क्या तेल संकट के दौर में भारत की महंगाई नियंत्रण नीति जरूरत से ज्यादा सख्त है?
इसमें संदेह नहीं कि भारत का मुद्रास्फीति को लक्षित करने वाला ढांचा मुद्रास्फीति घटाने में कामयाब रहा है। इसके पहले हमें लगातार उच्च मुद्रास्फीति का सामना करना पड़ता था, वास्तविक ब्याज दरें ऋणात्मक रहती थीं और वृहद आर्थिक मोर्चे पर अक्सर अस्थिरता रहती थी। मुद्रास्फीति की दर अक्सर दो अंकों के करीब रहती थी। इससे […]
मुसीबत न बन जाए ‘बिना कोलैटरल’ वाला कर्ज, 2008 जैसा बैंकिंग संकट दोहराने की आशंका
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने प्रस्ताव दिया है कि सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों के मामले में 20 लाख रुपये तक के ऋण पर बैंकों को गिरवी (कोलैटरल) की शर्त हटा देनी चाहिए। आरबीआई ने यह भी कहा है कि स्वैच्छिक रूप से सोना या चांदी गिरवी रखने की अनुमति दी सकती है। केंद्रीय बैंक की […]
काबू में महंगाई, लेकिन चुकानी पड़ी कीमत: इन्फ्लेशन लक्षित करने की व्यवस्था में सुधार का अवसर
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) अपने मुद्रास्फीति लक्ष्य निर्धारण ढांचे को लेकर सार्वजनिक टिप्पणियां आमंत्रित करने का फैसला किया है जो स्वागतयोग्य है। सलाह-मशविरा एक स्वस्थ प्रवृत्ति है लेकिन ढांचे में बदलाव करने के पहले हमें पहले यह सवाल पूछना चाहिए: यह व्यवस्था कितनी कारगर रही है? रिजर्व बैंक के अगस्त 2025 के परिचर्चा पत्र में […]


