वित्त वर्ष 2026 में भारत का इलेक्ट्रिक यात्री वाहन बाजार 4.2 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ 199,923 वाहन तक पहुंच गया। यह पिछले वर्ष की तुलना में 83.6 फीसदी की बढ़ोतरी है। इस बढ़ते बाजार में वियतनामी कार निर्माता विनफास्ट और चीन की बीवाईडी जैसी नई विदेशी कंपनियों ने टेस्ला इंक. को काफी पीछे छोड़ दिया है, जबकि उन्हें भी पूरी तरह से निर्मित इकाई (सीबीयू) की आयात संबंधित दिक्कतों और भू-राजनीतिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा।
टेस्ला ने जुलाई 2025 में भारत में प्रवेश किया। उसने सितंबर में डिलिवरी शुरू की। इस तरह वित्त वर्ष 2026 में 342 वाहनों की बिक्री की। यह ईवी बाजार की केवल 0.17 प्रतिशत हिस्सेदारी है। विनफास्ट ने भी लगभग उसी समय बिक्री शुरू की थी। महज 12 महीने पहले ही एक नए ब्रांड के तौर पर बाजार में आई विनफास्ट ने 2,390 वाहनों की डिलिवरी की, जो टेस्ला की बिक्री से लगभग सात गुना ज्यादा है और इस तरह उसने ईवी बाजार में 1.2 प्रतिशत की हिस्सेदारी हासिल कर ली।
इस बीच, बीवाईडी ने वित्त वर्ष 2026 में 5,361 वाहनों की बिक्री दर्ज की, जो पिछले साल के मुकाबले 54 प्रतिशत ज्यादा है या टेस्ला की कुल बिक्री का लगभग 15 गुना है। यह तब हुआ जब उसने अपनी ज्यादातर गाड़ियां सीबीयू (पूरी तरह से बनी हुई यूनिट) के तौर पर आयात कीं, जिन पर 100–110 प्रतिशत की ड्यूटी लगती है।
इसके विस्तार में भू-राजनीतिक तनावों की वजह से भी रुकावटें आईं, जिनमें भारत में इसके प्रस्तावित 1 अरब डॉलर के संयुक्त उपक्रम को रोक भी शामिल है। इसके बावजूद, बीवाईडी ने अपने बड़े वाहन पोर्टफोलियो जैसे एट्टो 3 और ईमैक्स 7 का फायदा उठाया, जिनकी कीमत 25–35 लाख रुपये के बीच है।
साथ ही, उसने अपने सर्विस नेटवर्क का तेजी से विस्तार किया और सेमी-नॉक्ड डाउन (एसकेडी) असेंबली की संभावनाओं को तलाशने की योजना बनाई। कंपनी चेन्नई में एक छोटी फैक्टरी चलाती है, जिसकी सालाना उत्पादन क्षमता 10,000–15,000 गाड़ियां है, जबकि पूरी तरह से निर्माण करने की योजनाएं अभी भी अटकी हुई हैं।
टेस्ला के अपेक्षाकृत कमजोर प्रदर्शन को उसके सीमित रिटेल नेटवर्क से भी जोड़ा जा रहा है। कंपनी के अभी दिल्ली और मुंबई में सिर्फ दो शोरूम हैं, जबकि बीवाईडी के 30 से ज्यादा शहरों में लगभग 35–39 आउटलेट और विनफास्ट के 34-35 आउटलेट हैं।