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लेखक : आर कविता राव

आज का अखबार, लेख

भारत में निवेश की सुस्ती गहरे संरचनात्मक बदलावों का नतीजा

पश्चिम एशिया संकट और उसके कारण कच्चे तेल और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों को लगा आपूर्ति झटका बताता है कि भारत एक आर्थिक तूफान की ओर बढ़ रहा है। उभरते जोखिमों को दो घटकों में बांट कर देखा जा सकता है: उर्वरक और पेट्रोलियम उत्पादों जैसे कच्चे माल की कम उपलब्धता के कारण जरूरी चीजों की […]

आज का अखबार, लेख

GST दरों में कटौती: क्या वाकई बढ़ी बाजारों में रौनक या ग्राहकों ने खींच लिए हाथ?

माल एवं सेवा कर (जीएसटी) व्यवस्था को एक जटिल ढांचे के साथ पेश किया गया था जिसमें पांच दरों वाली स्लैब और समय-समय पर दरों को युक्तिसंगत बनाने की प्रतिबद्धता शामिल थी। दरों को युक्तिसंगत बनाने के कई प्रयास किए गए हैं जिनमें सबसे ताजा सितंबर 2025 में हुआ बदलाव है।  इन समायोजनों को अक्सर […]

आज का अखबार, लेख

ऊर्जा संकट: टिकाऊ समाधान के लिए कीमतों को एडजस्ट होने दें

पश्चिम एशिया संकट ने वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस यानी एलपीजी की कमी पैदा कर दी है। भारत आयातित ईंधन पर बहुत अधिक निर्भर है इसलिए संकट ने इसे काफी प्रभावित किया है। इस कमी को देखते हुए और भविष्य में उपलब्धता की अनिश्चितता को देखते हुए कच्चे तेल और एलएनजी […]

आज का अखबार, लेख

बजट 2026-27: कर प्रोत्साहन और सख्त राजकोषीय गणित ने विकास अनुमानों की परीक्षा ली

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2026-27 के बजट भाषण में कर और गैर-कर उपायों के माध्यम से अर्थव्यवस्था के विभिन्न उद्योगों में निवेश को प्रोत्साहित करने की योजना प्रस्तुत की है। वैश्विक अनिश्चितताओं और विदेशी पूंजी प्रवाह को प्रोत्साहित करने और बनाए रखने की बढ़ती आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए बजट में रोजगार के […]

आज का अखबार, लेख

बजट 2026: प्राइवेट कैपेक्स बढ़ाने पर जोर, कई अनजाने सवाल अभी बाकी

वर्ष 2026-27 का बजट उथलपुथल वाले परिदृश्य में पेश किया जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय मोर्चे पर अमेरिका द्वारा भारतीय निर्यात पर लगाए गए जबरदस्त शुल्क से बनी अनिश्चितता के बीच सरकार इस बात को लेकर कड़ी मशक्कत कर रही है कि एक के बाद एक कई व्यापार समझौतों को अंजाम दिया जा सके। यूरोपीय संघ […]

आज का अखबार, लेख

भारत में राज्यों के बीच निवेश की खाई के पीछे सिर्फ गरीबी नहीं, इससे कहीं गहरे कारण

भारतीय अर्थव्यवस्था जहां अनिश्चित समय में भी मजबूत वृद्धि हासिल करती रही है वहीं वैश्विक और स्थानीय स्तर पर एक स्थायी चिंता यह है कि विभिन्न राज्यों के आर्थिक प्रदर्शन में काफी अंतर पाया जाता है। खासकर प्रति व्यक्ति आय आर्थिक गतिविधियों की प्रकृति और संरचना के साथ-साथ व्यापक रूप से भिन्न होती है। कई […]

आज का अखबार, लेख

आयकर अनुपालन: बढ़त भी, चुनौतियां भी; लेकिन निल रिटर्न की ऊंची हिस्सेदारी बनी चिंता

आयकर व्यवस्था की चिंताओं में प्रमुख है उसके दायरे का विस्तार करना यानी अधिक से अधिक संख्या में करदाताओं को इस व्यवस्था के अंतर्गत लाना। बड़े आधार यानी करदाताओं की अधिक संख्या वाली कर व्यवस्था ज्यादा स्थिर मानी जाती है और राजस्व का अधिक सशक्त स्रोत भी होती है। पहले से निर्धारित समय या अंतराल […]

आज का अखबार, लेख

असंगठित उपक्रमों का जाल: औपचारिक नौकरियों की बढ़ोतरी में क्या है रुकावट?

देश में सेवा क्षेत्र के रोजगार संबंधी रुझानों पर नीति आयोग की एक हालिया रिपोर्ट ने देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में सबसे अधिक हिस्सेदारी रखने वाले इस क्षेत्र में रोजगार के हालात को एक बार फिर प्रकाश में ला दिया है। रिपोर्ट देश में रोजगार तैयार करने में सेवा क्षेत्र की भूमिका को […]

आज का अखबार, लेख

टैक्स से लेकर जीडीपी तक: बेहतर कलेक्शन वाले देशों से भारत क्या सीख सकता है?

भारत के कर एवं सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) अनुपात पर होने वाली चर्चाओं में अक्सर अन्य देशों की तुलना में भारत के प्रदर्शन का जिक्र किया जाता है। इसका मूल विश्लेषण अन्य समान देशों के साथ सामान्य तुलना या स्टोकेस्टिक फ्रंटियर विश्लेषण जैसे सांख्यिकीय तरीकों पर आधारित है। विश्व बैंक के दक्षिण एशिया विकास अपडेट, […]

आज का अखबार, लेख

GST में दो चरणों वाले सुधार की दरकार: शार्ट टर्म में मांग को बढ़ावा और लॉन्ग टर्म में दरों में समायोजन

भारत के कारोबारी जगत के मौजूदा आर्थिक माहौल के बीच ही इसे एक और झटका लगा है। अमेरिकी सरकार द्वारा घोषित दंडात्मक शुल्क 27 अगस्त से लागू हो गए हैं। इसके तहत भारत के विभिन्न तरह के निर्यात पर 50 फीसदी का आयात शुल्क लगाया गया है। इन शुल्कों का प्रभाव वस्त्र, जूते-चप्पल, रत्न एवं […]

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