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भारत में कम होगा नौकरियों में बदलाव

Last Updated- May 01, 2023 | 8:51 AM IST
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नौकरियों और कौशल के भविष्य के मद्देनजर तैयार की गई रिपोर्ट ‘फ्यूचर आफ जॉब्स’ में कहा गया है कि भारत के श्रम बाजार में नौकरियों में बदलाव 22 प्रतिशत रहेगा, जबकि वैश्विक औसत 23 प्रतिशत रहने की संभावना है।
श्रम बाजार के बदलाव में नौकरियों संबंधी कुल गतिविधियां शामिल हैं, जिसमें मौजूदा रोजगार के अनुपात में नई नौकरियों का सृजन और पुराने पदों को खत्म किया जाना शामिल है। इसमें ऐसे मामले शामिल नहीं होते हैं, जहां नए कर्मचारी किसी पुराने की जगह रखे जाते हैं। यह रिपोर्ट इंटरनैशनल एडवोकेसी ग्रुप ने तैयार की है, जिसमें विश्व की 45 अर्थव्यवस्थाओं के 27 औद्योगिक क्लस्टर से जुड़ी 800 कंपनियां शामिल हुईं।
भारत के श्रम बाजार में तकनीक से संचालित क्षेत्रों जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग (38 प्रतिशत), डेटा एनॉलिसिस ऐंड साइंटिस्ट्स (33 प्रतिशत) और डेटा एंट्री क्लर्क्स (32 प्रतिशत) में रोजगार में बदवाल की संभावना ज्यादा है।
वहीं दूसरी तरफ श्रम आधारित क्षेत्रों जैसे अकाउंटेंट्स और ऑडिटर्स (5 प्रतिशत), ऑपरेशंस मैनेजर्स (14 प्रतिशत) और फैक्टरी कर्मचारी (18 प्रतिशत) में बदलाव की संभावना कम है।
वैश्विक रूप से देखें तो रोजगार सृजन में आपूर्ति श्रृंखला, परिवहन, मीडिया, मनोरंजन और खेल में 6.9 करोड़ नई नौकरियों का सृजन होगा और 8.3 करोड़ नौकरियां कम होंगी जिससे नौकरियों की संख्या में 1.4 करोड़ की कमी आएगी, जो मौजूदा रोजगार का 2 प्रतिशत है।
ऑटोमेशन को लेकर 3 साल पहले की तुलना में कोई बदलाव नहीं देखा गया है, जब यह रिपोर्ट आखिरी बार प्रकाशित हुई थी।
इसमें कहा गया है, ‘इस समय करीब एक तिहाई कार्य (34 प्रतिशत)ऑटोमेटेड है, जो 2020 के आंकड़ों से महज 1 प्रतिशत ऊपर है। सर्वे में शामिल कंपनियों ने आगे ऑटोमेशन को लेकर अपनी उम्मीदें घटाई हैं। 2020 में जहां कंपनियों ने उम्मीद जताई थी कि 2025 तक 47 प्रतिशत काम का ऑटोमेशन होगा, वहीं अब 2027 तक 42 प्रतिशत ऑटोमेशन की उम्मीद जताई गई है।’

First Published - May 1, 2023 | 8:46 AM IST

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