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उड़ान 2.0 योजना को कैबिनेट की हरी झंडी, सरकार अब खर्च करेगी 28,840 करोड़ रुपये

उड़ान योजना अक्टूबर 2016 में शुरू की गई थी। इसका उद्देश्य उपयोग न हो रहे हवाई अड्डों को चालू कर और विमानन कंपनियों को वीजीएफ सहायता देकर हवाई यात्रा को किफायत बनाना है

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दीपक पटेल   
Last Updated- March 25, 2026 | 10:49 PM IST

देश के दूरदराज वाले इलाकों में हवाई संपर्क को बढ़ावा देने के उद्देश्य से केंद्रीय मंत्रिमंडल ने क्षेत्रीय हवाई कनेक्टिविटी योजना- उड़ान (उड़े देश का आम नागरिक) के अगले चरण को आज मंजूरी दे दी। इसके लिए 2026-27 से अगले 10 साल के दौरान कुल 28,840 करोड़ रुपये के परिव्यय को मंजूरी दी गई है।

उड़ान योजना के दूसरे चरण के लिए आवंटन पिछले दशक में हुए खर्च के मुकाबले काफी अधिक है। पहले संसद में दिए गए जवाब के अनुसार, पिछले 10 वर्षों के दौरान सरकार ने व्यवहार्यता अंतर निधि (वीजीएफ) पर करीब 4,593 करोड़ रुपये और हवाई अड्डों के विकास पर करीब 4,638 करोड़ रुपये खर्च किए हैं।

वीजीएफ उन हवाई मार्गों पर उड़ानों के संचालन के लिए विमानन कंपनियों को दी जाने वाली स​ब्सिडी है जो वाणिज्यिक तौर पर संचालन के लिए व्यवहार्य नहीं हैं। अगले 8 वर्षों में 12,159 करोड़ रुपये के खर्च के साथ बंद पड़ी हवाई पट्टियों से 100 हवाई अड्डों का विकास किया जाएगा। सरकार का कहना है कि इससे भारत को वै​श्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी विमानन परिवेश तैयार करने में मदद मिलेगी।

क्षेत्रीय हवाई अड्डों को सीमित आय के साथ उच्च संचालन एवं रखरखाव (ओऐंडएम) लागत से जूझना पड़ता है। इसे स्वीकार करते हुए संशो​धित योजना में अगले तीन साल तक ओऐंडएम सहायता प्रदान करने का प्रावधान है। यह सहायता प्रति हवाई अड्डा सालाना 3.06 करोड़ रुपये और हेलीपोर्ट तथा वाटर एरोड्रोम के लिए 90 लाख रुपये तक होगी। इसमें लगभग 441 एरोड्रोम को कवर करने के लिए 2,577 करोड़ रुपये का कुल आवंटन किया गया है।

दूरदराज और विशेष रूप से दुर्गम इलाकों तक कनेक्टिविटी को बेहतर करने के लिए सरकार अगले 8 वर्षों में 3,661 करोड़ रुपये की लागत से 200 आधुनिक हेलीपैड विकसित करेगी। उड़ान के तहत विमानन ऑपरेटरों को आवंटित मार्गों पर उड़ानों के संचालन के लिए वीजीएफ के तौर पर वित्तीय सहायता दी जाती है। सरकार ने कहा है कि विमानन ऑपरेटरों को 10 वर्षों में 10,043 करोड़ रुपये की वीजीएफ सहायता दिए जाने का प्रस्ताव है।

संशोधित योजना में पवन हंस के लिए दो ध्रुव हेलीकॉप्टर और अलायंस एयर के लिए दो डोर्नियर विमानों की खरीद भी शामिल है। इससे दूरदराज और दुर्गम इलाकों के लिए छोटे विमानों की कमी को पूरा किया जा सके। इससे आत्मनिर्भर भारत के दृष्टकोण को भी बढ़ावा मिलेगा। ध्रुव हेलीकॉप्टर और डोर्नियर विमान दोनों का उत्पादन सरकारी कंपनी हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स करती है। संशोधित योजना से छोटे एवं मझोले शहरों में आर्थिक वृद्धि, व्यापार और पर्यटन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। इससे आम नागरिकों के लिए सस्ती हवाई यात्रा को बल मिलेगा।

उड़ान योजना अक्टूबर 2016 में शुरू की गई थी। इसका उद्देश्य उपयोग न हो रहे हवाई अड्डों को चालू कर और विमानन कंपनियों को वीजीएफ सहायता देकर हवाई यात्रा को किफायत बनाना है। इस योजना के तहत हवाई मार्गों का आवंटन प्रतिस्पर्धी बोली के जरिये होता है। राज्य सरकारें विमान ईंधन (एटीएफ) पर मूल्यवर्धित कर में कमी करते हुए और हवाई अड्डों के निर्माण के लिए भूमि एवं सुरक्षा प्रदान करते हुए इस योजना का समर्थन करती हैं।

First Published : March 25, 2026 | 10:47 PM IST