अर्थशास्त्रियों का कहना है कि इससे पश्चिम एशिया संकट के बीच खपत (कंजम्प्शन) को बनाए रखने में सरकार को मदद मिलेगी।
सरकार द्वारा शुक्रवार को पेट्रोल और डीजल पर 10 रुपये प्रति लीटर एक्साइज ड्यूटी में की गई कटौती से वित्त वर्ष 2027 में करीब 1.5 लाख करोड़ रुपये का राजकोषीय नुकसान हो सकता है। हालांकि, अर्थशास्त्रियों का कहना है कि इससे पश्चिम एशिया संकट के बीच खपत (कंजम्प्शन) को बनाए रखने में सरकार को मदद मिलेगी।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट में कहा, “पश्चिम एशिया संकट को देखते हुए घरेलू खपत के लिए पेट्रोल और डीजल पर केंद्रीय एक्साइज ड्यूटी 10 रुपये प्रति लीटर कम की गई है। इससे उपभोक्ताओं को कीमतों में बढ़ोतरी से राहत मिलेगी।”
क्वांटिएको की अर्थशास्त्री युविका सिंघल ने कहा, “यह कटौती ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को सहारा देगी। अगर यह फैसला नहीं लिया जाता, तो कीमतों में बढ़ोतरी सीधे उपभोक्ताओं पर डाल दी जाती।”
एक्सपर्ट्स का मानना है कि पश्चिम एशिया संकट से उपभोक्ताओं को बचाने के लिए सरकार जो अतिरिक्त राजकोषीय बोझ अपने ऊपर ले रही है, उससे मजबूत पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) करने की उसकी क्षमता प्रभावित हो सकती है।
बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनाविस ने कहा, “उर्वरक सब्सिडी के कारण सरकार पर सब्सिडी का बोझ भी बढ़ सकता है, जिससे राजस्व में कमी (रेवेन्यू स्लिपेज) ज्यादा हो सकती है। अब यह देखना होगा कि इन खर्चों की भरपाई खर्च में कटौती करके की जाती है या नहीं।”
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पश्चिम एशिया में बढ़ते युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने और व्यापार मार्गों में बाधा आने से कई अर्थशास्त्रियों ने वित्त वर्ष 2027 के लिए अपनी विकास दर के अनुमान को घटा दिया है।
ICICI Bank ने अपनी एक रिसर्च रिपोर्ट में कहा कि अगर सप्लाई की समस्या एक महीने में ठीक हो जाती है, तो FY27 में GDP ग्रोथ 7 फीसदी रहने का अनुमान है। यह पहले के अनुमान से 0.5 फीसदी कम है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया, “अगर संघर्ष एक महीने से ज्यादा खिंचता है और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के जरिए एनर्जी सप्लाई प्रभावित रहती है, तो हमारे अनुमान के लिए नीचे की ओर जोखिम बने रहेंगे। इसके अलावा, ऐसी स्थिति वैश्विक आर्थिक वृद्धि पर भी नकारात्मक असर डालेगी और भारत के लिए अतिरिक्त चुनौतियां पैदा करेगी।”
Goldman Sachs भारत की FY27 विकास दर का अनुमान घटाने वाली पहली बड़ी संस्था थी। इसने ग्रोथ अनुमान 7 फीसदी से घटाकर 6.5 फीसदी कर दिया। रिपोर्ट में कहा गया कि निर्यात में धीमापन और लगातार ऊंची बनी महंगाई (स्टिकी इन्फ्लेशन) इसके मुख्य कारण हैं।