दार्जिलिंग की मशहूर चाय को यूरोपीय बाजार में आखिरकार जगह मिल सकती है। दार्जिलिंग की चाय अपनी गुणवत्ता के साथ यूरोपीय बाजार के मानकों पर खरा उतरेगी तो यह संभावना और भी बढ़ जाएगी। भारतीय चाय बोर्ड के साथ ब्रिटेन की टी काउंसिल की बातचीत आखिरी चरण में पहुंच चुकी है। इस बातचीत के जरिए […]
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वेयरहाउसिंग (डेवलपमेंट ऐंड रेग्युलेशन) एक्ट (डब्ल्यूृडीआरए) को लागू करने के लिए 1 मार्च 2009 को अध्यादेश जारी होने वाला था, लेकिन नियामक की नियुक्ति को लेकर अनिश्चितता के चलते इसमें अभी 2-3 महीने और देरी हो सकती है। सरकार ने आंध्र प्रदेश के स्थानीय आयुक्त विश्वनाथ चिरावुरी को वेयरहाउसिंग डेवलपमेंट ऐंड रेगुलेशन अथारिटी के संयुक्त […]
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वैश्विक मंदी के चलते मांग में आई कमी से जहां अधिकतर उद्योग आर्थिक परेशानी का सामना कर रहे हैं वही टेक्सटाइल उद्योग में इसका खास असर नहीं देखने को मिल रहा है। घरेलू बाजार में कपड़े की मांग बनी रहने के कारण सूती कपड़ा उद्योग में तेजी देखी जा रही है। घरेलू बाजार में अच्छी […]
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इस समय चीन का टेक्सटाइल उद्योग मंदी के दौर से गुजर रहा है और पिछले कई साल में पहली बार वहां विकास नकारात्मक रही है। इस स्थिति का लाभ भारतीय प्रतिस्पर्धियों को उठाना चाहिए। डेनिम की बड़ी उत्पादक अरविंद लिमिटेड के चेयरमैन संजय लालभाई के मुताबिक मंदी का फायदा उठाते हुए भारत के प्रतिस्पर्धियों को […]
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दुनिया भर में जलवायु परिवर्तन के दंश से उत्तर प्रदेश में आम की खेती करने वाले हजारों किसान भी नहीं बच पाए हैं। मौसम में अस्थिरता की वजह से तापमान में काफी बढ़ोतरी हुई और इससे आम के पेड़ पर बहुत पहले ही बौर आ गए। इसकी वजह से किसानों और कारोबारियों की मुसीबतें बढ़ […]
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ब्रांडेड ईंधन की बिक्री (खासकर डीजल) में इस साल के दौरान करीब 13 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। इसकी प्रमुख वजह ज्यादा उत्पाद शुल्क और मांग में आई सामान्य कमी है। जून 2008 में सरकार ने नान-ब्रांडेड डीजल और पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क 1 रुपये प्रति लीटर कम कर दिया था। वहीं ब्रांडेड […]
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यूपोपियन संसद के सदस्यों (एमईपी) की एक रिपोर्ट से भारत और यूरोपीय संघ के बीच व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (सीईपीए) पर हो रही बातचीत खटाई में पड़ सकती है। सीईपीए में कर मुक्त सामान व सेवाओं और निवेश का मसला शामिल है। इस रिपोर्ट में सीईपीए में मानवाधिकारों और लोकतंत्र के मसले को शामिल करने […]
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चीनी मिलों को ‘एडवांस लाइसेंसिंग’ के तहत आयातित कच्ची चीनी के बदले चीनी निर्यात करने की चिंता अभी से सताने लगी है। उनका कहना है जब बीज नहीं बचेंगे तो अगले साल गन्ने के उत्पादन में और कमी आएगी। लिहाजा घरेलू खपत के लिए ही चीनी की कमी रहेगी तो वे निर्यात कहां से करेंगे। […]
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मंदी की आह ने देश के प्लास्टिक कारोबारियों के भी कान खड़े कर दिये है। कच्चे माल की कीमतों में हुई बढ़ोतरी और मांग में आ रही कमी से पिछले छह महीनों के दौरान ही प्लास्टिक कारोबार 20 से 25 फीसदी तक सिमट गया है। पिछले एक साल के दौरान प्लास्टिक के कच्चे माल पॉलिमर […]
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वैश्विक कालीमिर्च बाजार इस समय 2006 के संकट के बाद सबसे गंभीर दौर से गुजर रहा है। सभी उत्पादक इलाकों में दिन प्रतिदिन कालीमिर्च की कीमतें धराशायी हो रही हैं। इस समय भारत में इसकी कीमतें 2006 के बाद गिरकर सबसे कम स्तर, 10,200 रुपये प्रति क्विंटल पर आ गई हैं। जून 2006 में एएसटीए […]
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