AI and Heatwave: भारत में लगातार बढ़ती हीटवेव अब सिर्फ मौसम की समस्या नहीं रह गई है। यह लोगों की सेहत, बिजली व्यवस्था, शहरों की प्लानिंग और रोजमर्रा की जिंदगी पर बड़ा असर डाल रही है। इसी वजह से अब मौसम एजेंसियां और विशेषज्ञ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI का इस्तेमाल बढ़ा रहे हैं, ताकि हीटवेव की बेहतर भविष्यवाणी की जा सके और लोगों को समय रहते चेतावनी दी जा सके।
लेकिन अब चर्चा सिर्फ मौसम का अनुमान लगाने तक सीमित नहीं है। विशेषज्ञों का कहना है कि AI का इस्तेमाल अब इस बात के लिए भी किया जा सकता है कि शहर भीषण गर्मी से निपटने के लिए पहले से क्या तैयारी करें।
भारत मौसम विभाग यानी IMD ने उत्तर-पश्चिम, मध्य और पूर्वी भारत के कई हिस्सों में रेड और सीवियर हीटवेव अलर्ट जारी किया है। विभाग के मुताबिक कई इलाकों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच चुका है और गर्मी का यह दौर आगे भी जारी रह सकता है।
इसका असर लोगों की सेहत पर भी दिखाई देने लगा है। तेलंगाना में हाल ही में हीटस्ट्रोक से कम से कम 16 लोगों की मौत हुई, जबकि आंध्र प्रदेश में गर्मी से जुड़ी बीमारियों के मामले बढ़े हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि मौसम की भविष्यवाणी करना सिर्फ पहला कदम है। असली जरूरत यह है कि शहर AI की मदद से यह तय करें कि कहां ज्यादा खतरा है और वहां क्या कदम उठाने चाहिए। AI की मदद से अब शहरों में ‘Urban Heat Island’ यानी ऐसे इलाकों की पहचान की जा रही है जहां तापमान बाकी हिस्सों से ज्यादा रहता है। इसके लिए सैटेलाइट तस्वीरें, पेड़-पौधों की संख्या, इमारतों की घनत्व और जमीन की सतह के तापमान जैसे डेटा का इस्तेमाल किया जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इससे यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि कहां ज्यादा पेड़ लगाने की जरूरत है, किन इलाकों में Cool Roofs यानी गर्मी कम करने वाली छतें बनाई जाएं और कहां छायादार सार्वजनिक जगहें तैयार की जाएं।
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FLAME University के प्रोफेसर अंजल प्रकाश का कहना है कि AI की सबसे बड़ी ताकत यह है कि वह मौसम से जुड़ी जानकारी को स्थानीय स्तर पर उपयोगी फैसलों में बदल सकता है। उदाहरण के तौर पर, AI यह बता सकता है कि किस इलाके में हीटवेव से बीमार पड़ने का खतरा ज्यादा है। इससे प्रशासन पहले से एंबुलेंस तैनात कर सकता है, अस्पतालों को तैयार कर सकता है और लोगों को चेतावनी भेज सकता है।
इसके अलावा बिजली की मांग को संभालने में भी AI अहम भूमिका निभा सकता है। बढ़ती गर्मी की वजह से AC और कूलिंग उपकरणों का इस्तेमाल बढ़ रहा है, जिससे बिजली ग्रिड पर दबाव बढ़ता है। AI सिस्टम पहले से अनुमान लगा सकते हैं कि किस इलाके में बिजली की मांग बढ़ने वाली है, ताकि ब्लैकआउट रोका जा सके।
विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल AI आधारित सिस्टम बड़े शहरों तक सीमित हैं। असली चुनौती इन्हें छोटे शहरों और गांवों तक पहुंचाने की है। कई जगह इंटरनेट की कमी, मौसम से जुड़ा कमजोर डेटा और तकनीकी संसाधनों की कमी बड़ी बाधा है। इसी वजह से अब लोकल भाषा में SMS अलर्ट, मोबाइल आधारित सिस्टम और ऑफलाइन एप्लिकेशन पर काम किया जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि ASHA वर्कर्स, पंचायत और लोकल रेडियो नेटवर्क की मदद से भी लोगों तक जानकारी पहुंचाई जा सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि AI अकेले हीटवेव की समस्या का समाधान नहीं कर सकता। इसके लिए मजबूत सरकारी नीति, बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और स्थानीय प्रशासन की तैयारी भी जरूरी है। Plutas.ai के संस्थापक अनुपम श्रेय का कहना है कि कई शहरों में अभी भी वार्ड स्तर पर हीट रिस्क मैपिंग नहीं है। वहीं, झुग्गी और छोटे घरों के अंदर की गर्मी को भी अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। विशेषज्ञों ने यह भी चेतावनी दी है कि अगर AI मॉडल कमजोर या अधूरे डेटा पर आधारित होंगे तो गलत फैसले भी हो सकते हैं।
दुनिया के कई शहर AI की मदद से हीट एडेप्टेशन यानी गर्मी से बचाव की नई तकनीकों पर काम कर रहे हैं। भारत में भी अब हीटवेव से निपटने के लिए AI आधारित सिस्टम को तेजी से अपनाने की चर्चा बढ़ रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले समय में चुनौती सिर्फ मौसम का अनुमान लगाने की नहीं होगी, बल्कि इस बात की होगी कि शहर AI से मिली जानकारी को जमीन पर कितनी तेजी और सही तरीके से लागू कर पाते हैं।