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लेखक : प्रांजुल भंडारी

आज का अखबार, लेख

ऐसा झटका जिसे सही से समझा गया ही नहीं

भारत एक और झटके का सामना कर रहा है। ऐसे परिदृश्य में, जहां व्यवधान मॉनसून के पूर्वानुमान की तरह नियमित रूप से आते हैं, अगर कोई अच्छी बात है, तो वह यह है कि हम यह बेहतर ढंग से समझने लगे हैं कि कौन सी नीतिगत प्रतिक्रियाएं मददगार हैं और कौन सी नहीं। ऊर्जा संकट […]

आज का अखबार, लेख

निवेश आधारित विकास के लिए तटस्थ नीति और साफ-सुथरे भरोसेमंद नियम क्यों हैं जरूरी

बजट जिस पृष्ठभूमि में तैयार होता है वही आगे का माहौल तय करती है। मगर इस साल हालात भ्रमित करने वाले लग रहे हैं। ऐसे पर्याप्त संकेत हैं जो यह बताते हैं कि आर्थिक वृद्धि कमजोर और मजबूत दोनों है। कुछ लोगों का तर्क है कि आर्थिक वृद्धि तेजी की ओर बढ़ रही है। वास्तविक […]

आज का अखबार, लेख

ऋण और जमा संतुलन का समाधान वास्तविक अर्थव्यवस्था में, मिंट स्ट्रीट पर नहीं

बाजार की स्मृति अल्पकालिक हो सकती है। गत वर्ष लगभग इसी समय हम कमजोर जमा वृद्धि को लेकर बातें कर रहे थे। आज, हम कमजोर ऋण वृद्धि को लेकर चिंतित हैं। हमारा मानना कि इन दोनों अवधियों में एक बात समान है। एक ओर जहां मदद के लिए सभी की निगाहें भारतीय रिजर्व बैंक की […]

आज का अखबार, लेख

Budget 2025-26: बजट में दिख पाएगा कुछ अलग करने का साहस?

साल का यह बहुत अहम समय है। फरवरी की पहली तारीख को वित्त वर्ष 2025-26 का बजट पेश किया जाएगा और उसके हफ्ते भर के भीतर 7 फरवरी को भारतीय रिजर्व बैंक की नीतिगत बैठक शुरू हो जाएगी। नीति निर्माताओं के सामने बेहद पेचीदा स्थिति आ गई है। सार्वजनिक पूंजीगत व्यय को फिर शुरू करना, […]

आज का अखबार, लेख

100 संकेतकों के आधार पर वृद्धि की पड़ताल

शेयर बाजार में जबरदस्त उछाल और सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में उल्लेखनीय वृद्धि के बाद हालात अपेक्षाकृत शांत नजर आ रहे हैं। हाल के दिनों में सामने आए आंकड़े मिलाजुला संदेश दे रहे हैं- कुछ सकारात्मक और कुछ नकारात्मक। कुछ में सुधार होता नजर आता है और कुछ में गिरावट। इस बीच सभी आंकड़ों में […]

आज का अखबार, लेख

भारत को निर्यात से मिलती राहत की गुंजाइश

भारत की सेवाओं पर आधारित अर्थव्यवस्था में कुछ सार्थक बदलाव हुए हैं। महामारी से पहले की अवधि की तुलना में शुद्ध आधार पर, सेवा निर्यात से राजस्व में प्रति वर्ष 60 अरब डॉलर से अधिक रकम मिल रही है। इससे भुगतान संतुलन के मोर्चे पर काफी राहत मिली है। सिर्फ मुद्रास्फीति ही इन आंकड़ों को […]

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