भारत ने अपने परमाणु हथियारों के जखीरे का आकार बढ़ा लिया है। मगर इससे भी अहम बात यह सामने आई है कि भारत अपने परमाणु कार्यक्रम का तेजी से आधुनिकीकरण कर रहा है। स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (सिपरी) ने अपनी रिपोर्ट में इसका जिक्र किया है। इस रिपोर्ट के मुताबिक भारत ने पहली बार अपने 190 परमाणु हथियारों के जखीरे में 12 परमाणु हथियार तैनात कर दिए हैं।
भारत की परमाणु नीति दो मुख्य दृष्टिकोणों पर आधारित है। इनमें पहला है ‘पहले इस्तेमाल न करने’ (नो-फर्स्ट-यूज) की नीति और दूसरा है ‘न्यूनतम विश्वसनीय प्रतिरोध’ (मिनिमम क्रेडिबल डेटरेंस)। 8 जून को प्रकाशित वैश्विक परमाणु ताकतों पर सिपरी की 2026 की रिपोर्ट में कहा गया है कि ऐसा समझा जा रहा है कि भारत ने वर्ष 2025 में एक बार फिर अपने परमाणु हथियारों के जखीरे का थोड़ा विस्तार किया है और नए प्रकार की परमाणु हथियार आपूर्ति प्रणाली का विकास कर रहा है। सिपरी के विशेषज्ञों हंस एम क्रिस्टेंसन और मैट कोर्डा के एक पुराने (2020) लेख के मुताबिक,‘ऐसा लगता है कि भारत अपनी कुछ बैलिस्टिक मिसाइलों को कैनिस्टराइज्ड (किसी बंद एवं सुरक्षित कंटेनर या ट्यूब में डालकर ) कर अपने परमाणु हथियारों की प्रतिक्रिया क्षमता बढ़ाने के लिए कदम उठा रहा है।’
सिपरी की रिपोर्ट से पता चला कि पाकिस्तान के पास 170 हथियारों का भंडार होने के बावजूद कोई परमाणु हथियार तैनात नहीं है जबकि चीन ने 34 परमाणु हथियार तैनात कर रखे थे।
रिपोर्ट में अनुमान जताया गया है कि चीन के पास लगभग 620 परमाणु हथियार हैं। भले ही वर्ष 2030 तक चीन के पास 1,000 से ज्यादा हथियार हों मगर यह रूस और अमेरिका के मौजूदा परमाणु जखीरे का केवल एक-चौथाई हिस्सा ही होगा।