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इंडियन ओवरसीज बैंक का मुनाफा 43% उछला, 1505 करोड़ कमाए; जानिए कैसे MSME और रिटेल लोन ने बदली तस्वीर

इंडियन ओवरसीज बैंक का मुनाफा 43% बढ़कर 1505 करोड़ पहुंचा, मजबूत लोन ग्रोथ और ECL प्रावधान पर खास फोकस।

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मनोजित साहा   
अंजलि कुमारी   
Last Updated- May 02, 2026 | 9:11 AM IST

इंडियन ओवरसीज बैंक ने जनवरी-मार्च अवधि के लिए अपने शुद्ध लाभ में 43.2 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर्ज कर 1,505 करोड़ रुपये का लाभ कमाया। चेन्नई स्थित इस बैंक के प्रबंध निदेशक व सीईओ अजय कुमार श्रीवास्तव ने अंजलि कुमारी और मनोजित साहा को  टेलीफोन पर दिए साक्षात्कार में बताया कि संगठन में सभी कर्मचारियों को ऋण देने के निर्णय लेने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। लिहाजा इस सरकारी बैंक की वित्त वर्ष 2026 में ऋण वृद्धि 24 प्रतिशत रही। साक्षात्कार के मुख्य अंश:

आपकी ऋण वृद्धि 24 प्रतिशत रही जबकि सिस्टम की वृद्धि लगभग 16 प्रतिशत रही। यह ऋण वृद्धि महत्त्वपूर्ण है। इसके पीछे क्या कारण हैं? वित्त वर्ष 2026-27 के लिए क्या नजरिया है?

यह वृद्धि ‘ऑल-राउंड’ रही है। इसमें हमारी सभी 3,500 शाखाओं का योगदान रहा है। यदि आप ऋण पोर्टफोलियो को देखें तो लगभग 78 प्रतिशत खुदरा, कृषि व एमएसएमई है। यह खंड पूरे क्षेत्र में भागीदारी की अनुमति देता है। हमने मजबूत प्रणालियां बनाई हैं, प्रशिक्षण में निवेश किया है, अंडरराइटिंग कौशल को मजबूत किया है और प्रसंस्करण केंद्र स्थापित किए हैं। इन सभी पहलों के संयुक्त प्रभाव ने मदद की है। संगठन के सभी लोग, क्षेत्रीय प्रबंधक और शाखा प्रबंधक, ऋण निर्णय लेने के लिए प्रोत्साहित किए जाते हैं। पूरा वातावरण ऐसा है कि हर कोई योगदान देना चाहता है। प्रयासों के बारे में कुल मिलाकर कहा जाए तो विशेष रूप से खुदरा, कृषि व एमएसएमई की ऋण वृद्धि को प्रेरित किया है। हम वित्त वर्ष 2026-27 के लिए लगभग 12 -13 प्रतिशत ऋण वृद्धि और 13 -14 प्रतिशत जमा वृद्धि का लक्ष्य बना रहे हैं।

इस वर्ष मार्जिन में थोड़ी गिरावट आई है। क्या वे निचले स्तर पर पहुंच गए हैं और आगे का दृष्टिकोण क्या है?

मार्जिन में केवल लगभग 4 आधार अंकों की गिरावट आई है जो मार्च 2025 में 3.25 प्रतिशत से इस वर्ष 3.21 प्रतिशत हो गया है। यदि आप पिछले वर्ष रीपो दर में 125 आधार अंकों की संचयी कमी को ध्यान में रखते हैं तो हमने बड़े पैमाने पर मार्जिन को संकीर्ण दायरे में बनाए रखा है।

हम मार्जिन को काफी अच्छी तरह से पकड़ने में सक्षम रहे हैं। हम भविष्य में एनआईएम को वर्तमान स्तरों के आसपास बनाए रखने की उम्मीद करते हैं, मोटे तौर पर 3.20 प्रतिशत – 3.25 प्रतिशत की सीमा में। हमारे ऋण बही-खाते का लगभग 39 प्रतिशत ईबीएलआर से जुड़ा हुआ है और कृषि ऋण ईबीएलआर से जुड़े नहीं हैं।

ईसीएल ढांचे का प्रावधानों पर क्या प्रभाव संभावित है?

अभी संशोधित दिशानिर्देशों के साथ सटीक प्रभाव पर काम किया जा रहा है। हालांकि, हमने पहले ही सक्रिय नजरिया अपनाया है। हमने दिसंबर तिमाही में कहा था कि हमने विशेष रूप से ईसीएल के लिए 1,500 करोड़ रुपये का अग्रिम प्रावधान बनाया है। हमने मार्च तिमाही में 250 करोड़ रुपये और जोड़े। लिहाजा अब तक कुल अतिरिक्त प्रावधान 1,750 करोड़ रुपये हो गया है। इस बदलाव को चार वर्षों में किया जा सकता है। हमारी आंतरिक योजना प्रावधानों के लिए शुरुआती दौर में ही विशेष प्राथमिकता देना है।

इस क्रम में पांच वर्ष की बजाए पहले पूरा करना है। हमारा इरादा हर तिमाही में प्रावधान जोड़ते रहने का है ताकि जब ढांचा पूरी तरह से लागू हो जाए तो हमारे पास पहले से ही बैलेंस शीट में पर्याप्त इंतजाम हो। यह 1,750 करोड़ रुपये हमारे नियमित प्रावधानों के अतिरिक्त है।

First Published : May 2, 2026 | 9:11 AM IST