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नीति आयोग की संचालन परिषद की 11वीं बैठक में आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने देश भर में आबादी की स्थिरता पर ज्यादा ध्यान दिए जाने की जरूरत बताई। गुरुवार को आयोजित इस बैठक में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के कई मुख्यमंत्रियों समेत अन्य राज्यों के उनके समकक्षों ने योजनाओं एवं परियोजनाओं के लिए केंद्र से रकम की मांग रखी।
इस बैठक में 28 राज्यों और पांच केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों, उप-राज्यपालों तथा प्रशासकों ने हिस्सा लिया। सरकार ने बताया कि यह पहला मौका था जब सभी 28 राज्यों के मुख्यमंत्री बैठक में शामिल हुए। इस बैठक का विषय ‘समावेशी मानव विकास’ था। नीति आयोग की संचालन परिषद की इसस पहले आयोजित बैठकों का गैर राजग सरकारों वाले पश्चिम बंगाल की तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और तमिलनाडु के तत्कालीन मुख्यमंत्री एम के स्टालिन ने बहिष्कार किया था। कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी के शिवकुमार गुरुवार की बैठक में शामिल हुए। उनसे पहले राज्य के मुख्यमंत्री रहे सिद्धरमैया ने 2024 में बैठक का बहिष्कार किया था और 2025 में संचालन परिषद की बैठक में उनका भाषण पढ़कर सुनाया गया था।
बैठक के दौरान आंध्र के नायडू ने भविष्य में कार्य बल की कमी, बढ़ती उम्र से जुड़ी चुनौतियों और लंबे समय तक आर्थिक स्थिरता बनाए रखने के लिए अपने राज्य की जनसंख्या प्रबंधन नीति का जिक्र किया। नायडू पिछले कुछ सालों से अपने राज्य और पूरे दक्षिण भारत में घटती प्रजनन दर पर चिंता जताते रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने कारोबार के लिए अनुकूल माहौल बनाया है, जिससे राज्य 23 लाख करोड़ रुपये से अधिक निवेश जुटाने में सफल रहा है। उन्होंने राज्यों से अपील की कि वे ‘निवेश आकर्षित करने के लिए प्रोत्साहन देने वाली होड़ में न पड़ें, जो लंबे समय तक चल नहीं सकती है’। उसके बजाय वे बुनियादी ढांचा मजबूत करने, नीति में स्थिरता सुनिश्चित करने और मंजूरी एवं निपटान आदि की प्रक्रिया तेज करने पर ध्यान दें।
कांग्रेस ने केंद्र की राजग सरकार की आलोचना की और प्रमुख परीक्षाओं के पर्चे लीक होने से रोकने में मिली नाकामी का मुद्दा उठाया। तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए रेवंत रेड्डी ने कहा कि शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं राष्ट्रीय विकास की मजबूत नींव हैं। उन्होंने शिक्षा, कौशल विकास और बुनियादी ढांचे पर खास जोर दिया और राज्य के विकास खाके की जानकारी दी। रेड्डी ने कहा कि वर्ष 2024 में किए गए राज्य के सामाजिक, आर्थिक, शैक्षिक, रोजगार, राजनीति और जातीय सर्वेक्षण के नतीजों से पता चलता है कि सामाजिक पिछड़ेपन का मुख्य कारण शिक्षा की कमी है, पैसा या जमीन नहीं। इस सर्वेक्षण में 242 जातियों के 3.55 करोड़ लोग शामिल किए गए थे।
रेड्डी ने दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, हैदराबाद और बेंगलूरु के विकास के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय में ‘एम-6 कार्य बल’ बनाने का प्रस्ताव रखा और बुनियादी ढांचा विकास के लिए 6 लाख करोड़ रुपये (यानी हर शहर के लिए 1 लाख करोड़ रुपये) की विशेष राशि की मांग की। उन्होंने बुनियादी ढांचा परियोजनाओं, सेमीकंडक्टर उद्योग और हैदराबाद में भारतीय प्रबंध संस्थान (आईआईएम) के लिए भी केंद्र सरकार से मदद मांगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य 2034 तक तेलंगाना को 1 लाख करोड़ डॉलर डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाना है।
राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि राज्य ने 35 लाख करोड़ रुपये के निवेश समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं, जिनमें 9 लाख करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं पर काम शुरू हो चुका है। उन्होंने कहा कि राज्य का लक्ष्य वर्ष 2029 तक 350 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनना है जिसके लिए जीएसडीपी की मौजूदा 10.24 प्रतिशत वृद्धि दर काफी सहायक होगी।
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने राज्य के सीमावर्ती इलाकों के विकास के लिए विशेष श्रेणी का दर्जा और एक वित्तीय पैकेज की मांग की। विकास कार्यक्रमों में विषमता बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा,‘हाल ही में शुरू किए गए ‘वाइब्रेंट विलेज-2 प्रोग्राम’ के तहत केवल 107 गांव शामिल किए गए हैं जबकि सीमा के बहुत करीब 2,000 से ज्यादा गांव और कस्बे स्थित हैं।’
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अगले तीन सालों में बस्तर के परिवारों की मासिक आय को 30,000 रुपये तक बढ़ाने पर केंद्रित एक कार्य योजना पेश की। उन्होंने बताया कि अभी बस्तर में लगभग 85 प्रतिशत परिवारों की मासिक आय 15,000 रुपये से कम है। उनके द्वारा सुझाए गए अन्य कदमों में दुग्ध क्रांति लाना, 32,000 हेक्टेयर में सिंचाई सुविधाओं का विस्तार करना, पर्यटन को प्रमुख उद्योग के रूप में बढ़ावा देना और आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई) तथा सेमीकंडक्टर जैसे उभरते क्षेत्रों में निवेश आकर्षित करना शामिल है। उन्होंने कहा कि राज्य में दो सेमीकंडक्टर विनिर्माण इकाइयां स्थापित की जा रही हैं। गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने केंद्र से अनुरोध किया कि पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्यों की तरह ही उनके राज्य में भी ‘केंद्र प्रायोजित योजना’ (सीएसएस) को 90:10 अनुपात में लागू किया जाए।
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी के शिवकुमार ने कहा कि बेंगलूरु के लगभग 40 प्रतिशत निवासी दूसरे राज्यों से आए हैं, इसलिए इसके बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने के लिए केंद्र की मदद चाहिए। उन्होंने कहा,‘हमारा मानना है कि भारत सरकार और राज्यों को अलग-अलग क्षेत्रीय हालात के हिसाब से समाधान तैयार करने में बराबर के साझेदार के तौर पर काम करना चाहिए।’ शिवकुमार ने कई सुझाव भी दिए, जिनमें सरकारी स्कूलों और कॉलेजों को एकबारगी बुनियादी ढांचा अनुदान देना शामिल है ताकि उन्हें निजी क्षेत्र के बराबर अच्छी शिक्षा मिल सके। कर्नाटक के मुख्यमंत्री ने कंपनी मामलों के मंत्रालय से कॉरपोर्ट सामाजिक उत्तरदायित्व नियमों को सख्ती से लागू करने का आग्रह किया ताकि कंपनियों से रकम तय समय सीमा के भीतर ग्रामीण स्वास्थ्य और शिक्षा के बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने में इस्तेमाल हों।
साथ ही उन्होंने सुझाव दिया कि उद्योग अगले तीन सालों के लिए कौशल मानदंड के साथ एक केंद्रीकृत रोजगार पोर्टल के माध्यम से रोजगार से जुड़ी जरूरतों की जानकारी दें। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हिमालयी राज्यों के लिए खास नीतिगत समर्थन और लंबे समय की आर्थिक मदद की जरूरत पर जोर दिया। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने 2047 तक राज्य को 5 लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने की योजना पेश की। नागालैंड के मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो ने अहम बुनियादी ढांचे और विकास परियोजनाओं के लिए केंद्र से मदद मांगी जबकि हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि राज्य को सेमीकंडक्टर, डेटा सेंटर और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण केंद्र के तौर पर विकसित करने के लिए केंद्र से खास प्रोत्साहन पैकेज पैकेज की जरूरत है।