भारत ने गुरुवार को जापान के घातक हथियारों के निर्यात पर लगे प्रतिबंध को समाप्त करने के फैसले का स्वागत किया है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि रक्षा और सुरक्षा सहयोग भारत-जापान विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी का एक महत्त्वपूर्ण आधार है। जापानी प्रधानमंत्री साने ताकाइची के नेतृत्व वाली जापानी कैबिनेट ने घातक हथियारों के निर्यात पर लगे प्रतिबंध को समाप्त करने का फैसला किया।
जापानी मीडिया ने कहा कि यह कदम जापान की युद्धोत्तर शांतिवादी नीति में बड़ा बदलाव है, क्योंकि वह चीन और उत्तर कोरिया की आक्रामकता को देखते हुए अपने हथियार उद्योग को मजबूत करना चाहता है। नई नीति से जापानी युद्धपोतों, कॉम्बैट ड्रोन और अन्य हथियारों की बिक्री का रास्ता खुल गया है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने गुरुवार को साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग में कहा, ‘भारत जापान के रक्षा उपकरण और तकनीक के हस्तांतरण पर तीन सिद्धांतों की समीक्षा का स्वागत करता है।’ उन्होंने कहा कि रक्षा और सुरक्षा सहयोग भारत-जापान विशेष रणनीतिक वैश्विक साझेदारी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
जायसवाल ने कहा, ‘भारत और जापान के बीच सुरक्षा सहयोग पर संयुक्त घोषणा के हिस्से के रूप में, दोनों पक्षों ने अपने राष्ट्रीय सुरक्षा और निरंतर आर्थिक गतिशीलता के हित में व्यावहारिक सहयोग बढ़ाने का संकल्प लिया है।’ इसमें सरकारी संस्थाओं और निजी क्षेत्र के बीच तकनीकी और औद्योगिक सहयोग को बढ़ावा देना और सुगम बनाना शामिल है।
भारत और जापान क्वाड समूह के तहत सहयोग करते हैं। दोनों देशों की रक्षा और सुरक्षा साझेदारी, द्विपक्षीय संबंधों का एक प्रमुख स्तंभ है, जो साझा रणनीतिक दृष्टिकोण और हिंद प्रशांत क्षेत्र में शांति और स्थिरता के प्रति प्रतिबद्धता से प्रेरित है।
भारत-जापान के प्रमुख समझौतों में 2008 का सुरक्षा सहयोग पर संयुक्त घोषणा, 2014 का रक्षा आदान-प्रदान समझौता और 2015 के रक्षा उपकरण हस्तांतरण तथा गोपनीय जानकारी की सुरक्षा पर समझौते शामिल हैं। 2018 की कार्यान्वयन व्यवस्था नौसैनिक सहयोग को गहरा करती है, और सितंबर 2020 में परस्पर आपूर्ति और सेवाओं का प्रावधान (आरपीएसएस) समझौता हुआ।