मंदी के इस दौर में भी महंगे मकान बेचने की कोशिश को क्या कहा जाए!
ऐसी ही कोशिश का खामियाजा आजकल लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) को भुगतना पड़ रहा है। उसकी इस योजना को तगड़ा झटका लगा है।
एलडीए के सस्ते मकान खरीदने के लिए अब भी ग्राहकों की कतार लग रही है, लेकिन नए इलाकों में बन रहे महंगे अपार्टमेंटों के लिए खरीदार ढूंढे नहीं मिल रहे हैं। प्राधिकरण ने मांग न होने के चलते वसंत कुंज योजना में प्रस्तावित बहुमंजिला स्कीम पैराडाइज अपार्टमेंट को रद्द कर दिया है।
जानकीपुरम में बनाई जाने वाली सृष्टि अपार्टमेंट परियोजना के लिए भी खरीदारों का टोटा पड़ा हुआ है। अधिकारियों का कहना है कि इन दोनों योजनाओं में बनाए जा रहे तीन बेडरूम के मकानों की कीमत 20 लाख रुपये के करीब होने की वजह से खरीदारों ने उस ओर रुख नही किया है।
इसके ठीक उलट जब इस साल की शुरुआत में प्राधिकरण ने राजधानी की गोमतीनगर योजना में दुर्बल आय वर्ग के आवासों के पंजीकरण की प्रक्रिया शुरू की थी तब जनता ने इसे हाथों-हाथ लिया था। कुल 475 निम्न आय वर्ग के आवासों के लिए 10,200 लोगों ने आवेदन किया था। इस वर्ग के आवासों के लिए इतनी मारा-मारी तब थी जबकि आवेदन के लिए न्यूनतम योग्यता गरीबी रेखा के नीचे का राशन कार्ड होना जरूरी था।
एलडीए के अधिकारियों का कहना है कि पैराडाइज और सृष्टि अपार्टमेंट के लिए पंजीकरण को फिलहाल रद्द कर दिया गया है। इसका कारण पर्याप्त तादाद में आवेदकों का न आना है। प्राधिकरण ने एक अन्य योजना ऐशबाग टावर्स के लिए भी लोगों से आवेदन मांगे थे। इस योजना के तहत प्ाधिकरण को 1200 मकान बनाने है। इस योजना को अच्छी जगह पर बनाया जा रहा है, जिसकी वजह से लोग इसमें दिलचस्पी ले रहे हैं।
हालांकि यहां भी अपार्टमेंटो की कीमत 12 लाख से 20 लाख रुपये के बीच ही रखी गयी है। ऐशबाग टावर्स में 20 लाख की कीमत के 400 मकान बनाए जा रहे हैं। प्राधिकरण के अधिकारी बताते हैं कि महंगे मकानों के लिए इस योजना पर भी बहुत ज्यादा आवेदन प्रस्ताव नही मिले लेकिन अंतिम तारीख आने पर सभी 400 मकानों के लिए आवेदन आ चुके हैं।
अधिकारी यह बात साफ तौर पर स्वीकार करते हैं कि सृष्टि अपार्टमेंट और पैराडाइज के लिए लोगों ने बिल्कुल दिलचस्पी नहीं दिखाई है, लेकिन इसके कारणों का खुलासा वे नहीं कर पाते। कुछ अधिकारी जरूर इसका कारण शहर से ज्यादा दूरी और कीमत का अधिक होना बता रहे हैं।
कहां हैं खरीदार
महंगे मकानों के लिए नहीं मिल रहे हैं खरीदार
ग्राहक सस्ते मकानों को ले रहे हैं हाथों हाथ
ग्राहकों की बेरुखी से एलडीए ने रोका काम
शहर से दूर परियोजनाओं को नहीं मिल रहे ग्राहक