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भारतीय सेमीकंडक्टर मिशन (आईएसएम) के तहत प्रोत्साहन के लिए पात्र सेमीकंडक्टर कंपनियां वित्त वर्ष 27 तक इस योजना के तहत संयुक्त रूप से 31,299 करोड़ रुपये का निवेश करेंगी। यह 1,64,291 करोड़ रुपये के कुल प्रतिबद्ध निवेश का लगभग 20 प्रतिशत है। इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने यह अनुमान जताया है।
वित्त वर्ष 26 तक पांच सेमीकंडक्टर कंपनियों ने कुल 15,799 करोड़ रुपये का निवेश किया था। मंत्रालय का अनुमान है कि अगले 12 महीने में यानी 31 मार्च 2027 तक 15,500 करोड़ रुपये का और निवेश किया जाएगा। साल 2023 में शुरू की गई यह योजना असल में वित्त वर्ष 25 में तब आगे बढ़ी, जब माइक्रोन को मंजूरी मिली और उसने गुजरात के साणंद में अपने एटीएमपी संयंत्र में निवेश शुरू किया।
इस योजना के तहत जहां कंपनियों को परियोजना लागत का 50 प्रतिशत निवेश करना था, वहीं बाकी 50 प्रतिशत खर्च केंद्र सरकार ने उठाया। र राज्य सरकार ने भी कुल परियोजना लागत का 20 प्रतिशत हिस्सा दिया। योजना के पहले दो वर्षों – वित्त वर्ष 25 और वित्त वर्ष 26 में पांच कंपनियों ने अपनी परियोजनाओं में 5,692 करोड़ रुपये का निवेश किया, जबकि शेष राशि केंद्र और राज्य सरकारों की ओर से दी गई।
इन कंपनियों में माइक्रोन शामिल है जिसने वित्त वर्ष 25 और 26 में सबसे पहले निवेश किया था। कंपनी पहले ही वाणिज्यिक उत्पादन शुरू कर चुकी है। अन्य कंपनियों में सीजी पावर, काइन्स सेमीकॉन और टाटा की दो परियोजनाएं शामिल हैं। टाटा की परियोजनाओं में गुजरात के धोलेरा में फैब संयंत्र और असम में ओएसएटी परियोजना शामिल है। इन सभी में निवेश वित्त वर्ष 26 में शुरू हुआ। काइन्स पहले ही वाणिज्यिक उत्पादन शुरू कर चुकी है।
सीजी पावर के जुलाई में उत्पादन शुरू करने की उम्मीद है। टाटा के ओएसएटी संयंत्र से इस साल के अंत तक वाणिज्यिक परिचालन शुरू होना है।
सरकार को उम्मीद है कि वित्त वर्ष 27 में सेमीकंडक्टर कंपनियां सामूहिक रूप से 7,000 करोड़ रुपये का निवेश करेंगी। बाकी रकम सरकार उपलब्ध कराएगी। इसका एक बड़ा हिस्सा सेमीकंडक्टर संयंत्र के लिए आवश्यक उपकरणों की खरीद में जाएगा।
इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘किसी सेमीकंडक्टर संयंत्र की लागत में 65 प्रतिशत हिस्सा मशीनों का होता है। इसलिए हम परियोजना के तीसरे और चौथे वर्ष में उन्हें खरीदने और स्थापित करने के लिए बड़ा निवेश देखेंगे। हम इस साल नवंबर में भी निवेश की समीक्षा करेंगे और निवेश इससे भी अधिक हो सकता है।’ आईएसएम योजना के तहत ज्यादातर निवेश 91,000 करोड़ रुपये के साथ टाटा फैब संयंत्र में किया जा रहा है। यह इस योजना के तहत किए गए कुल निवेश का 55 प्रतिशत है। उम्मीद है कि यह संयंत्र साल 2028 में किसी समय बनकर तैयार हो जाएगा।
आईएसएम योजना के तहत 76,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का प्रोत्साहन दिया गया। इसमें से ज्यादातर रकम पहले ही लगभग 12 परियोजनाओं के लिए तय की जा चुकी है। इनमें देश भर में दो फैब परियोजनाएं और 10 ओएसएटी संयंत्र शामिल हैं। हाल में मंजूर दो नई परियोजनाओं में एक मिनी/माइक्रो एलईडी डिस्प्ले मॉड्यूल बनाने वाली परियोजना और सुची सेमीकॉन का एक ओएसएटी संयंत्र शामिल है।