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लेखक : बीएस संपादकीय

आज का अखबार, संपादकीय

Editorial: भारतीय सेवा क्षेत्र का विरोधाभास

सेवा क्षेत्र भारतीय अर्थव्यवस्था का प्रमुख वाहक है। इस क्षेत्र में करीब 18.8 करोड़ लोगों को रोजगार मिला है और यह सकल मूल्यवर्धन (जीवीए) में करीब 55 फीसदी का योगदान करता है। इस क्षेत्र के रोजगार के रुझानों और जीवीए से संबंधित नीति आयोग की दो रिपोर्ट बताती हैं कि सेवा क्षेत्र के सुर्खियों वाले […]

आज का अखबार, लेख, संपादकीय

Editorial: भारत ने टाली बाहरी संकट की मार, विकास के लिए स्थिरता जरूरी

टिकाऊ आर्थिक विकास हासिल करने के लिए हर समय आर्थिक और वित्तीय स्थिरता बनाए रखना एक आवश्यक शर्त है। बहरहाल इसे हासिल करना आसान नहीं है। खासतौर पर विकासशील देशों के लिए ऐसा करना आसान नहीं है। बीते कुछ दशकों में विकासशील देशों में आर्थिक संकट के कई अवसर आए हैं। भारत को वर्ष 1991 […]

आज का अखबार, लेख, संपादकीय

Editorial: 8वें वेतन आयोग को मिली मंजूरी, केंद्रीय कर्मचारियों के वेतन भत्तों में संशोधन की प्रक्रिया शुरू

केंद्र सरकार ने मंगलवार को आठवें केंद्रीय वेतन आयोग (सीपीसी) के लिए टर्म्स ऑफ रेफरेंस यानी उसके काम करने के नियम-शर्तों और दायरे को मंजूरी दे दी। इसके साथ ही केंद्र सरकार के कर्मचारियों के वेतन भत्तों में संशोधन की प्रक्रिया आरंभ हो गई। वेतन में इस संशोधन से केंद्र सरकार के करीब 50 लाख […]

आज का अखबार, लेख, संपादकीय

Editorial: कर विवादों का हो शीघ्र समाधान

देश के सभी उच्च न्यायालयों में कर विवादों की संख्या चिंताजनक रूप से बढ़ रही है। हाल ही में शोध संगठन ‘दक्ष’ द्वारा किए गए विश्लेषण में पाया गया है कि 12,000 से ज्यादा कर मामले (लगभग 34 फीसदी) एक दशक से भी ज्यादा समय से उच्च न्यायालयों में बिना किसी सुनवाई के लंबित हैं। […]

आज का अखबार, संपादकीय

Editorial: अमेरिका और चीन टैरिफ, अनिश्चितता का हो अंत

सप्ताहांत पर अमेरिका और चीन के व्यापार वार्ताकारों ने कहा कि वे दोनों देशों के बीच कई मुद्दों पर सहमति पर पहुंचे हैं और अपनी बातचीत के नतीजों को राष्ट्रपति शी चिनफिंग तथा डॉनल्ड ट्रंप के समक्ष प्रस्तुत करने को लेकर उत्सुक हैं। यह घटनाक्रम उस एक सप्ताह की सघन कूटनीति का परिणाम है जिसमें […]

आज का अखबार, संपादकीय

Editorial: बाजार में एसएमई आईपीओ की लहर

औपचारिक ऋण तक सीमित पहुंच और उच्च निगरानी लागत से लंबे समय से परेशान भारत के लघु एवं मझोले उद्यम (एसएमई) पारंपरिक रूप से वित्त के अनौपचारिक स्रोतों पर निर्भर रहे हैं। बैंक अक्सर सूचना की खामियों और गिरवी के अभाव के कारण उन्हें जोखिम भरा मानते हैं। इस पृष्ठभूमि में, प्रारंभिक सार्वजनिक पेशकश या […]

आज का अखबार, संपादकीय

Editorial: ORS लेबल पर प्रतिबंध के बाद अन्य उत्पादों पर भी पुनर्विचार होना चाहिए

भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) की ओर से खाद्य एवं पेय पदार्थ निर्माताओं द्वारा ‘ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन’ (ओआरएस) शब्द के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाने का परामर्श बहुत पहले आ जाना चाहिए था। बाल रोग विशेषज्ञों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों द्वारा आठ साल से चलाए जा रहे अभियान का नतीजा यह परामर्श है कि उत्पादों […]

आज का अखबार, लेख, संपादकीय

Editorial: भारतीय वित्तीय क्षेत्र में बढ़ी विदेशी कंपनियों की दिलचस्पी

देश के वित्तीय क्षेत्र में विदेशी कंपनियों की अभिरुचि महत्त्वपूर्ण रूप से बढ़ रही है। उदाहरण के लिए गत सप्ताह संयुक्त अरब अमीरात की कंपनी एनबीडी पीजेएससी ने मझोले आकार के निजी बैंक आरबीएल बैंक में 26,850 करोड़ रुपये यानी करीब 3 अरब डॉलर के निवेश का समझौता किया। इसके जरिये वह बैंक में 60 […]

आज का अखबार, लेख, संपादकीय

डिजिटल युग में श्रम सुधार: सरकार की नई श्रम शक्ति नीति में एआई और कौशल पर जोर

श्रम एवं रोजगार मंत्रालय की मसौदा राष्ट्रीय श्रम नीति यानी श्रम शक्ति नीति सही इरादों वाली प्रतीत होती है। इसका लक्ष्य एक निष्पक्ष, समावेशी और भविष्य की दृष्टि से तैयार व्यवस्था बनाने की है जहां हर श्रमिक फिर चाहे वह औपचारिक क्षेत्र का हो, असंगठित क्षेत्र का या गिग वर्कर, उसकी गरिमा का ध्यान रखा […]

आज का अखबार, लेख, संपादकीय

Editorial: पराली जलाने की समस्या का स्थायी समाधान जरूरी

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) दीवाली के बाद होने वाले घातक प्रदूषण से जूझ रहा है और इस बीच यह बात याद रखने लायक है कि इस वर्ष फसल अवशेषों यानी कि पराली को जलाने का वायु प्रदूषण में उतना अधिक योगदान नहीं रहा है। ध्यान रहे कि आमतौर पर ठंड का मौसम शुरू होने पर […]

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