Adani-Hindenburg Case Verdict: अरबपति उद्योगपति गौतम अदाणी (Gautam Adani) के लिए आज का दिन खुशखबरी वाला रहा। हिंडनबर्ग मामले पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आते ही न केवल अदाणी ग्रुप के शेयरों में दमदार उछाल देखने को मिला बल्कि उन लोगों को करारा झटका भी लगा, जिन्होंने अदाणी मामले की जांच मार्केट रेगुलेटर सेबी से कराने के बजाय विशेष जांच दल (SIT) या केंद्रीय अन्वेषण एजेंसी (CBI) से जांच कराने की अर्जी दी थी। मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की पीठ कर रही थी। इस बीच आइये पांच पॉइंट में समझते हैं क्या कहा सुप्रीम कोर्ट ने-
- अदाणी ग्रुप को लेकर फैसला सुनाते हुए चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ हिंडनबर्ग रिसर्च द्वारा लगाए गए आरोपों की चल रही जांच में से सेबी को हटाने की मांग करने वाले याचिकाकर्ताओं की प्रमुख मांगों को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि अदाणी ग्रुप के खिलाफ आरोपों की विशेष जांच दल (SIT) या केंद्रीय अन्वेषण एजेंसी (CBI) से जांच का आदेश देने का कोई आधार नहीं है।साथ ही कोर्ट ने साथ ही भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) को दो लंबित मामलों की जांच पूरी करने के लिए तीन महीने का समय दिया। बता दें कि अदाणी-हिंडनबर्ग मामले में 24 मामले दायर किए गए थे। 22 मामलों की जांच पूरी की जा चुकी है, अब दो मामलों की जांच सेबी की तरफ से होनी बाकी है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इन दो लंबित मामलों की जांच 3 महीने के भीतर पूरी की जाए।
- अदाणी ग्रुप के खिलाफ हिंडनबर्ग रिसर्च की रिपोर्ट पर SIT के द्वारा जांच कराने से इनकार करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने न्यूजपेपर्स में छपी रिपोर्ट्स और इन्वेस्टीगेटिव जर्नलिस्ट्स के संगठन वाले ग्लोबल नेटवर्क ऑर्गेनाइज्ड क्राइम ऐंड करप्शन रिपोर्टिंग प्रोजेक्ट (OCCRP) की रिपोर्ट्स को भी मानने से इनकार कर दिया।सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा कि मार्केट रेगुलेटर सेबी के व्यापक जांच पर सवाल उठाने के लिए न्यूज पेपर्स की ऑर्टिकल्स और थर्ड पार्टी ऑर्गेनाइजेशन की रिपोर्टें मजबूत आधार नहीं पेश करती हैं। कोर्ट ने तीसरे पक्ष की रिपोर्ट पर निर्भरता को खारिज करते हुए विशवास जताया कि सेबी इस मामले को संभालने में सक्षम है।
- सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इनपुट और उनके सोर्सेज की सच्चाई को बिना किसी विवाद के प्रदर्शित किया जाना चाहिए। याचिकाकर्ता यह दावा नहीं कर सकते कि अखबार में एक अप्रमाणित रिपोर्ट को एक वैधानिक नियामक यानी सेबी द्वारा जांच पर प्राथमिकता दी जानी चाहिए। बेंच ने कहा, इन रिपोर्टों के पास संदेह करने लायक कोई ठोस सबूत नहीं हैं।
- सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और सेबी को यह जांच करने का आदेश दिया कि क्या शॉर्ट सेलिंग पर हिंडनबर्ग रिपोर्ट किसी कानून का उल्लंघन करती है? और अगर उल्लंघन पाया जाता है तो उचित कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। कोर्ट ने केंद्र और सेबी को रेगुलेटरी फ्रेमवर्क को मजबूत करने के लिए एक एक्सपर्ट कमेटी की सिफारिश पर विचार करने के लिए भी कहा है।
- कोर्ट ने कहा कि विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) और LODR नियमों में कोई खामियां नहीं पाई गई और इसलिए सेबी द्वारा इन नियमों पर किए गए संशोधनों को रद्द करने का निर्देश देने के लिए कोर्ट के पास कोई वैलिड कारण भी नहीं है। चीफ जस्टिस ने कहा कि संशोधनों के जरिये FPI रेगुलेशन्स और LODR रेगुलेशन सख्त हुए हैं।
क्या है LODR?
गौरतलब है कि लिस्टिंग ऑब्लिगेशन ऐंड डिसक्लोजर (LODR) रेग्युलेशंस में सेबी द्वारा संशोधन के बाद ये नियम अधिसूचित हो चुके हैं मगर अब इन्हें फरवरी में लागू किया जाएगा। इस बीच उद्योग संस्थाओं, एक्सचेंजों, कानूनी विशेषज्ञों और नियामकीय अधिकारियों का एक मंच इससे जुड़ी चुनौतियां समझने और इसे आसानी से लागू करने का तरीका निकालने में जुटा हुआ है।
सेबी अफवाहों की सच्चाई परखने के लिए खुलासे के नए नियमों में ढील देने के लिए यह नियम ला रहा है ताकि इन नियमों को आसानी से लागू किया जा सके और इनका पालन करना भी आसान रहे।
गौतम अदाणी ने कहा- सत्य की जीत हुई
गौतम अदाणी ने हिंडनबर्ग मामले पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि ‘सचाई की जीत’ हुई है और उनका ग्रुप भारत की वृद्धि की कहानी में योगदान देना जारी रखेगा।
उन्होंने कहा, “मैं उन लोगों का आभारी हूं जो हमारे साथ खड़े रहे। अदाणी ने कहा कि भारत की वृद्धि की कहानी में हमारा विनम्र योगदान जारी रहेगा। जय हिंद।”
First Published - January 3, 2024 | 4:04 PM IST
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