पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने के तुरंत बाद भारत में तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) सिलिंडर की बुकिंग के लिए मारामारी अब काफी हद तक कम हो गई है। बिज़नेस स्टैंडर्ड को आधिकारिक आंकड़ों से पता चला है कि एक महीने पहले करीब 90 लाख बुकिंग हो रही थीं, लेकिन अब 14 अप्रैल को यह घटकर 43 लाख रह गई है।
आंकड़ों के अनुसार, सरकारी तेल विपणन कंपनियों ने 14 अप्रैल को घरेलू उपभोक्ताओं को 43.1 लाख सिलिंडरों की बुकिंग के मुकाबले 47.6 लाख एलपीजी सिलिंडर वितरित किए हैं। यह पिछले एक महीने से चली आ रही अफरा-तफरी के माहौल में कमी का संकेत है।
सरकारी तेल विपणन कंपनियों द्वारा डिलिवरी व्यवस्था दुरुस्त करने में रिफाइनरियों में एलपीजी उत्पादन में वृद्धि, सिलिंडर बुकिंग के बीच लंबे अंतराल, विभिन्न क्षेत्रों में आपूर्ति को प्राथमिकता देने और वैकल्पिक ईंधन को बढ़ावा देने जैसे कदमों से खासी मदद मिली है। पश्चिम एशिया संकट शुरू होने से पहले घरेलू एलपीजी सिलिंडरों की औसत दैनिक मांग लगभग 55 लाख थी। अब आपूर्ति और मांग के अंतर को काफी हद तक पाट लिया गया है।
अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध शुरू होने के बाद से भारत एलपीजी अथवा खाना पकाने की गैस की गंभीर कमी से जूझ रहा है। ऐसा इसलिए, क्योंकि कुल आयात का लगभग 90 प्रतिशत एलपीजी पश्चिम एशिया से आता है। युद्ध छिड़ने के बाद वहां से आपूर्ति बाधित हो गई है। भारत ने घरेलू स्तर पर उपजे ईंधन संकट से निपटने के लिए अमेरिका से एलपीजी की खरीद बढ़ाई है। साथ ही अंगोला और ईरान सहित अन्य देशों से भी वह गैस खरीद रहा है।
केंद्र सरकार ने कहा है कि इस समय किसी भी वितरक कंपनी के पास ड्राई-आउट जैसी स्थिति नहीं है। अब ऑनलाइन बुकिंग 84 प्रतिशत से बढ़कर 98 प्रतिशत हो गई है। एक अंतर-मंत्रालयी संवाददाता सम्मेलन में सरकार ने बुधवार को कहा कि अप्रैल में अब तक ऑटो एलपीजी की औसत बिक्री फरवरी के दौरान 177 टन प्रतिदिन के औसत की तुलना में लगभग 282 टन प्रतिदिन बढ़ गई है।
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने कहा कि सरकार ने फार्मास्यूटिकल्स, रसायन और पेट्रोकेमिकल्स एवं खाद्य तथा सार्वजनिक वितरण सहित अहम क्षेत्रों के लिए सी3 और सी4 गैसों की मात्रा को पहले के 800 टन/दिन से बढ़ाकर 1,000 टन प्रतिदिन कर दिया है। प्रोपेन, ब्यूटेन, प्रोपलीन और ब्यूटिलीन आदि सी3 और सी4 गैसें हाइड्रोकार्बन हैं, जिनका उपयोग मुख्य रूप से एलपीजी और पेट्रोकेमिकल्स के उत्पादन के लिए किया जाता है।
सरकार ने बीते 9 मार्च को देश भर में संचालित सभी रिफाइनरियों को निर्देश दिया था कि वे सी3 और सी4 गैसों का पूरा उपयोग एलपीजी उत्पादन के लिए करें। बाद में इस आदेश को संशोधित किया गया ताकि इन अणुओं की न्यूनतम मात्रा कुछ जरूरी क्षेत्रों के लिए की जा सके।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट बंद होने के कारण भारत की ऊर्जा आपूर्ति में आई बाधा के मद्देनजर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के साथ समुद्री नाकाबंदी को खुला और सुरक्षित रखने के महत्त्व पर चर्चा की। उन्होंने यह भी कहा कि दोनों नेताओं ने भारत और अमेरिका के बीच विभिन्न क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग की प्रगति की समीक्षा की।