मार्केट में चूक पर सिर्फ निजी कंपनियों पर ही क्यों गिरे गाज, सरकारी एजेंसियों की लापरवाही पर भी तय हो कड़ा जुर्माना
जानकारी के मुताबिक देश का अग्रणी स्टॉक एक्सचेंज नैशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) कानूनों के मुताबिक कामकाज करने में नाकाम रहने के पुराने आरोप भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) के साथ निपटाने जा रहा है। इसके लिए एनएसई 1,800 करोड़ रुपये चुकाएगा। एक तरह से यह विनियमित संस्था और उसके वैधानिक नियामक के बीच निपटारा […]
नया सिक्योरिटीज कोड अपने वैधानिक उद्देश्य से भटका, निवेशक असुरक्षित हुए
भारत के प्रतिभूति बाजार अब खुदरा युग में हैं। पहली बार निवेश करने वाले लाखों निवेशक डिजिटल प्लेटफॉर्म्स, म्युचुअल फंड्स और सेवानिवृत्ति संबंधी योजनाओं के जरिये निवेश करते हैं। उनके लिए नियामक ढांचे पर विश्वास कोई अमूर्त अवधारणा नहीं है बल्कि यह वह शर्त है जो भागीदारी को संभव बनाती है। इसलिए, प्रतिभूति बाजार संहिता […]
नियामकीय व्यवस्था में खामियां: भारत को शक्तियों का पृथक्करण बहाल करना होगा
देश में शक्तियों के बंटवारे की बहस पारंपरिक रूप से संवैधानिक ढांचे के भीतर विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका पर केंद्रित रहती है। बहरहाल आज कहीं अधिक बड़ी चुनौती इस शास्त्रीय त्रयी से इतर नियामकीय संस्थाओं में निहित है। नियामक अपने-अपने क्षेत्र में छोटे स्वयंभू राज्यों की तरह काम करते हैं और इस दौरान वे एक […]
जिम्मेदारी भरे नियमन हैं सुधारों की कुंजी
आर्थिक समीक्षा में इस बार स्पष्ट संदेश दिया गया है: ‘रास्ता छोड़ो।’ इसमें वृद्धि की रफ्तार तेज करने के लिए आर्थिक आजादी की वकालत की गई है। इसके लिए समीक्षा में प्रस्ताव है, ‘इस बात की व्यवस्थित समीक्षा की जाए कि नियम-कायदे कितने किफायती हैं और उसके बाद व्यवस्थित तरीके से विनियमन किया जाए।’ समीक्षा […]



