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देश के शीर्ष यात्री वाहन विनिर्माता घरेलू मांग में लगातार बढ़ोतरी पर दांव लगा रहे हैं। इसके लिए वे वित्त वर्ष 27 के दौरान अपना निवेश बढ़ा रहे हैं, फैक्टरियों की क्षमता का विस्तार कर रहे हैं और प्रमुख मॉडल पेश करने की तैयारी में जुटे हुए हैं। भू-राजनीतिक तनाव, कमोडिटी की कीमतों में बढ़ोतरी, माल ढुलाई की कीमतों में उतार-चढ़ाव तथा आपूर्ति श्रृंखला में रुकावटों के संबंध में बढ़ती चिंताओं के बावजूद ऐसा किया जा रहा है।
उनका यह आत्मविश्वास आंकड़ों पर आधारित है। सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (सायम) के उद्योग के आंकड़ों से पता चला कि वित्त वर्ष 26 के दौरान डीलरों को भेजी गई यात्री वाहनों खेप बढ़कर 46.6 लाख के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई। उद्योग ने इस साल को ‘दो हिस्सों वाला साल’ बताया। पहली छमाही में मांग कम रही और इसके बाद दूसरी छमाही में जबरदस्त सुधार हुआ। खर्च करने की क्षमता में जीएसटी से मिले फायदे और नए मॉडलों से भी इसमें मदद मिली।
वित्त वर्ष 26 की दूसरी छमाही में यात्री वाहनों की घरेलू बिक्री 16.7 प्रतिशत बढ़ी। इससे पहली छमाही में हुई 1.4 प्रतिशत की गिरावट की भरपाई हो गई और उद्योग को साल का समापन 7.9 प्रतिशत की बढ़त के साथ करने में मदद मिली। मारुति सुजूकी ने बताया कि वित्त वर्ष 26 के आखिर में केवल उत्पादन में आई रुकावटों की वजह से ही लगभग 1,90,000 ग्राहकों के ऑर्डर पूरे नहीं हो पाए। यह बात इस सुधार की मजबूती को दर्शाती है।
उम्मीद है कि यह तेजी वित्त वर्ष 27 में भी जारी रहेगी। क्रिसिल रेटिंग्स का अनुमान है कि जीएसटी की अनुकूल स्थिति और यूटिलिटी वाहनों की लगातार मांग की वजह से उद्योग लगभग 59 लाख वाहनों की रिकॉर्ड बिक्री दर्ज करेगा और 5 से 7 प्रतिशत की वृद्धि होगी। क्रिसिल के वरिष्ठ निदेशक अनुज सेठी ने कहा, ‘जीएसटी की अनुकूल स्थिति वित्त वर्ष 27 में भी जारी रहेगी, अलबत्ता इसकी रफ्तार धीरे-धीरे कम होती जाएगी।’
इनपुट लागत के दबाव, ईंधन की कीमतों में उतार-चढ़ाव और आपूर्ति श्रृंखला से जुड़े भू-राजनीतिक जोखिमों के बावजूद कार विनिर्माता अपना खर्च बढ़ा रही हैं।
मारुति सुजूकी ने हरियाणा के खरखौदा में अपना दूसरा संयंत्र शुरू कर दिया है और वित्त वर्ष 27 के दौरान गुजरात में एक और प्रोडक्शन लाइन जोड़ रही है। इससे उसकी सालाना उत्पादन क्षमता मौजूदा 24 लाख से बढ़कर लगभग 29 लाख हो जाएगी।
ह्युंडै मोटर इंडिया ने वित्त वर्ष 27 के लिए लगभग 7,500 करोड़ रुपये के पूंजीगत खर्च की योजना बनाई है। इसमें दो नए स्पोर्ट्स यूटिलिटी व्हीकल (एसयूवी) पेश करने की योजना भी शामिल है। इनमें एक स्थानीय स्तर पर निर्मित इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) भी होगा।
महिंद्रा ऐंड महिंद्रा वित्त वर्ष 26 के आखिर तक अपनी मासिक वाहन उत्पादन क्षमता को लगभग 59,000 से बढ़ाकर करीब 64,500 वाहन प्रति माह कर चुकी है। कंपनी नागपुर में एक नया संयंत्र तैयार कर रही है, जो साल 2028 के मध्य तक चालू हो जाएगा। इसकी क्षमता को चरणबद्ध तरीके से बढ़ाकर सालाना 5,00,000 वाहन तक बढ़ाया जाएगा।
वित्त वर्ष 26 में उद्योग की वृद्धि दर से करीब दोगुनी दर के साथ 6,40,000 से ज्यादा वाहनों की अब तक की सबसे ज्यादा सालाना बिक्री दर्ज करने वाली टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स भी इतनी ही आशावादी है।