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Asian Paints Q4 Results: देश की सबसे बड़ी पेंट निर्माता कंपनी Asian Paints ने शुक्रवार को तिमाही नतीजों में बाजार के अनुमान से बेहतर प्रदर्शन किया। कंपनी को यह बढ़त मुख्य रूप से अपने कोर डेकोरेटिव पेंट्स सेगमेंट में घरेलू बिक्री और वॉल्यूम ग्रोथ से मिली।
कंपनी का समेकित शुद्ध लाभ 31 मार्च को समाप्त तिमाही में 69 प्रतिशत बढ़कर 1,172 करोड़ रुपये (123.1 मिलियन डॉलर) हो गया। यह आंकड़ा LSEG द्वारा तैयार किए गए विश्लेषकों के औसत अनुमान 1,116 करोड़ रुपये से अधिक रहा।
नतीजों के बाद बाजार में कंपनी के शेयरों में भी तेजी देखने को मिली। Asian Paints का शेयर 1.7 प्रतिशत बढ़कर 2,718 रुपये के स्तर पर पहुंच गया।
पेंट कंपनियों ने इस साल कच्चे तेल से जुड़े कच्चे माल की बढ़ती लागत को संतुलित करने के लिए कीमतों में बढ़ोतरी की है। वहीं, मध्य पूर्व में जारी तनाव के कारण पेट्रोकेमिकल सप्लाई में उतार-चढ़ाव बना हुआ है, जिससे उत्पादन और मार्जिन पर दबाव देखने को मिला है।
एशियन पेंट्स के प्रबंध निदेशक और सीईओ अमित सिंघल ने बयान में कहा कि बाहरी वातावरण अभी भी अनिश्चित और अस्थिर बना हुआ है, जबकि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण निकट अवधि में मांग को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
पिछले महीने मैक्वेरी के डीलर चेक्स में सामने आया था कि एशियन पेंट्स ने मई से प्रभावी तौर पर अपने उत्पादों की कीमतों में लगभग 3 से 5 प्रतिशत की बढ़ोतरी की है। इससे पहले कंपनी ने 6 से 8 प्रतिशत तक कीमतें बढ़ाई थीं और उसके बाद अन्य प्रतिस्पर्धी कंपनियों ने भी इसी दिशा में कदम उठाए। हालांकि कंपनी ने इन मूल्य वृद्धि की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
कंपनी की बिक्री से होने वाली आय लगभग 11 प्रतिशत बढ़कर 9,229 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। एशियन पेंट्स की कुल आय का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा घरेलू डेकोरेटिव पेंट्स से आता है, जिनका उपयोग मुख्य रूप से घरों की पेंटिंग और रिटेल उपभोक्ताओं द्वारा किया जाता है।
इस तिमाही में घरेलू डेकोरेटिव बिजनेस ने 12.4 प्रतिशत की वॉल्यूम ग्रोथ और 10.2 प्रतिशत की वैल्यू ग्रोथ दर्ज की है, जो मजबूत मांग को दर्शाता है।
कंपनी का PBDIT मार्जिन बढ़कर 19.4 प्रतिशत हो गया, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 17.2 प्रतिशत था। यानी कंपनी की परिचालन लाभप्रदता में सुधार देखने को मिला है।
एशियन पेंट्स भारतीय पेंट कंपनियों में सबसे आखिरी में अपने नतीजे जारी करने वाली कंपनी है। इससे पहले छोटी प्रतिस्पर्धी कंपनियों जैसे बर्जर पेंट्स, कंसाई नेरोलैक और जेएसडब्ल्यू डुलक्स ने भी बेहतर मुनाफे की रिपोर्ट दी थी।
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इसी महीने जेएसडब्ल्यू डुलक्स के सीईओ राजीव राजगोपाल ने संकेत दिया था कि निकट भविष्य में मांग में कुछ नरमी देखी जा सकती है। कंपनी इस समय मिड-मार्केट सेगमेंट में अपनी पकड़ मजबूत करने और शहरी उपभोक्ताओं को लक्षित करने पर भी काम कर रही है, खासकर पश्चिम एशिया में जारी अनिश्चितता को देखते हुए।