर लगती है और डेड पैडल के लिए काफी जगह खाली लगती है। पर फिर भी आप आसानी से क्लच पर पकड़ बना सकते हैं और एबीएस पर काबू रखने में भी आपको कोई परेशानी नहीं आएगी। जेटा के दूसरे वैरिएंट्स की तरह ही इस कार को चलाने में मजा आता है क्योंकि सड़कों पर यह काफी स्मूद नजर आती है और अगर स्पीड को बढ़ाया भी जाए तो भी ड्राइव में कोई परेशानी नहीं होती। पर हमें यह भी नहीं भूलना चाहिए कि जर्मनी की सड़कों और भारत की सड़कों में काफी अंतर है।

अगर ये सारे अनुभव जर्मनी की सड़कों के अनुसार हैं तो हो सकता है भारत में ये कुछ अलग ही एहसास दें। कार में लगे टीएसआई इंजन का हल्का होना भी कार की खूबियों में इजाफा करता है। इसका स्टीयरिंग भी काफी अच्छा है जो आपको जोरदार पकड़ देता है और ड्राइव करते वक्त आपको और सहूलियत होती है। कुल मिलाकर टीएसआई का अनुभव काफी रोमांचकारी और जोश पैदा करने वाला है। हां इतना जरूर है कि जब आप कार के डीजल मॉडल की ओर रुख करते हैं तो अनुभव इतना अच्छा नहीं होता। पर कार पर जो अतिरिक्त वजन पड़ रहा है उसका असर कहीं न कहीं तो दिखना ही है।

भले ही पसैट के साथ ऐसा देखने को नहीं मिलता हो पर जेटा पर क्रॉसविंड का असर आसानी से देखने को मिलता है। आप यह सोच रहे होंगे कि इस कार के बारे में इतनी चर्चा करने के बाद भी अब तक हमने इसके डिजाइन के बारे में कुछ क्यों नहीं कहा है तो आपको बता दें कि एक बार को जर्मनी की सड़कों पर देखने के बाद यह आपको कोई खास आकर्षक न लगे, पर अगर आप इसे अकेले में देखें तो यह आपको पसैट से ही कुछ मिलती जुलती दिखेगी।

और इसमें कोई परेशानी भी नहीं है क्योंकि गोल्फ के फ्रंट एंड और टेल को छोड़कर (जो एक बार में आपको लास्ट जेनरेशन के यूरोपीय एकॉर्ड की झलक लग सकती है) बाकी सब कुछ ऐसा है मानो यह उस कार का बड़ा भाई हो। वास्तव में कहें तो दरअसल जेटा को बनाया भी इसलिए गया था ताकि यूरोप के ऐसे लोग जो पसैट को खरीदने की कूवत नहीं रखते हों वे भी इससे मिलती जुलती किसी कार को कम कीमत पर खरीद सकें। साथ ही उन्हें पसैट की खूबियों से भी समझौता न करना पड़े।

यहां तक की अमेरिका में तो अभिभावक अपने कॉलेज जाने वाले बच्चों को होंडा सिविक या टोयोटा कोरोला देने की बजाय जेटा देना ही पसंद करते हैं। और जेटा की सबसे बड़ी खासियत भी यही है कि यह फोक्सवैगन ब्रांड को ज्यादा से ज्यादा लोगों की बीच पहुंचा सकती है। भारत में अगर कोई कार जेटा को कड़ी टक्कर दे सकती है तो वह लॉरा है जो जेटा के ही प्राइस रेंज में आती है और गुणवत्ता की बात करें तो भी इसमें कमोबेश वे सारी खूबियां हैं जो जेटा में मिलती हैं।

पर फिर भी मुझे लगता है कि 13 से 16 लाख रुपये की प्राइस रेंज के बीच की कार जेटा लॉरा की बिक्री को कम कर सकती है और स्कोडा को यह बर्दाश्त नहीं होगा। खासतौर पर ऐसे में जब पहले से उसके ओक्टाविया मॉडल की बिक्री को धक्का लग चुका है। कुल मिलाकर देखें तो जेटा के लिए यूरोप में जो मुश्किलें थीं भारत में भी वही रहने वाली हैं, पर इतना जरूर है कि अगर जेटा मॉडल की सीमित कारें ही भारतीय बाजारों में उतारी जाती हैं तो फिर उसे कोई परेशानी नहीं होगी। तब परेशानी सिर्फ एक कंपनी को हो सकती है और वह है स्कोडा।

अब देखना है कि फोक्सवैगन अपनी योजनाओं पर किस तरीके से काम करती है और जेटा को लोकप्रिय बनाती है। हो सकता है हमें एक बार फिर से कुछ वैसा ही द्वंद्व देखने को मिले जो स्कोडा सुपर्ब और फोक्सवैगन पोलो के समय में देखने को मिला था। कुछ उसी तरह जैसे स्लीपिंग ब्यूटी की कहानी में होता है जहां कई राजकुमारियां अपना भाग्य आजमाती हैं पर सफलता किसी एक को ही मिलती है।

First Published - July 7, 2008 | 11:36 PM IST

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