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पश्चिम एशिया संकट: MSME को कर्ज भुगतान में राहत पर विचार, RBI से मॉरेटोरियम की मांग तेज

बैंकिंग नियामक ने बैंकों से उस क्षेत्र और उन उद्योगों में उनके निवेश से जुड़ा आंकड़ा मांगा है जो मौजूदा वै​श्विक संकट से प्रभावित हो सकते हैं

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सुब्रत पांडा   
Last Updated- March 26, 2026 | 10:41 PM IST

पश्चिम एशिया में संघर्ष चलते एक महीना होने को है जिसका भारत सहित दुनिया भर में असर पड़ रहा है। ऐसी ​​स्थिति में बैंकरों ने भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) और केंद्र सरकार को सुझाव दिया है कि नकदी प्रवाह में आई अड़चन के प्रभाव से निपटने के लिए सूक्ष्म, लघु और मध्यम उपक्रमों (एमएसएमई) और मझोले आकार की कंपनियों को कर्ज भुगतान में तय समय के लिए मॉरेटोरियम यानी मोहलत देनी चाहिए। इससे संपत्ति की गुणवत्ता पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा। घटनाक्रम से अवगत सूत्रों ने इसकी जानकारी दी।

सूत्रों ने बताया कि एक वैकल्पिक ढांचा प्रस्तावित किया जा रहा है, जिसमें नकदी प्रवाह की समस्या का सामना कर रहे कर्जदार स्वेच्छा से मॉरेटोरियम का लाभ उठा सकते हैं, बजाय इसके कि बैंक राहत देने से पहले प्रत्येक मामले के आधार पर समस्या का आकलन करें।

कोविड-19 महामारी के दौरान आरबीआई ने कारोबार में व्यापक स्तर पर आई रुकावट और उसके कारण नकदी प्रवाह पर पड़े दबाव को देखते हुए कर्ज चुकाने पर कुछ समय की रोक (मॉरेटोरियम) की अनुमति दी थी। बैंकरों का कहना है कि अगर पश्चिम एशिया में संघर्ष जारी रहता है तो इसी तरह की व्यवस्था पर फिर विचार किया जा सकता है।

बैंकिंग नियामक ने बैंकों से उस क्षेत्र और उन उद्योगों में उनके निवेश से जुड़ा आंकड़ा मांगा है जो मौजूदा वै​श्विक संकट से प्रभावित हो सकते हैं। सूत्रों के अनुसार केंद्र सरकार ने भी स्थिति का जायजा लिया है और बैंकों से अपने सुझाव देने को कहा है।

एक सरकारी बैंक के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘आरबीआई सरकार के साथ (राहत पैकेज पर) काम कर रहा है क्योंकि यह विशेष परि​स्थिति है। अगर मौजूदा स्थिति बनी रहती है तो कई उद्योगों को बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे मामलों में नकदी प्रवाह पर असर पड़ने की वजह से कर्ज चुकाने की थोड़े समय के लिए मोहलत दी जा सकती है। यह रियायत एक-दो महीने या हालात सामान्य होने तक दी जा सकती है।’

उन्होंने कहा, ‘गुजरात के मोरबी में सिरैमिक क्लस्टर पर बहुत बुरा असर पड़ा है क्योंकि टाइल बनाने के लिए यह पूरी तरह से गैस पर निर्भर है। इसी तरह कांच उद्योग, खास कर चूड़ियां बनाने वाले उद्योग भी समस्या से जूझ रहे हैं। प​श्चिम ए​शिया के बाजारों पर निर्भर रहने वाले चावल निर्यातक भी प्रभावित हो रहे हैं। उर्वरक जैसे क्षेत्रों को भी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।’

बैंकरों ने कहा कि अब तक उनके ऋण पोर्टफोलियो में परिसंप​त्ति की गुणवत्ता से जुड़ी कोई समस्या नहीं है। अगर जंग जारी रहती है तो अप्रैल-जून तिमाही के दौरान ऐसी समस्याएं सामने आ सकती हैं। आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार 31 जनवरी, 2026 तक बैंकों का एमएसएमई पोर्टफोलियो 14.57 लाख करोड़ रुपये का था।

खुदरा ऋण की बात करें तो चुनौती गोल्ड लोन में हो सकती है क्योंकि सोने की कीमतों में तेजी से गिरावट आ रही है। ऋणदाता सोने की कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव पर बारीकी से नजर रख रहे हैं। जिन मामलों में कर्ज का मूल्य सोने के दाम से (लोन-टू-वैल्यू) अ​धिक हो जाता है, वहां उधार लेने वालों से या तो और सोना गिरवी रखने या मूल राशि का कुछ हिस्सा चुकाने के लिए कहा जा रहा है। हाल की तिमाहियों में सोने के बदले दिए जाने वाले कर्ज में जबरदस्त बढ़ोतरी देखने को मिली है।

First Published : March 26, 2026 | 10:34 PM IST