Editorial: बजाज समूह के 100 साल पूरे, लेकिन अभी कई चुनौतियां सामने
आर्थिक उदारीकरण भारत के पारिवारिक स्वामित्व वाले व्यापारिक समूहों के लिए अनुकूल नहीं रहा है। वर्ष 2000 के दशक की शुरुआत में खुले बाजारों में प्रतिस्पर्धा करने में असमर्थता ने तीखे आंतरिक झगड़ों को जन्म दिया, जिसके कारण प्रसिद्ध ‘लाइसेंस राज’ के दिग्गज समूह बिखर गए। इनमें सिंघानिया, श्रीराम, मफतलाल कुछ प्रमुख नाम हैं। यही […]
Editorial: नॉर्डिक देशों के साथ भारत की रणनीतिक साझेदारी
हाल ही में ओस्लो में संपन्न भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन यूरोप के नॉर्डिक क्षेत्र के साथ भारत के रिश्तों को व्यापक बनाने के मामले में अहम रहा है। इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शिरकत की। नॉर्डिक में उत्तरी यूरोप के डेनमार्क, फिनलैंड, आइसलैंड, नॉर्वे और स्वीडन जैसे देश शामिल हैं और अब भारत इनके साथ पारंपरिक […]
Editorial: पश्चिम एशिया संकट से बढ़ी ऊर्जा चिंता, भारत के सामने कठिन चुनौती
खबरों के मुताबिक अमेरिका ने गतिरोध दूर करने के संबंध में ईरान के नवीनतम प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। इसका अर्थ यह है कि पश्चिम एशिया में अनिश्चितता का सिलसिला जारी रहेगा और अभी तक इस बारे में कुछ भी स्पष्ट नहीं है कि होर्मुज स्ट्रेट का अवरोध कब तक खुलेगा ताकि तेल और […]
Editorial: सुनील मित्तल के उत्तराधिकार प्लान से भारती एयरटेल में बड़े बदलाव की आहट
भारती एयरटेल के चेयरमैन सुनील भारती मित्तल (68 वर्ष) ने एक क्रमिक उत्तराधिकार योजना अपनाने का निर्णय लिया है। यह भारतीय पारिवारिक व्यवसायों में दुर्लभ है। पिछले सप्ताह मित्तल ने अर्निंग कॉल (नतीजे घोषित होने के बाद का आयोजन) में एक 10-वर्षीय पीढ़ीगत बदलाव योजना की घोषणा की जिसे वे भारती एयरटेल में लागू करना […]
ईरान-अमेरिका तनाव के बावजूद UP में खाद संकट नहीं! योगी सरकार का दावा: पिछले साल से ज्यादा स्टॉक
ईरान-अमेरिका-इजराइल तनाव के बीच खाद की संभावित किल्लत की आशंकाओं के बीच उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने राज्य में पर्याप्त उर्वरक उपलब्ध होने का दावा किया है। प्रदेश सरकार का कहना है कि इस समय राज्य में पिछले साल की तुलना में अधिक उर्वरक उपलब्ध है। गौरतलब है कि हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र […]
Editorial: भारतीय कंपनियों की सबसे कमजोर कड़ी साबित हो रहा है कॉरपोरेट शासन
जब भी भारत में कोई कंपनी तेजी से उभरती है तब लोगों की स्वाभाविक प्रतिक्रिया होती है कि पहले थोड़ी देर रुककर उसके प्रदर्शन को देखा जाए। ज्यादातर मामलों में, ये कंपनियां आर्थिक सुधारों के नए अवसरों का लाभ उठाकर अपना अस्तित्व बनाए रखती हैं और तरक्की करती हैं। लेकिन अक्सर भारत में उद्यमिता वाले […]
Editorial: तेल संकट और महंगे ईंधन की दोहरी मार, बेकाबू हो सकती देश में महंगाई की रफ्तार
सरकारी तेल विपणन कंपनियों ने गत सप्ताह पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 3 रुपये प्रति लीटर का इजाफा किया। चार साल में यह पहला मौका था जब तेल कीमतें बढ़ाई गईं। गैस वितरण कंपनियों ने भी कंप्रेस्ड नेचुरल गैस यानी सीएनजी की कीमतों में 2 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी की है। वैश्विक बाजारों […]
Editorial: जजों की कमी और बदहाल इंफ्रास्ट्रक्चर से जूझ रही न्यायिक प्रणाली, सुधार की जरूरत
भारत की अदालतों में बहुत बड़ी संख्या में लंबित मामले देश की न्यायिक प्रणाली की एक सर्वविदित कमजोरी है। लंबित मामलों की संख्या लगभग 5.5 करोड़ है। इस समस्या का मुख्य कारण अदालतों में कर्मचारियों की भारी कमी बताया जाता है। मुख्य रूप से न्यायाधीशों की, साथ ही स्टेनोग्राफर और क्लर्क जैसे अधीनस्थ कर्मचारियों की […]
Editorial: सोने पर बढ़ा शुल्क मांग घटाने में कितना असरदार होगा?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देश में ईंधन और सोने की खपत कम करने की अपील के बाद सरकार ने कई कदम उठाए हैं। एक ओर जहां सरकार कई स्तरों पर ईंधन खपत कम करने का प्रयास कर रही है वहीं केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने बुधवार को सोने और चांदी पर प्रभावी आयात शुल्क को 6 […]
Editorial: अर्थव्यवस्था को चाहिए स्थिर नीति
भारत द्वारा आर्थिक सुधारों की राह अपनाने के करीब 35 वर्ष बाद भी देश की अर्थव्यवस्था द्वारा पूरी संभावनाओं का दोहन करने के लिए अभी बहुत कुछ किया जाना है। नीति आयोग के सदस्य राजीव गाैबा ने इस सप्ताह भारतीय उद्योग परिसंघ यानी सीआईआई के सालाना व्यापार सम्मेलन में भारतीय नीति निर्माण की एक बड़ी […]









