पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण भारत में रसोई गैस (LPG) की आपूर्ति को लेकर चिंता बनी हुई है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने मंगलवार को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सरकार के निर्देश के बाद तेल कंपनियों ने रसोई गैस उत्पादन बढ़ा दिया है, जिसके चलते रिफाइनरियों से घरेलू एलपीजी उत्पादन में करीब 38 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
हालांकि, पश्चिम एशिया में तनाव जारी रहने से भारत के लिए एलपीजी की आपूर्ति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है क्योंकि देश के लगभग 90 प्रतिशत एलपीजी आयात इसी क्षेत्र से होते हैं। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच संघर्ष के चलते ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को बंद कर दिया है जो बड़ी तादाद में ऊर्जा आपूर्ति के लिए एक अहम समुद्री मार्ग है। भारत अपनी कुल जरूरत का लगभग 60 प्रतिशत एलपीजी आयात के जरिये पूरा करता है। तेल मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि देश की सभी रिफाइनरियां पूरी क्षमता पर काम कर रही हैं और कच्चे तेल का पर्याप्त भंडार मौजूद है। पेट्रोल और डीजल उत्पादन के मामले में भारत
आत्मनिर्भर है और घरेलू मांग पूरी करने के लिए आयात की जरूरत नहीं है। तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) ने बताया है कि पेट्रोल पंपों और एलपीजी वितरकों के पास मात्रा कम होने की कोई खबर नहीं है। इसके अलावा, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को 48,000 किलोलीटर अतिरिक्त केरोसिन भी आवंटित किया गया है।
मंत्रालय ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे पश्चिम एशिया से एलपीजी की आपूर्ति में संभावित बाधा को देखते हुए प्राकृतिक गैस का उपयोग बढ़ाएं। साथ ही इसने कहा कि घरेलू एलपीजी सिलिंडर की डिलीवरी सामान्य रूप से जारी है और ऑनलाइन बुकिंग बढ़कर करीब 94 प्रतिशत तक पहुंच गई है।
मंत्रालय ने कहा, ‘सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता घरों, अस्पतालों और शैक्षणिक संस्थानों जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में एलपीजी की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना है।’ इसी बीच, नंदा देवी नाम का एक एलपीजी जहाज मंगलवार सुबह कांडला बंदरगाह पर सुरक्षित पहुंच गया, जिसने होर्मुज स्ट्रेट को पार किया। इससे एक दिन पहले शिवालिक नाम का जहाज मुंद्रा बंदरगाह पहुंचा था। इन दोनों जहाजों में कुल लगभग 92,712 टन एलपीजी लदी हुई थी।
पश्चिम एशिया में युद्ध के कारण आपूर्ति बाधित होने से देश में रसोई गैस (LPG) की खपत मार्च के पहले पखवाड़े में 17.7 फीसदी घट गई। आंकड़ों के अनुसार, मार्च के पहले पंद्रह दिन में एलपीजी खपत घटकर 11.47 लाख टन रह गई, जो पिछले वर्ष की समान अवधि के 13.87 लाख टन के मुकाबले 17.3 फीसदी कम है। यह फरवरी के पहले पखवाड़े की 15.57 लाख टन मांग से 26.3 फीसदी कम है। भारत अपनी एलपीजी आवश्यकता का लगभग 60 फीसदी आयात करता है जिसमें से अधिकतर होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते आता है।
अमेरिका तथा इजरायल द्वारा ईरान पर हमले और तेहरान की जवाबी कार्रवाई के बाद यह मार्ग बाधित हो गया है। सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) से आपूर्ति प्रभावित होने के कारण सरकार ने घरेलू रसोई गैस की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए होटल जैसे वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों और उद्योगों को एलपीजी आपूर्ति में कटौती की है। सार्वजनिक क्षेत्र की तीन तेल विपणन कंपनियों के प्रारंभिक बिक्री आंकड़ों के अनुसार एक से 15 मार्च के दौरान एलपीजी खपत 2024 की समान अवधि की तुलना में 16 फीसदी और 2023 की समान अवधि की तुलना में 10.6 फीसदी कम रही। इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड, हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड और भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड की बाजार में करीब 90 फीसदी हिस्सेदारी है।
एलपीजी खपत में पिछले कुछ वर्ष में सालाना आधार पर तीन से चार फीसदी की स्थिर वृद्धि देखी गई थी, जिसका कारण सरकार द्वारा लकड़ी एवं अन्य प्रदूषणकारी ईंधनों के स्थान पर स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा देना है। युद्ध के कारण खाड़ी देशों में हवाई क्षेत्र बंद होने और उड़ानों के निलंबन से विमान ईंधन (एटीएफ) की खपत भी प्रभावित हुई है। मार्च के पहले पखवाड़े में यह चार फीसदी घटकर 3,27,900 टन रह गई जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में कम है।