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फिनो पेमेंट्स बैंक के प्रमुख ऋषि गुप्ता की गिरफ्तारी ने प्रोग्राम मैनेजरों पर जांच बढ़ा दी है। ये मध्यस्थ भुगतान प्रोसेसिंग के स्रोत और सिफारिश करते हैं। उद्योग सूत्रों ने इस बात पर सवाल खड़े कर दिए हैं कि वित्तीय संस्थानों को अपने ग्राहकों के कार्यों के लिए किस हद तक उत्तरदायी ठहराया जा सकता है।
दरअसल, प्रोग्राम मैनेजर संगठन के लिए बिजनेस के स्रोत होते हैं और संगठन के लिए कारोबार लेकर आते हैं। बैंक प्रमुख की गिरफ्तारी ने उद्योग को निर्धारित उचित परिश्रम के बावजूद अपने मर्चेंट के व्यवसायों की जवाबदेही पर सवाल उठाने के लिए प्रेरित किया है और क्या ऐसे मध्यस्थ प्रणालीगत जोखिम पैदा कर सकते हैं।
उद्योग स्रोत ने कहा, ‘ये ऐसे नेटवर्क हैं। इनकी निश्चित पहुंच होती है और वे व्यवसाय के विशेष क्षेत्र में मजबूत हैं। एक प्रोग्राम मैनेजर जैसे पुनर्विक्रेता वेबसाइट के कई ग्राहक हो सकते हैं जिन्हें थोक में ऐसे व्यापारियों की पेशकश करने के लिए भुगतान प्रसंस्करण की जरूरत होती है।’
फिनो के मामले में इसके प्रबंध निदेशक व मुख्य कार्यकारी अधिकारी गुप्ता की गिरफ्तारी तीन प्रोग्राम मैनेजरों की कथित माल एवं सेवा कर (जीएसटी) चोरी से जुड़ी हुई है। फिनो ने सीईओ की गिरफ्तारी के बाद कॉनकल में यह आंकड़ा साझा किया था कि इन तीन प्रोग्राम मैनेजरों के आउटपुट की हिस्सेदारी कंपनी के कुल वार्षिक आउटपुट का लगभग आठ से दस प्रतिशत थी। इन मैनेजरों ने रीयल मनी गेमिंग खंड पर अगस्त, 2025 पर प्रतिबंध लगाए जाने से पहले इस खंड में लेन देन के जरिए कथित चोरी की थी।
एक सूत्र ने कहा, ‘भुगतान एग्रीगेटर्स या बैंकों के रूप में जीएसटी की किसी भी कथित चोरी की जिम्मेदारी वित्तीय संस्थान पर नहीं होती है। जीएसटी के तहत एकमात्र दायित्व वित्तीय कंपनी द्वारा एक विशेष व्यापारी को प्रदान की जाने वाली सेवाओं पर सीमित है।’ दूसरे स्रोत ने कहा कि इन प्रबंधकों को ऐसे समय में कंपनी के लिए व्यवस्थित रूप से जोखिम भरा नहीं होना चाहिए जब समय-समय पर नियम और मानदंड विकसित होते हैं।
उदाहरण के लिए फिनो के व्यवसाय का लगभग 80 प्रतिशत प्रोग्राम मैनेजरों से आया जबकि बाकी भुगतान एग्रीगेटर्स से आया। यह कंपनी ने कॉनकल में साझा किया गया था। प्रबंधन ने कहा कि प्रोग्राम मैनेजरों द्वारा संदर्भित व्यापारियों को ऑनबोर्ड करने के मानदंडों में से एक यह था कि उन्हें यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) लेन देन की सुविधा के लिए अन्य बैंकों के साथ मौजूदा बैंकिंग संबंध रखने की जरूरत थी।
दूसरे सूत्र ने कहा, ‘एक विनियमित इकाई के रूप में किसी भी मर्चेंट का अधिग्रहण करने से पहले जानें अपने ग्राहक (केवाईसी) मानदंडों और अन्य मानदंडों का पालन किए जाने की उचित प्रक्रिया है। प्रोग्राम मैनेजर उस प्रक्रिया से नहीं गुजरते हैं। इसका कारण यह है कि वे तकनीकी रूप से सिस्टम का हिस्सा नहीं हैं।’
सूत्रों ने कहा कि इस मामले में यदि मर्चेंट पहले से ही अन्य बैंकों के साथ काम कर रहे थे तो यह जानना जरूरी था कि किसी विशेष बैंक प्रमुख की गिरफ्तारी का कारण क्या था। एक सूत्र ने कहा, ‘किसी भी समय कई मर्चेंट को ऑनबोर्ड किया जाता है और सीईओ हर दिन परिचालन पहलुओं से नहीं गुजरता है। लेन-देन कानूनी प्रक्रिया के तहत किए गए और प्रतिबंध लगने पर बंद कर दिए गए।