अपने स्टेकहोल्डर्स के प्रति प्रतिबद्धता को दिखाने के तहत, Adani Group ने रविवार, 23 फरवरी को वित्त वर्ष 2023-24 के लिए अपने टैक्स ट्रांसपेरेंसी (पारदर्शिता) रिपोर्ट जारी की। इस रिपोर्ट में कुल कर योगदान 581.04 बिलियन रुपये बताया गया है, जो पिछले साल के 466.10 बिलियन रुपये की तुलना में उल्लेखनीय बढ़ोतरी को दिखाता है। साथ ही यह अदाणी ग्रुप के बढ़ते आर्थिक प्रभाव को भी दिखाता है।
यह रिपोर्ट ग्रुप की सात लिस्टेड कंपनियां, जिनमें अदाणी एंटरप्राइजेज, अदाणी पोर्ट्स और अदाणी ग्रीन एनर्जी सहित अन्य कंपनियां शामिल हैं, ने स्वतंत्र रूप से प्रकाशित की है। इसमें वैश्विक संचालन के तहत प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कर योगदान का विवरण दिया गया है। इसके अलावा, एनडीटीवी, एसीसी और सांघी इंडस्ट्रीज जैसी सहायक कंपनियों द्वारा भुगतान किए गए कर को भी कुल आंकड़े में शामिल किया गया है। अदाणी ग्रुप ने डेटा वेरिफिकेशन के लिए एक स्वतंत्र एजेंसी को नियुक्त किया है, जिससे यह अपनी जिम्मेदार कॉर्पोरेट नीति को मजबूत करने का प्रयास कर रहा है।
अदाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अदाणी ने इस खुलासे को ग्रुप की जवाबदेही का प्रमाण बताया। उन्होंने कहा, “पारदर्शिता विश्वास की नींव है, और विश्वास सतत विकास के लिए आवश्यक है। हमारे देश की वित्तीय स्थिति में योगदान देने वाला प्रत्येक रुपया हमारी पारदर्शिता और सुशासन (गुड गवर्नेंस) के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।”
इन टैक्स रिपोर्ट्स का प्रकाशन उस समय किया गया है जब कुछ महीने पहले अमेरिकी अभियोजकों (US prosecutors) ने गौतम अदाणी और अन्य अदाणी ग्रुप के अधिकारियों पर भारत में सौर ऊर्जा (solar energy) अनुबंधों को प्राप्त करने के लिए 250 मिलियन डॉलर से अधिक की रिश्वत देने का का आरोप लगाया था। नवंबर 2024 के इस आरोप-पत्र में कहा गया कि ग्रुप ने अमेरिकी निवेशकों और बैंकों को गुमराह किया, जिससे अदाणी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड ने लगभग 3 बिलियन डॉलर के ऋण और बॉन्ड ऑफरिंग के माध्यम से धन जुटाया। अदाणी ग्रुप ने इन आरोपों को “बेबुनियाद” बताते हुए खारिज कर दिया और इन्हें अदालत में चुनौती देने की बात कही।
इस आरोप के चलते अदाणी ग्रुप के शेयर मूल्य में भारी गिरावट आई था, जिससे बाजार पूंजीकरण में 26 बिलियन डॉलर का नुकसान हुआ। प्रमुख निवेशकों ने अदाणी ग्रुप के प्रोजेक्ट में निवेश रोक दिया, जिससे GQG Partners जैसे निवेशकों को भी वित्तीय नुकसान हुआ।
इसी के चलते इस टैक्स रिपोर्ट को शेयर करने के पीछे निवेशकों का विश्वास दोबारा हासिल करने और हाल ही में हुए विवादों का मुकाबला करने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। वैश्विक स्तर पर कॉर्पोरेट टैक्स पारदर्शिता बढ़ती जा रही है, और अदाणी ग्रुप की यह पहल अंतरराष्ट्रीय सर्वोत्तम प्रथाओं (best practices) के अनुरूप मानी जा रही है।
रिपोर्ट में कंपनी ने कहा, “अपनी वैश्विक कर योगदान की जानकारी स्वेच्छा से प्रकाशित करके, कंपनी आर्थिक विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को मजबूत कर रही है, हितधारकों की समझ को बढ़ा रही है और पारदर्शी कर नीतियों के माध्यम से विश्वास स्थापित कर रही है।”
अदाणी ग्रुप इस टैक्स पारदर्शिता पहल को अपनी पर्यावरण, सामाजिक और प्रशासन (Environmental, Social, and Governance – ESG) प्रतिबद्धताओं का हिस्सा मानता है। रिपोर्ट में कर भुगतानों को प्रत्यक्ष योगदान (कॉर्पोरेट टैक्स, शुल्क, और अन्य कर), अप्रत्यक्ष योगदान (हितधारकों की ओर से एकत्र किए गए कर) और कर्मचारियों के लिए सामाजिक सुरक्षा योगदान जैसी श्रेणियों में विभाजित किया गया है।
इस बीच, अमेरिकी सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन (US SEC) ने अदाणी ग्रुप के खिलाफ अपनी जांच के सिलसिले में भारतीय अधिकारियों से मदद मांगी है।
रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, न्यूयॉर्क जिला अदालत को SEC ने सूचित किया कि वह अदाणी ग्रुप के संस्थापक गौतम अदाणी और उनके भतीजे सागर अदाणी पर अपनी शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया में है। इसके लिए वह भारत के कानून मंत्रालय से हेग सेवा सम्मेलन (Hague Service Convention) के तहत सहायता मांग रहा है।