मर्सिडीज-बेंज इंडिया ने जनवरी-मार्च तिमाही के दौरान पिछली तिमाही के मुकाबले वृद्धि दर्ज की है। पश्चिम एशिया संकट, वित्तीय बाजारों में उतार-चढ़ाव और कच्चे माल की बढ़ती लागत जैसी बाधाओं के बावजूद कंपनी ने यह उपलब्धि हासिल की है। कंपनी के टॉप-एंड लग्जरी वाहनों और इलेक्ट्रिक मॉडलों की मांग ने शुरुआती स्तर वाली श्रेणी में दबाव भी कम किया।
कंपनी के आंकड़ों के अनुसार जर्मनी की इस लग्जरी कार विनिर्माता ने साल 2026 की पहली तिमाही के दौरान 5,131 वाहन बेचे। यह संख्या पिछले साल की इसी अवधि में बेचे गए 4,775 वाहनों की तुलना में 7 प्रतिशत अधिक है। साथ ही इससे पिछली तिमाही यानी अक्टूबर-दिसंबर की अवधि में बेचे गए लगभग 4,800 वाहनों की तुलना में 5 प्रतिशत अधिक है। पहली तिमाही का यह प्रदर्शन मर्सिडीज-बेंज इंडिया के लिए अब तक का किसी वित्त वर्ष का बेहतरीन प्रदशर्न रहा और वित्त वर्ष 26 की बिक्री बढ़कर 19,363 वाहनों तक पहुंच गई।
प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी संतोष अय्यर ने कहा, ‘हम एकमात्र ऐसा लग्जरी ब्रांड हैं जिसने लगातार दो तिमाहियों में 5 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की है।’ उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कंपनी ने भू-राजनीतिक तनाव, विनिमय दर में गिरावट और दो बार मूल्य वृद्धि के बावजूद बिक्री की संख्या बढ़ाई है।
यह दमदार प्रदर्शन मुख्य रूप से मर्सिडीज-बेंज के प्रीमियम मिश्रण से आया है। इसकी टॉप-एंड लग्जरी श्रेणी में मेबैक, एएमजी, एस-क्लास और ईक्यूएस मॉडल शामिल हैं। पहली तिमाही में इस श्रेणी में 25 प्रतिशत और समूचे वित्त वर्ष में 16 प्रतिशत का इजाफा हुआ और इसने कुल बिक्री में 27 प्रतिशत का योगदान किया। बैटरी इलेक्ट्रिक वाहन (बीईवी) ने टॉप-एंड वाहनों की कुल बिक्री में 20 प्रतिशत हिस्सेदारी की। ईक्यूएस एसयूवी मॉडल भारत में कंपनी का सबसे ज्यादा बिकने वाला लग्जरी ईवी बनकर उभरा।