1980 के दशक जैसे बने देश के आर्थिक हालात, थका हुआ कॉरपोरेट सेक्टर सुधारने के लिए रणनीतिक कदम जरूरी
देश की अर्थव्यवस्था को लेकर चिंता का माहौल है। अब वृहद आर्थिक आंकड़े एक अंतराल के बाद सामने आते हैं जिससे विश्लेषण में एक हिस्सा धारणात्मक हो जाता है। बहरहाल, मौजूदा माहौल को आकार देने में झटकों के एक पूरे सिलसिले की भूमिका है। वर्ष2018 और 2019 में अर्थव्यवस्था बुरी हालत में थी। उसके बाद […]
जुगाड़ छोड़ना होगा! जापान के साथ मजबूत और गहरे व्यापारिक संबंध बनाने का आ गया है सही समय
भारतीय व्यापारिक अभिजात वर्ग की अंतरराष्ट्रीयकरण संबंधी रणनीति पारंपरिक रूप से अमेरिका पर केंद्रित रही है। दशकों तक यह एक तार्किक विकल्प था। अमेरिका ने दुनिया का सबसे गहरा पूंजी बाजार, सबसे उन्नत तकनीक और एक पूर्वानुमानयोग्य संस्थागत वातावरण प्रदान किया। अब यह परिदृश्य बदल गया है। अमेरिका में संस्थानों की गुणवत्ता में गिरावट आई […]
2026 का तेल संकट: 1970 के दशक जैसा खतरा या नए बदलाव की आहट?
फारस की खाड़ी की नाकाबंदी संभवतः कुछ समय तक जारी रहेगी। मान लेते हैं कि तेल की कीमत 160 डॉलर प्रति बैरल पर स्थिर हो जाएगी, जो युद्ध शुरू होने से पहले की कीमत से लगभग दोगुनी है। इसके अल्पकालिक प्रभाव स्पष्ट हैं। भारतीय अर्थव्यवस्था को प्रवासियों से हासिल होने वाली आय में गिरावट, माल […]
हर किसी को पसंद है अच्छा GST, लेकिन सिस्टम की खामियां समझते हैं नेता
माल एवं सेवा कर (जीएसटी) आज भारत की सफलता पर बोझ की मानिंद हो चुका है। जीएसटी जिस प्रकार काम करता है वह निवेश, निर्यात और उत्पादकता में बाधा डालता है। अमेरिका में संरक्षणवाद और ईरान में युद्ध के कारण उत्पन्न हुई नई आर्थिक तनाव की लहर का सामना करने के दौर में भारत में […]
ऊर्जा क्षेत्र की कमजोरियों को दूर करने की जरूरत
दुनिया में जो माहौल है उसने हमें घरेलू कमजोरियों के बारे में नए सिरे से चिंतित किया है। इजरायल-अमेरिका और ईरान के बीच छिड़े सैन्य संघर्ष ने ऊर्जा बाजार में उथलपुथल पैदा की है और जोखिम की गणना को बदल दिया है। भारत की बात करें तो तेल कीमतों के कारण लग रहे झटकों के […]
भारतीय अर्थव्यवस्था को स्थिर करने के लिए: क्यों मुद्रा अवमूल्यन एक अच्छा विकल्प है
बीते दो दशकों में पश्चिम एशिया में छिड़ी जंग ने वैश्विक आर्थिक मंदी के हालात तो निर्मित किए ही हैं, साथ ही तेल एवं गैस से जुड़े झटके भी दिए हैं। इस निराशा का प्रसार भारत तक भी हुआ है और इसके चार अलग-अलग माध्यम रहे हैं: गैस की कमी, तेल कीमतों में इजाफा, विदेश […]
AI भारत के आईटी उद्योग के लिए विनाश नहीं, बदलाव का संकेत
सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) और आईटी-सक्षम सेवाओं (आईटीईएस) का निर्यात आधुनिक भारतीय आर्थिक इतिहास की एक उल्लेखनीय सफलता है। यह वह प्रमुख क्षेत्र है जहां भारत ने बड़े पैमाने पर वैश्विक प्रतिस्पर्धा हासिल की है। लेकिन आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई) की तीव्र प्रगति ने गिरावट की एक दास्तान को जन्म दिया है। आशंका यह है कि एआई […]
अमेरिका के साथ समझौते को समझने की जरूरत: आयात उदारीकरण से होने वाले लाभ पर फोकस
भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को देश में राजनीतिक आलोचना का सामना करना पड़ा है। कहा जा रहा है कि इस समझौते के जरिये राष्ट्रीय हित का ‘पूर्ण समर्पण’ कर दिया गया है। किसानों ने विरोध प्रदर्शन किए हैं। सुरक्षा विशेषज्ञों ने भारत को चेतावनी दी कि भारत रूसी तेल खरीद बंद कर […]
टैक्स संधियों पर संदेह भारत की ग्रोथ स्टोरी को कमजोर कर सकता है
भारत-मॉरीशस कर संधि को लेकर हालिया घटनाक्रम ने एक बार फिर सीमा पार कराधान के बुनियादी सिद्धांतों को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। हाल ही के एक निर्णय में यह जोर दिया गया है कि कर प्राधिकरण संधि लाभों को अस्वीकार करने के लिए कर-निवास प्रमाणपत्र (टीआरसी) से आगे भी देख सकते हैं, […]
डिकंट्रोल से लाभ: प्रतिबंध हटाने से देश को मिलेंगे बड़े फायदे
भारत के लिए समृद्धि का रास्ता मुक्त बाजार वाली अर्थव्यवस्था बनने से खुलता है। ऐसी अर्थव्यवस्था जो दुनिया के साथ गहराई से जुड़ी हो। फिलहाल तो सीमाओं पर प्रतिबंधों की भूलभुलैया है, जो इस जुड़ाव में बाधा डालती है। भारतीय राज्य ने कई हस्तक्षेप निर्मित किए हैं। उदाहरण के लिए पूंजी नियंत्रण, सीमा शुल्क प्रक्रियाएं, […]









