लिप्टॉर मामले के खतरनाक इशारे
पिछले हफ्ते रैनबैक्सी के शेयर होल्डरों को उस वक्त जबरदस्त झटका लगा था, जब उन्हें यह पता लगा कि रैनबैक्सी ने कोलेस्ट्रॉल की दवा, लिप्टॉर के मुद्दे पर बहुराष्ट्रीय कंपनी फाइजर के साथ समझौता कर लिया। रैनबैक्सी ने फैसला किया था कि वह लिप्टॉर के मुद्दे पर ज्यादा मुकदमेबाजी नहीं करना चाहती। बदले में फाइजर […]
पथरीली है रिटेल की राह
आज से कोई 15 साल पहले डॉ. मनमोहन सिंह ने ही इंस्पेक्टर राज से मुल्क के उद्योग धंधों को निजात दिलाने की शुरुआत की थी। आज कोई भी इस पहल का हिन्दुस्तानी कारोबारी जगत पर पड़े असर को देख सकता है। आज भारतीय कंपनियों के झंडे दुनिया की बड़ी-बड़ी कंपनियों के ऊपर लहरा रहे हैं। […]
वैश्विक दुनिया में अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकता
बैंक आफ इंगलैंड (यूनाइटेड किंगडम के केंद्रीय बैंक, बीओई) के गवर्नर मार्विन किंग ने चांसलर आफ एक्सचेकर एलास्टर डार्लिंग को एक खत लिखा, जो बैंक की वेबसाइट पर दिया गया है। किंग को खत इसलिए लिखना पड़ा क्योंकि यूनाइटेड किंगडम की मौद्रिक नीति जनता की आकांक्षाओं को पूरा करने में असफल रही। बैंक का लक्ष्य […]
छोटी उम्र के बड़े-बड़े ख्वाब, टूट न जाएं कहीं
अनूप शर्मा ने 22 वर्ष की उम्र में बतौर मार्केटिंग एक्जीक्युटिव एक कूरियर कंपनी में नौकरी करना शुरू कर दिया। अनूप के ख्वाब उसकी आमदनी से काफी महंगे-महंगे थे। हाई एंड मोबाइल, बाइक और महंगे ब्रांडेड कंपड़े, वह यह सब पहले ही दिन खरीदन लेना चाहता था जिस दिन उसे उसका पहला वेतन 12 हजार […]
पहले बनाई योजना का फायदा मिलेगा लेकिन बाद में
अमित सक्सेना, 55 वर्ष, मानव संसाधन से जुड़े एक अधिकारी। सक्सेना चाहते हैं कि सेवानिवृत्ति के लिए वह एक बढ़िया बीमा पॉलिसी ले लें। ऐसा नहीं है कि उन पर बहुत-सी जिम्मेदारियां या देनदारियां हैं। वह अमेरिका में अपने बेटे की शिक्षा और मकान के लिया गया कर्ज समय रहते लौटा चुके हैं। इस दौरान […]
मताधिकार में बदलाव, बदल सकता है आपका भविष्य
निवेशकों को एक नए तरह के शेयरों- विशेषक मताधिकारी के साथ शेयर- के लिए तैयार हो जाना चाहिए। टाटा मोटर्स ने इसे इस साल मई में कंपनी को जगुआर और लैंड रोवर के अपने सौदे को 2 हजार करोड़ रुपये बतौर फंड मुहैया कराने के लिए पेश किया था। टाटा समूह के बाद ऐसी उम्मीद […]
बीएस की क्लास
1- सिंतबर 2007 में ……….. की ओर से बॉन्ड जारी कर 8 हजार करोड़ रुपये एकत्र किए गए। क- भारतीय स्टेट बैंक ऑफ इंडियाख- एचडीएफसी बैंकग- कोटक महिन्द्रा बैंकघ- आईसीआईसीआई बैंक2- 1980 के दशक के मध्य में कई ……………. के देशों के कर्ज में डिफॉल्ट के देखते हुए 1989 में ‘बै्रडी बॉन्ड्स’ जारी किए गए। […]
सुहाने सफर की मुश्किल डगर
मांग में लगातार जारी मंदी,कच्चे माल की कीमतों मे लगातार हो रही वृध्दि और ऊंची ब्याज दर देश की सबसे बड़ी ऑटोमोबाइल कंपनी टाटा मोटर्स के लिए कोई अच्छी खबर नहीं है। कंपनी को अपना लाभ बरकरार रखने के लिए पिछले पांच महीनों में अपने वाणिज्यिक और यात्री वाहनों के दाम बढ़ाने के लिए मजूबर […]
तेल, महंगाई और चुनाव हैं एफआईआई की चिंता
दिनोदिन कमजोर होते जा रहे भारतीय शेयर बाजार के लिए विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) का तेजी से धन निकालना चिंता का प्रमुख कारण बन गया है। बीते साल के मुकाबले अब स्थिति बिलकुल उल्टी है। इसलिए कई सवाल उठ रहे हैं। अब भारत के बारे में एफआईआई की समझ क्या है? क्या वे अपना धन […]
किताबी थ्योरी से आगे का बाजार
मैंने सबसे पहले तालेब की चीप ऑप्शन खरीदने संबंधी कहानी के बारे में वर्ष 2000 में पढ़ा था। उस समय भारत में ऑप्शन में भरोसा करनेवालों के लिए यह समय मुश्किलों से भरा था। तब से अब तक आठ साल हो चुके हैं और मैं अभी भी तालेब की चीप ऑप्शन थ्योरी में उतना ही […]
