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अमूल का ऐतिहासिक कीर्तिमान: 1 लाख करोड़ रुपये के क्लब में शामिल हुआ देश का पसंदीदा डेयरी ब्रांड

अमूल ने वैश्विक विस्तार और मजबूत वितरण नेटवर्क के दम पर वित्त वर्ष 2025-26 में 1 लाख करोड़ रुपये के टर्नओवर का ऐतिहासिक आंकड़ा पार कर लिया है

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शार्लीन डिसूजा   
Last Updated- April 05, 2026 | 10:24 PM IST

वित्त वर्ष 2025-26 में अमूल का कारोबार 1 लाख करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर गया। यह इसके पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 11 फीसदी अ​धिक है। अमूल के कारोबार में यह बढ़ोतरी घरेलू बाजार में विस्तार के साथ-साथ वैश्विक विस्तार की रणनीति से संभव हुई जहां इस डेरी ब्रांड ने यूरोप और अमेरिका में ताजा दूध बिक्री की शुरुआत की। वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में उसने दो अंक में वृद्धि दर्ज की।

गुजरात सहकारी दुग्ध वितरण संघ (जीसीएमएमएफ) के प्रबंध निदेशक जयेन मेहता ने कहा कि वित्त वर्ष 2026 में अमूल का कारोबार 1 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने के पीछे की वजह घरेलू बाजार में उसका जबरदस्त वितरण नेटवर्क रहा जिसमें 5,000 की आबादी वाले कस्बों तक पहुंच बनाना भी शामिल है। उन्होंने कहा कि अमूल दो अंक में अपनी वृद्धि को बनाए रखेगा।

मेहता ने कहा, ‘हमने उत्पाद की विविधता पर बहुत ध्यान दिया है। इनमें प्रोटीन, प्रोबायोटिक और ऑर्गेनिक उत्पाद शामिल हैं, जिनकी वृद्धि दर भी काफी अच्छी है। यहां तक कि दूध से जुड़ी छाछ और चीज़ जैसे मूल्य व​र्धित उत्पाद भी तेजी से बढ़ रहे हैं।’ उन्होंने कहा कि अमूल का बाजार में दबदबा है इसलिए बाजार में वृद्धि का इसे फायदा मिलता है। डेरी क्षेत्र की इस बड़ी कंपनी की मौजूदगी 50 से ज्यादा देशों में है और फिलहाल इसका ध्यान अलग-अलग भौगोलिक क्षेत्रों में अपने उत्पादों का दायरा बढ़ाने पर है।

मेहता ने कहा, ‘हम अफ्रीका और दक्षिण-पूर्व एशिया में अपना विस्तार कर रहे हैं तथा अगले एक साल में दस और अंतरराष्ट्रीय बाजार जोड़ने की योजना बना रहे हैं।’ डेरी ब्रांड ने कारोबार में जहां कीर्तिमान बनाया वहीं जीसीएमएमएफ ने 73,450 करोड़ रुपये का कारोबार किया, जो पिछले वित्त वर्ष के 65,911 करोड़ रुपये के मुकाबले 11.4 फीसदी अधिक है। जीसीएमएमएफ की ओर से जारी विज्ञप्ति के अनुसार यह भारत का सबसे बड़ा एफएमसीजी संगठन बन गया है। 

अमूल ब्रांड के उत्पादों की देश भर में बिक्री करने वाले जीसीएमएमएफ का सालाना कारोबार अमूल से कम होने की वजह यह है कि वलसाड, राजकोट, गोधरा, सूरत, वडोदरा और आणंद की डेरियां अपना दूध और दूध से बने उत्पाद अमूल ब्रांड के तहत बेचती हैं लेकिन यह जीसीएमएमएफ के कारोबार में शामिल नहीं होता। इसके अलावा अमूल के कारोबार में गुजरात में पशुओं के चारे की बिक्री से होने वाली आय भी शामिल होती है।

जीसीएमएमएफकी ओर से जारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि 1,200 से अधिक वि​भिन्न तरह के पैक में अलग-अलग उत्पाद का विशाल पोर्टफोलियो, व्यापक वितरण नेटवर्क और आधुनिक उपभोक्ताओं की बदलती जरूरतों के अनुरूप तेजी से खुद को ढालने की क्षमता इस वृद्धि के प्रमुख कारक रहे हैं। गुजरात सहकारी दुग्ध विपणन महासंघ अपनी 18 सदस्य जिला सहकारी समितियों के साथ मिलकर स्थानीय बाजार रणनीतियों को अमूल ब्रांड की मजबूत पहचान के साथ जोड़ते हुए डेरी क्षेत्र में अग्रणी बना हुआ है। 

जीसीएमएमएफ (अमूल) के चैयरमैन अशोक भाई चौधरी ने कहा, ‘कारोबार का 1 लाख करोड़ रुपये पार करना करोड़ों उपभोक्ताओं के भरोसे और हमारे 36 लाख डेरी किसानों की अथक मेहनत का प्रमाण है।’ 

जीसीएमएमएफ के वाइस चैयरमैन गोर्धन भाई धमेलिया ने कहा, ‘1 लाख करोड़ रुपये के इस कीर्तिमान तक पहुंचना सहकारी भावना की बड़ी जीत है। अपने मॉडल को राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार देकर हम यह साबित कर रहे हैं कि ‘अमूल मॉडल’ आर्थिक लोकतंत्र का बेहतरीन उदाहरण है।’ 

First Published : April 5, 2026 | 10:19 PM IST