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कोटक बैंक ने सावधि जमा धोखाधड़ी मामले में दर्ज की शिकायत

बैंक के प्रवक्ता ने कहा,‘पंचकुला नगर निगम के निर्देशों के बाद कोटक महिंद्रा बैंक ने नगर निगम द्वारा संचालित सावधि जमा और संबंधित बैंक खातों का विस्तृत मिलान शुरू किया है।’

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बीएस संवाददाता   
Last Updated- March 26, 2026 | 9:29 AM IST

निजी क्षेत्र के कोटक महिंद्रा बैंक ने बुधवार को कहा कि पंचकुला नगर निगम से जुड़े सावधि जमा (फिक्स्ड डिपॉजिट) में कथित धोखाधड़ी का मामला सामने आने के बाद उसने हरियाणा की पंचकूला पुलिस में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है। बैंक ने बताया कि वह जमा और संबंधित खातों का मिलान कर रहा है। हालांकि, बैंक ने अभी तक धोखाधड़ी की राशि का खुलासा नहीं किया है।

बैंक के प्रवक्ता ने एक बयान में कहा,‘पंचकुला नगर निगम के निर्देशों के बाद कोटक महिंद्रा बैंक ने नगर निगम द्वारा संचालित सावधि जमा और संबंधित बैंक खातों का विस्तृत मिलान शुरू किया है।’

बैंक ने कहा कि इस प्रक्रिया के अंतर्गत अब तक खंगाले गए तथ्यों एवं आंकड़ों के आधार पर पुष्टि हो पाई है कि सभी खाता खोलने की प्रक्रिया, केवाईसी दस्तावेजीकरण, अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता और नगर निगम से प्राप्त निर्देश सही थे। बैंक ने यह भी कहा कि खातों और लेन-देन का उचित प्रक्रिया और लागू बैंकिंग मानदंडों का कड़ाई से पालन करते हुए प्रबंधन किया गया था। बैंक ने यह भी कहा कि समीक्षाधीन राशि का एक महत्त्वपूर्ण हिस्से का नगर निगम के साथ पहले ही मिलान किया जा चुका है और मिलान प्रक्रिया सुचारु रूप से जारी है।

बैंक ने कहा, ‘बैंक इस प्रक्रिया में नगर निगम, सरकारी अधिकारियों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ पूर्ण सहयोग कर रहा है।’ यह घटनाक्रम हरियाणा सरकार की जमा राशि से संबंधित एक अलग धोखाधड़ी की घटना के बीच सामने आया है। हाल ही में आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक में अनियमितताओं की जानकारी मिली जहां कुछ जमा खातों में विसंगतियों के कारण आंतरिक समीक्षा शुरू हुई।

आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ने पिछले महीने अपनी चंडीगढ़ शाखा में धोखाधड़ी का पता चलने के बाद हरियाणा राज्य सरकार के साथ 645 करोड़ रुपये का मिलान किया। यह मामला तब सामने आया जब एक सरकारी विभाग ने बैंक में अपना खाता बंद करने और धन राशि किसी अन्य ऋणदाता में स्थानांतरित करने का अनुरोध किया मगर विभाग द्वारा बताई गई राशि खाते में मौजूद शेष राशि से मेल नहीं खाती थी।

आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के अनुसार शुरुआती जांच से पता चला है कि शाखा के कुछ कर्मचारियों ने जाली दस्तावेजों और भुगतान निर्देशों को मंजूरी देने में धोखाधड़ी की थी और शायद बाहरी पक्षों के साथ मिलीभगत के साथ इसे अंजाम दिया गया था। इसमें शामिल कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया है और बैंक ने फोरेंसिक ऑडिट करने के लिए केपीएमजी को नियुक्त किया है।

यह खुलासा हरियाणा सरकार द्वारा 18 फरवरी को जारी एक निर्देश के बाद हुआ जिसमें विभागों को निजी क्षेत्र के बैंकों में रखे खातों को बंद करने का निर्देश दिया गया था। इसके बाद प्रभावी रूप से खाता बंद करने के कई अनुरोध आने लगे जिससे विसंगतियां सामने आईं।

 

(डिस्क्लेमर: कोटक परिवार के नियंत्रण वाली इकाइयों की बिज़नेस स्टैंडर्ड प्राइवेट लिमिटेड में महत्त्वपूर्ण हिस्सेदारी है।)

First Published : March 26, 2026 | 9:29 AM IST