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बीमा शेयरों में भारी दबाव, LIC से लेकर HDFC Life तक 52 हफ्ते के निचले स्तर पर पहुंचे

पिछले एक महीने में इन शेयरों में 14 फीसदी से 24 फीसदी तक की गिरावट आई है। इसकी तुलना में बीएसई सेंसेक्स में 10.5 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई

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दीपक कोरगांवकर   
राम प्रसाद साहू   
Last Updated- April 03, 2026 | 10:45 PM IST

सूचीबद्ध बड़ी जीवन बीमा कंपनियों की अगुआई में बीमा कंपनियों के शेयर दबाव में रहे और गुरुवार को इंट्रा-डे कारोबार में बीएसई पर 4 फीसदी तक गिर गए। भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी), एचडीएफसी लाइफ इंश्योरेंस, बजाज फिनसर्व, आईसीआईसीआई प्रू लाइफ इंश्योरेंस और आईसीआईसीआई लोम्बार्ड जनरल इंश्योरेंस के शेयर अपने-अपने 52 हफ्ते के निचले स्तर पर पहुंच गए।

पिछले एक महीने में इन शेयरों में 14 फीसदी से 24 फीसदी तक की गिरावट आई है। इसकी तुलना में बीएसई सेंसेक्स में 10.5 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। शेयरों में यह गिरावट वित्त वर्ष 26 की चौथी तिमाही के लिए कमजोर उम्मीदों, ईरान युद्ध के कारण बनी अनिश्चितता और नियामकीय बदलावों की वजह से हुई। निकट भविष्य में, मार्च तिमाही का प्रदर्शन इस सेक्टर के लिए अहम संकेतकों में से एक होगा।

एंटिक स्टॉक ब्रोकिंग के कृपाल मनियार और कोमल शर्मा का मानना है कि मार्च 2026 (जो कि आम तौर पर एक मजबूत सीजनल महीना होता है) में पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्षों के कारण उपभोक्ता सेंटिमेंट कमजोर रहने की संभावना है। इसका असर वित्त वर्ष 26 की चौथी तिमाही की सालाना प्रीमियम इक्विवैलेंट (एपीई) वृद्धि और मुनाफे पर पड़ सकता है। चौथी तिमाही बहुत ही अहम समय होता है क्योंकि आम तौर पर इस तिमाही में कुल प्रीमियम का 45 फीसदी हिस्सा इसी से आता है।

ब्रोकरेज का कहना है कि जहां यील्ड कर्व में उतार-चढ़ाव और प्रोडक्ट मिक्स में बदलाव से नए बिजनेस यानी वीएनबी मार्जिन को फायदा होगा, वहीं कमज़ोर वृद्धि का परिचालन लिवरेज के कारण और जीएसटी इनपुट टैक्स क्रेडिट के अस्वीकृत होने की वजह से नकारात्मक असर पड़ सकता है।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के विश्लेषकों के अनुसार, ईरान से जुड़े भू-राजनीतिक तनावों के कारण एलआईसी के निवेश पोर्टफोलियो में काफी काल्पनिक नुकसान हुआ है, जिसका असर उसके शेयर की कीमत पर पड़ रहा है। उम्मीद है कि जैसे-जैसे स्थिति सामान्य होगी और पोर्टफोलियो का मूल्यांकन फिर से बढ़ेगा, इसमें सुधार आएगा। ब्रोकरेज फर्म का कहना है कि डिजिटल बदलाव और उत्पादों में नयापन एलआईसी को लंबे समय तक टिकने वाली वृद्धि के लिए तैयार करता है। ब्रोकरेज ने इस बीमा कंपनी को खरीद की रेटिंग दी है।

नियामकीय बदलावों का भी इस सेक्टर पर असर पड़ने की संभावना है, हालांकि अलग-अलग बीमा कंपनियों पर इसका असर अलग-अलग होगा। जहां कमीशन की सीमा लागू होने से बैंकएश्योरेंस के आर्थिक समीकरण बिगड़ सकते हैं, जिससे नए बिजनेस की वृद्धि और वितरण के विस्तार में अल्पावधि के जोखिम पैदा हो सकते हैं,

वहीं मोतीलाल ओसवाल फाइनैंशियल सर्विसेज का मानना है कि एसबीआई लाइफ पर इसका असर कम होगा। ऐसा इसलिए है क्योंकि इसका कमीशन अनुपात (वित्त वर्ष 26 के 9 महीने में 4.8 फीसदी) उद्योग के औसत से काफी बेहतर है। हालांकि, कमीशन में भारी कटौती होने पर बैंक के साथ दोबारा बातचीत करनी पड़ सकती है।

भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (आईआरडीएआई) कमीशन के ढांचे में बदलाव का प्रस्ताव लाने पर विचार कर रहा है। इन बदलावों में कमीशन को अलग-अलग चरणों में देना और कुछ खास चैनलों के लिए कमीशन की सीमा तय करना जैसे संशोधन शामिल हो सकते हैं। इससे कुछ समय के लिए थोड़ी रुकावट आ सकती है क्योंकि कमीशन पर फिर से बातचीत करनी पड़ सकती है और उत्पादों को फिर से तैयार करना पड़ सकता है।

हालांकि, लंबे समय में यह उद्योग फिर से पटरी पर आ सकता है। मोतीलाल ओसवाल रिसर्च का कहना है कि इसकी वजह है – बाजार में कम पैठ, कम जागरूकता और अलग-अलग सेगमेंट में उत्पादों की बढ़ती अफोर्डेबिलिटी। अपने हालिया परामर्श पत्र में आईआरडीआई ने 1 अप्रैल, 2026 से सभी बीमा कंपनियों के लिए इंडियन अकाउंटिंग स्टैंडर्ड्स (इंड एएस) लागू करने का प्रस्ताव दिया है। इसका मकसद बेहतर पारदर्शिता, तुलनात्मकता और विश्व स्तर पर स्वीकृत मानकों के साथ तालमेल बिठाना है।

First Published : April 3, 2026 | 10:42 PM IST