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उप्र की फसल काट रहे पंजाब के किसान

Last Updated- December 11, 2022 | 1:25 AM IST

चुनाव के इस मौसम में उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए एक तरफ जहां एक अच्छी खबर है, वहीं दूसरी खबर उन्हें निराश करने वाली भी है।
इस दफा गेहूं के किसानों के लिए सस्ती दरों पर मड़ाई करने के लिए गांव गांव में पंजाब के हार्वेस्टर पहुंच चुके हैं। किसानों को मड़ाई करने के लिए स्थानीय मजदूरों और थ्रेसर मालिकों का मुंह देखने की जरूरत नहीं है।
पंजाब से हजारों की संख्या में किसान उत्तर प्रदेश के गांवों में डेरा डालकर सस्ती दरों में और सबसे जल्दी मड़ाई कर रहे हैं। हालांकि तस्वीर का एक दूसरा पहलू यह भी है कि केंद्र और राज्य सरकार की ओर से गेहूं के घोषित दाम 1080 रुपये प्रति क्विंटल पर किसानों से इसे खरीदने के लिए कोई नहीं मिल रहा है।
सरकारी खरीद की सुस्त रफ्तार के चलते खरीद केंद्र सूने पड़े हैं और कस्बों और गांवों के आढ़ती सरकारी कीमत भी देने को तैयार नहीं हैं। पूर्वी उत्तर प्रदेश के कुशीनगर, देवरिया, महाराजगंज, बस्ती जैसी कई लोकसभा की सीटों पर ये मसला चुनावी मुद्दे में तबदील हो गया है।
श्रावस्ती जनपद के धनगर किसान और ठेकेदार अनूप कुमार सिंह का कहना है कि सरकार के दामों पर तो गेहूं गांवों से खरीद कर पाना संभव ही नहीं है और इसका कारण साफ है कि आटे के भाव इस तुलना में बढ़े नहीं हैं कि मिल मालिक चार पैसे कमा कर बचा सके।
इस बाबत सरकारी केंद्रों के संचालकों का कहना है कि चुनाव के बाद खरीद में तेजी आएगी। निगम अधिकारियों का कहना है कि अभी तो जून तक खरीद होनी है।

First Published - April 17, 2009 | 8:50 PM IST

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