Stock Market Crash: शेयर बाजार में गिरावट का रुख बना हुआ है और बेंचमार्क सूचकांक आज 2 फीसदी से ज्यादा लुढ़क गए। सेंसेक्स और निफ्टी में इस महीने 11 फीसदी से ज्यादा की गिरावट आई है। कोरोना महामारी के दौरान मार्च 2020 में बाजार में आई भारी गिरावट के बाद किसी महीने में सूचकांकों की यह सबसे बड़ी गिरावट है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आने से बाजार में गिरावट आई है।
सेंसेक्स आज 1,636 अंक या 2.22 फीसदी गिरकर 71,948 पर बंद हुआ जो 14 फरवरी, 2024 के बाद से इसका सबसे निचला स्तर है। निफ्टी में 488 अंक या 2.14 फीसदी की गिरावट आई और यह 22,331 पर बंद हुआ जो 7 अप्रैल, 2025 के बाद से इसका सबसे निचला स्तर है। बाजार में व्यापक बिकवाली से इस महीने बंबई स्टॉक एक्सचेंज पर सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण 51.1 लाख करोड़ रुपये घटकर 412.2 लाख करोड़ रुपये रह गया।
हाल की इस गिरावट की वजह थी पश्चिम एशिया में तनाव का फिर से बढ़ना। ईरान के समर्थन में हूती के भी इस संघर्ष में शामिल होने से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में लंबे समय तक रुकावट आने की आशंका बढ़ गई है। ब्रेंट क्रूड का भाव कुछ समय के लिए 116 डॉलर प्रति बैरल के पार चला गया जिससे दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातकों में से एक भारत की चिंता और बढ़ गई।
विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने इस महीने 1.12 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की बिकवाली की। रुपये के हिसाब से यह अब तक की सबसे बड़ी मासिक निकासी है, जिसने अक्टूबर 2024 में 91,983 करोड़ रुपये के पिछले रिकॉर्ड निकासी को भी पीछे छोड़ दिया।
भारतीय रिजर्व बैंक के दखल के बावजूद रुपया लगातार तीसरे सत्र में रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया और कारोबार के दौरान 95 प्रति डॉलर का आंकड़ा पार कर गया। 10-वर्षीय सरकारी बॉन्ड की यील्ड बढ़कर 7 फीसदी के करीब पहुंच गई जो लगभग दो साल में सबसे अधिक है।
बिकवाली का दबाव काफी व्यापक था जिसके चलते सभी क्षेत्रीय सूचकांक आज के साथ ही पूरे महीने के लिए गिरावट में बंद हुए। मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांक में 2.7 फीसदी की गिरावट आई। मार्च महीने में ये दोनों सूचकांक 10 फीसदी से ज्यादा टूटे। तेज गिरावट के बाद मूल्यांकन में नरमी आई है लेकिन विश्लेषकों का कहना है कि पश्चिम एशिया संघर्ष का समाधान ही बाजार की दिशा तय करेगा।
निफ्टी 50 अपनी एक साल की अनुमानित कमाई के लगभग 17 गुना पर कारोबार कर रहा है जो इसके 5 साल के औसत 19.6 गुना से लगभग 13 फीसदी कम है।
इलारा कैपिटल के सहर्ष कुमार ने कहा कि ऐसा लग रहा है कि बाजार समर्थन वाले दायरे के करीब पहुंच रहा है। उन्होंने कहा, ‘एक साल की आगे की कमाई के लगभग 17.3 गुना पर, निफ्टी अपने लंबे समय के औसत से नीचे कारोबार कर रहा है जिससे यह ऐसे दायरे में आ गया है जहां ज्यादातर उछाल देखी गई है।’ उन्होंने कहा कि अगर भू-राजनीतिक तनाव में किसी तरह की कमी आती है तो बाजार में आगे और गिरावट सीमित हो सकती है।
निप्पॉन इंडिया म्युचुअल फंड के सीआईओ (इक्विटी निवेश) शैलेश राज भान ने कहा कि ऊर्जा की बढ़ी हुई कीमतें वृद्धि और कमाई, दोनों के लिए जोखिम पैदा करती हैं। ऐसा लगता है कि बाजार इस बात को मानकर चल रहा है कि संकट का समाधान तेजी से होगा और अगर ऐसा नहीं हुआ तो इसका असर बाजार के मनोबल पर पड़ सकता है।’ उन्होंने अनिश्चितता के इस दौर में पूंजी निवेश के लिए अनुशासित तरीका अपनाने की सलाह दी।