फोटो क्रेडिट: FIFA
साल 2026 में होने वाला फीफा वर्ल्ड कप महज एक खेल का मैदान नहीं, बल्कि दुनिया की अर्थव्यवस्था और इंटरनेट की मजबूती को परखने वाली एक बहुत बड़ी प्रयोगशाला बनने जा रहा है। अमेरिका, कनाडा और मेक्सिको की मेजबानी में होने वाले इस टूर्नामेंट को बैंक ऑफ अमेरिका (BofA) ने एक ऐसा “मेगा इवेंट” करार दिया है, जो भविष्य में डेटा, मीडिया और फुटबॉल के सभी तौर-तरीको को पूरी तरह बदल कर रख देगा।
इस बार का वर्ल्ड कप तकनीकी रूप से अब तक का सबसे चुनौतीपूर्ण आयोजन होने वाला है। टूर्नामेंट में 48 टीमें शिरकत करेंगी और 16 शहरों में कुल 104 मैच खेले जाएंगे। अनुमान है कि पूरी दुनिया में करीब 6 अरब लोग इसे देखेंगे। आंकड़ों की बाजीगरी ऐसी है कि सिर्फ वर्ल्ड कप का फाइनल मुकाबला ही पूरी दुनिया के कुल इंटरनेट ट्रैफिक का 7% हिस्सा अकेला खा सकता है।
इस दौरान पैदा होने वाला डेटा करीब 2 एक्सबाइट्स (Exabytes) तक पहुंच सकता है, जो कि 45,000 साल लंबे 4K वीडियो के बराबर है। यह कतर में हुए पिछले वर्ल्ड कप की तुलना में 45 गुना ज्यादा है। स्ट्रीमिंग कंपनियां और ब्रॉडकास्टर्स 200 टेराबाइट्स के बैंडविड्थ रिजर्व के साथ तैयारी कर रहे हैं, ताकि एक साथ 5 करोड़ लोगों को बिना किसी रुकावट के मैच दिखाया जा सके। असल में, यह वर्ल्ड कप 5G और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसी तकनीकों का अब तक का सबसे बड़ा ‘लाइव स्ट्रेस टेस्ट’ होगा।
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मैदान पर होने वाले गोल के पीछे अरबों डॉलर का गणित छिपा है। एक्सपर्ट्स के अनुसार, यह वर्ल्ड कप करीब 41 अरब डॉलर की निवेश थीम पर आधारित है। फीफा और वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गेनाइजेशन (WTO) की एक स्टडी बताती है कि इस आयोजन से वैश्विक स्तर पर 80.1 अरब डॉलर का आउटपुट निकलेगा और दुनिया भर में लगभग 8.24 लाख नौकरियां पैदा होंगी।
इसका असर सिर्फ स्टेडियम तक सीमित नहीं रहेगा। स्पोर्ट्स टूरिज्म, होटल, एयरलाइंस और डिजिटल पेमेंट सेक्टर में भारी उछाल आने की उम्मीद है। साल 2025 में स्पोर्ट्स टूरिज्म से 672 अरब डॉलर की कमाई हुई थी और उम्मीद है कि 2030 तक खेल उद्योग की कुल कमाई में इसकी हिस्सेदारी 41% तक पहुंच जाएगी। वॉल स्ट्रीट के निवेशक इस वक्त उन कंपनियों पर नजरें गड़ाए बैठे हैं जो इस डिजिटल ट्रैफिक और फैंस के खर्च का सबसे ज्यादा फायदा उठाएंगी।
अगर फुटबॉल के मैदान की बात करें, तो इस बार मुकाबला इंसानी अनुमानों और मशीनी गणनाओं के बीच भी होगा। बैंक ऑफ अमेरिका के 65 एक्सपर्ट्स के एक सर्वे में 40% लोगों ने फ्रांस को खिताब का सबसे मजबूत दावेदार बताया है। जानकारों का मानना है कि स्टार खिलाड़ी किलियन एम्बाप्पे एक बार फिर ‘गोल्डन बूट’ जीतकर अपनी टीम को फाइनल तक ले जाएंगे। अधिकतर लोगों को उम्मीद है कि फाइनल मुकाबला फ्रांस और स्पेन के बीच होगा।
हालांकि, जब इसी डेटा को AI मॉडल में डाला गया, तो नतीजे थोड़े अलग आए। एआई सिमुलेशन में स्पेन के जीतने की संभावना फ्रांस के बराबर या कई बार उससे भी ज्यादा दिखाई दे रही है। खास बात यह है कि इस बार हर टीम के पास फीफा के ‘फुटबॉल एआई प्रो’ प्लेटफॉर्म का एक्सेस होगा, जो हर सेकंड करोड़ों डेटा पॉइंट्स का विश्लेषण कर खिलाड़ियों की रणनीति तय करने में मदद करेगा। ऐसे में 2026 का वर्ल्ड कप सिर्फ एक खेल नहीं, बल्कि तकनीक और पैसे का एक ऐसा मेल होगा, जिस पर दुनिया भर के निवेशकों और इंजीनियरों की उतनी ही नजर होगी जितनी कि फुटबॉल फैंस की।