उत्तर प्रदेश में 16 अप्रैल को पहले चरण में जिन 16 निर्वाचन क्षेत्रों में चुनाव होने जा रहा है, उनके लिए थोड़ी उम्मीद दिखती है।
पूर्वी उत्तर प्रदेश कहे जाने वाले इस क्षेत्र की पहचान विकास में पीछे रहने, गरीबी, बेरोजगारी और हिंसक घटनाओं से होती रही है। अहम सवाल है कि पूर्वी उत्तर प्रदेश में सत्ता राजनीति और आपराधिक व्यवहार के बीच आखिर क्या रिश्ता है?
कहना मुश्किल है लेकिन इंडीकस एनालिटिक्स ने जो आंकड़े एकत्रित किए हैं, वे परंपरागत सोच की ओर इशारा करते हैं। इस क्षेत्र में पूरी जद्दोजहद अपने रसूख को मान्यता दिलाने के लिए है। लोग खुद को इससे अलग करके देखना पसंद नहीं करते। आजमगढ़ इस्लामी कट्टरपंथियों के लिए बदनाम है।
यहां हिंसक घटनाओं में पिछले चार साल यानी 2004 से 2008 के बीच गिरावट आई है। कुल आपराधिक मामले 23 फीसदी से घटकर 22 फीसदी रह गए। साथ ही, इस दौरान यहां बिजली वाले घरों की संख्या 41 फीसदी से बढ़कर 60 फीसदी हो गई।
इस दौरान साक्षरता दर 61 फीसदी से बढ़कर 66 फीसदी हो गई। इसी तरह मिर्जापुर में साक्षरता दर 59 फीसदी से बढ़कर 64 फीसदी हो गई जबकि चंदौली में यह आंकड़ा 66 फीसदी से बढ़कर 70 फीसदी हो गया।