आज का अखबार

सरकार का संशोधन: बायबैक टैक्स दायरा सीमित, विदेशी संस्थाओं को मिली राहत

प्रमुख बदलाव बायबैक के कराधान से संबंधित है। विधेयक में मूल प्रस्ताव में ‘अतिरिक्त कर’ के माध्यम से प्रवर्तकों के हाथों में बायबैक पर उच्च दरों पर कर लगाने की मांग की गई थी।

Published by
मोनिका यादव   
Last Updated- March 26, 2026 | 9:23 AM IST

सरकार ने लोक सभा में वित्त विधेयक, 2026 में करदाताओं को महत्त्वपूर्ण राहत प्रदान करने वाले संशोधन पारित किए। इनमें कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 68 के तहत शेयर बायबैक पर नए बायबैक कराधान व्यवस्था की सीमा तय की गई है। इस क्रम में स्टार्टअप टैक्स हॉलिडे के लिए टर्नओवर की सीमा बढ़ाई गई है और गिरफ्तारी व हिरासत जैसे जबरन वसूली उपायों को समाप्त कर दिया गया है।

वित्त विधेयक, 2026 की आधिकारिक ‘संशोधन सूचना’ में सूचीबद्ध इन संशोधनों में पुनर्मूल्यांकन की कार्यवाही में प्रक्रियात्मक सुरक्षा उपाय भी पेश किए गए हैं और कुछ प्रशासनिक कार्यों को पूर्वव्यापी प्रभाव से मान्य किया गया है।

प्रमुख बदलाव बायबैक के कराधान से संबंधित है। विधेयक में मूल प्रस्ताव में ‘अतिरिक्त कर’ के माध्यम से प्रवर्तकों के हाथों में बायबैक पर उच्च दरों पर कर लगाने की मांग की गई थी। संशोधित संशोधन स्पष्ट करता है कि यह अतिरिक्त कर केवल कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 68 के अनुसार किए गए बायबैक पर लागू होगा।

ध्रुवा एडवाइजर्स के साझेादर संदीप भल्ला ने कहा, ‘वित्त विधेयक 2026 में यह करदाताओं के अनुकूल है। बायबैक पर अतिरिक्त कर को केवल उन बायबैक तक सीमित करके जो कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 68 के अनुसार किए गए हैं। सरकार ने प्रभावी रूप से विदेशी संस्थाओं द्वारा बायबैक और अधिमान्य शेयरों के पुनर्वितरण को उच्च कर के दायरे से बाहर रखा है। इससे क्रॉस-बॉर्डर व वैकल्पिक पूंजी वापसी संरचनाओं पर अनपेक्षित चिंताएं दूर हो गई हैं।’

First Published : March 26, 2026 | 9:23 AM IST