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आरबीआई के नए नियम लागू, शहरी सहकारी बैंकों के लिए असुरक्षित ऋण सीमा और कर्ज मानदंड सख्त

टियर-1 यूसीबी के लिए 5 लाख रुपये, टियर-2 के लिए 7.5 लाख रुपये और टियर-3 और टियर-4 यूसीबी के लिए 10 लाख रुपये की व्यक्तिगत असुरक्षित ऋण सीमा निर्धारित की है

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आतिरा वारियर   
Last Updated- May 03, 2026 | 8:22 PM IST

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बुधवार को शहरी सहकारी बैंकों (यूसीबी) के लिए संशोधित ऋण मानदंडों पर अंतिम दिशानिर्देश जारी किए हैं। इसमें ऋण नियमों को सुव्यवस्थित करने के साथ इस क्षेत्र में जोखिम प्रबंधन प्रथाओं को मजबूत करने की कवायद की गई है।

अंतिम मानदंडों में रिजर्व बैंक ने असुरक्षित ऋणों को कुल ऋण के 20 प्रतिशत तक सीमित कर दिया है। साथ ही टियर-1 यूसीबी के लिए 5 लाख रुपये, टियर-2 के लिए 7.5 लाख रुपये और टियर-3 और टियर-4 यूसीबी के लिए 10 लाख रुपये की व्यक्तिगत असुरक्षित ऋण सीमा निर्धारित की है।

इसके अलावा प्राथमिकता क्षेत्र वाले ऋण के रूप में वर्गीकृत किए जाने योग्य 50,000 करोड़ तक के असुरक्षित ऋण को 20 प्रतिशत असुरक्षित ऋण की सीमा में शामिल नहीं किया जाएगा, जो रिजर्व बैंक के व्यावसायिक प्राधिकरण पात्रता मानदंड (ईसीबीए) का अनुपालन करने वाले यूसीबी देते हैं।

रिजर्व बैंक ने यूसीबी द्वारा दिए जाने वाले आवास ऋण के नियम भी सख्त किए हैं। टियर-1 और टियर-2 यूसीबी के लिए आवास ऋण की अवधि 20 वर्ष तक सीमित कर दी गई है, जिसमें मोरेटोरियम की अवधि भी शामिल है। वहीं मोरेटोरियम अब केवल निर्माणाधीन संपत्तियों के लिए ही मिल सकेगा और यह अधिकतम 24 महीने के लिए होगा। रेडी टु मूव मकानों पर मोरेटोरियम नहीं मिलेगा। वहीं बड़े यूसीबी (टियर-3 और टियर-4) को बोर्ड द्वारा अनुमोदित नीतियों के तहत ऋण की अवधि तय करने की छूट दी गई है।

रिजर्व बैंक ने यूसीबी द्वारा अन्य बैंकों द्वारा जारी की गई सावधि जमाओं के आधार पर ऋण दिए जाने पर भी रोक लगा दी है। यह कदम बैंकिंग व्यवस्था के भीतर परस्पर जुड़े जोखिमों को कम करने के उद्देश्य से उठाया गया है। यूसीबी को अब जमाओं के विरुद्ध ऋण देने, जिसमें मार्जिन की आवश्यकताएं शामिल हैं, को नियंत्रित करने वाली बोर्ड-अनुमोदित नीतियों को लागू करने की आवश्यकता होगी।

कुछ श्रेणियां जैसे कि क्लीन ओवरड्राफ्ट और केवल व्यक्तिगत गारंटी द्वारा समर्थित ऋणों को असुरक्षित माना जाएगा, जबकि वेतन से जुड़े ऋणों को सुरक्षित एक्सपोजर के रूप में योग्य माना जा सकता है, यदि वे नियोक्ता की व्यवस्थाओं द्वारा समर्थित हों। ये दिशानिर्देश 1 अक्टूबर 2026 से प्रभावी होंगे, हालांकि यूसीबी इस तारीख से पहले भी इनका पालन कर सकते हैं।

First Published : April 30, 2026 | 9:26 AM IST