Representative image
मध्यप्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक शिल्पकला को राष्ट्रीय पहचान दिलाने के क्रम में नाबार्ड (राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक) के सहयोग से राज्य के चार विशिष्ट उत्पादों को हाल ही में भौगोलिक संकेतक (जियोग्राफिकल इंडिकेशन या जीआई) हासिल हुआ है।
जिन उत्पादों को जीआई टैग प्राप्त हुआ है, उनमें खजुराहो मेटल क्राफ्ट (छतरपुर), मालवा पेंटिंग (धार), सारंगपुर हैंडलूम साड़ी एवं फैब्रिक्स (राजगढ़) तथा भोपाली बटुआ एवं जरी क्राफ्ट (भोपाल) शामिल हैं। इन उत्पादों को उनके विशिष्ट पारंपरिक कौशल, स्थानीय पहचान और सांस्कृतिक महत्व के आधार पर यह मान्यता प्राप्त हुई है।
नाबार्ड ने जीआई पंजीकरण की प्रक्रिया में वित्तीय सहायता, तकनीकी मार्गदर्शन तथा शिल्पकार समूहों एवं संबंधित संस्थाओं के बीच समन्वय स्थापित करते हुए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि इस पहल का उद्देश्य पारंपरिक उत्पादों की विशिष्ट पहचान को संरक्षित करना तथा उनके लिए राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बेहतर अवसर सुनिश्चित करना है।
ये चारों उत्पाद राज्य की सांस्कृतिक और कलात्मक परंपराओं का प्रतिनिधित्व करते हैं। खजुराहो का बारीक धातु शिल्प, मालवा की विशिष्ट चित्रकला शैली, सारंगपुर की पारंपरिक हैंडलूम साड़ियां तथा जरी कार्य से सुसज्जित भोपाली बटुआ अपनी अनूठी भौगोलिक पहचान और उत्कृष्ट शिल्पकला के लिए लंबे समय से प्रसिद्ध रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि जीआई टैग मिलने से इन उत्पादों की ब्रांड पहचान और मजबूत होगी, नकली उत्पादों पर अंकुश लगेगा तथा बाजार में इनके मूल्य में वृद्धि होगी। इससे स्थानीय शिल्पकारों, विशेषकर महिला कारीगरों के लिए रोजगार और आय के नए अवसर सृजित होंगे।
नाबार्ड मध्य प्रदेश की मुख्य महाप्रबंधक सी. सरस्वती ने बिज़नेस स्टैंडर्ड से कहा, ‘इन चार असाधारण शिल्पों के लिए जीआई टैग प्राप्त करना केवल एक कानूनी संरक्षण नहीं बल्कि मध्यप्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों की रचनात्मक ऊर्जा और पारंपरिक कौशल का सम्मान है। नाबार्ड इन शिल्पकार समूहों को विस्तार देने तथा उनके लिए विपणन के नए अवसर विकसित करने हेतु निरंतर सहयोग देने के लिए प्रतिबद्ध है।’
जीआई टैग ऐसे उत्पादों को दिया जाता है जिनकी विशेष पहचान किसी खास क्षेत्र से जुड़ी हो। इससे उस क्षेत्र की पारंपरिक कला और कौशल सुरक्षित रहते हैं, कारीगरों के अधिकारों की रक्षा होती है, उत्पाद की पहचान और बाजार मूल्य बढ़ता है, स्थानीय रोजगार और उद्यमिता को बढ़ावा मिलता है।