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तेल कीमतों के बड़े झटके को कम आंक रहा बाजार, $150 तक पहुंचने का खतरा

सोमवार को कच्चे तेल की कीमतें 3 प्रतिशत से ज्यादा बढ़कर 116 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गईं। पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने के बाद से इनमें लगभग 53 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है

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पुनीत वाधवा   
Last Updated- March 30, 2026 | 10:27 PM IST

विश्लेषकों का मानना ​​है कि बाजार तेल की कीमतों में अचानक उछाल के जोखिम को कम आंक रहे हैं। उनका अनुमान है कि अगर पश्चिम एशिया में चल रहा युद्ध कुछ और महीनों तक खिंचा और इससे खाड़ी क्षेत्र में तेल एवं गैस के प्रमुख बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा तो कच्चे तेल की कीमतें 150 डॉलर के स्तर तक पहुंच सकती हैं।

डीवेरे ग्रुप के मुख्य कार्या​धिकारी नाइजल ग्रीन ने कहा, ‘ऑप्शन बाजारों में 150 डॉलर प्रति बैरल तक के हालात का अनुमान जताया जा रहा है और विश्व की 20 प्रतिशत तक आपूर्ति होर्मुज स्ट्रेट में अटकी हुई है। अगर यह बाधा जारी रही, तो हम 1 से 1.4 करोड़ बैरल प्रति दिन का अनुमानित नुकसान दर्ज करेंगे। बाजार में वैश्विक मांग 10 करोड़ बैरल से थोड़ी ही अधिक है। यह अंतर आसानी से पाटा नहीं जा सकता।’ डीवेरे ग्रुप एक वैश्विक सलाहकार फर्म है जिसके प्रबंधन में 14 अरब डॉलर की संपत्ति है।

सोमवार को कच्चे तेल की कीमतें 3 प्रतिशत से ज्यादा बढ़कर 116 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गईं। पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने के बाद से इनमें लगभग 53 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। जानकारों का कहना है कि कीमतों में हालिया तेजी पिछली बड़े भू-राजनीतिक संकटों यानी इराक युद्ध और यूक्रेन संघर्ष के दौरान दर्ज बढ़ोतरी से कहीं ज्यादा रही है। उन्होंने कहा कि साथ ही साथ राजनीतिक संकेत भी अनिश्चितता को बढ़ावा दे रहे हैं।

भारत पर असर

इलारा कैपिटल के विश्लेषकों का कहना है कि जब कच्चे तेल की कीमतें 110 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर होती हैं तो रिटेल फ्यूल की कीमतों में बढ़ोतरी को टाला नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि एक्साइज ड्यूटी में कटौती के बाद भी अगर कच्चे तेल की कीमतें 125 डॉलर हुईं तो रिटेल कीमत में लगभग 8 से 14 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी करनी होगी।

इलारा कैपिटल के गगन दीक्षित, अमोघ देशपांडे और कार्तिक भंडारी ने हाल में एक नोट में लिखा, ‘कीमत 150 डॉलर होने पर बढ़ोतरी 26-30 रुपये प्रति लीटर करनी पड़ सकती है। उस समय महंगाई का झटका साफ दिखाई देगा और यह राजनीतिक रूप से भी यह संवेदनशील मुद्दा बन जाएगा, जैसा कि कैलेंडर वर्ष 2011-13 में देखा गया था।’

उन्होंने कहा कि तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) से जुड़ी वित्तीय परेशानी ज्यादा बड़ी है। कच्चे तेल की कीमतों में 1 डॉलर प्रति बैरल की बढ़ोतरी से एलपीजी पर होने वाला नुकसान करीब 1 रुपये प्रति किलोग्राम बढ़ जाता है, जिससे सब्सिडी बिल में करीब 33 अरब रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ता है। इलारा की रिपोर्ट में कहा गया है, ‘अगर कच्चे तेल की कीमत 100, 125 या 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच जाती है, तो एलपीजी पर होने वाला नुकसान (अंडर-रिकवरी) बढ़कर करीब 1.4, 2.2 या 3 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है।’

वेलेंटिस एडवायजर्स के संस्थापक और प्रबंध निदेशक ज्योतिवर्धन जयपुरिया का मानना ​​है कि बाजार अभी तक इस बात का पूरी तरह से अंदाजा नहीं लगा पा रहे हैं कि पश्चिम एशिया के युद्ध का कच्चे तेल की कीमतों पर क्या असर पड़ेगा।

First Published : March 30, 2026 | 10:16 PM IST