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वेतन बढ़ोतरी में कटौती और सस्ती ब्याज दरों से कंपनियों की बल्ले-बल्ले, Q4 में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा मुनाफा

वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही में कंपनियों का मुनाफा मार्जिन पिछले 5 वर्षों में लगभग एक तिहाई बढ़ा है। मार्च 2021 तिमाही में यह  8.6 फीसदी था

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कृष्ण कांत   
Last Updated- May 19, 2026 | 10:47 PM IST

वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही में कंपनियों का मुनाफा मार्जिन रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। कर्मचारियों पर कम खर्च और ब्याज के बोझ में आई कमी का कंपनियों को फायदा मिला। कम वेतन और पारिश्रमिक के साथ-साथ ब्याज लागत में हुई बचत ने कच्चे माल की बढ़ी लागत को काफी हद तक पाट दिया। इससे वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही में कंपनियों का कर बाद मुनाफा मार्जिन 11.3 फीसदी रहा जो इससे पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि की तुलना में 60 आधार अंक अ​धिक है और कम से कम पिछली 21 तिमाहियों में सबसे अधिक मुनाफा मार्जिन है। वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही के 10.6 फीसदी मुनाफा मार्जिन से चौथी तिमाही में 70 आधार अंक की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही में कंपनियों का मुनाफा मार्जिन पिछले 5 वर्षों में लगभग एक तिहाई बढ़ा है। मार्च 2021 तिमाही में यह  8.6 फीसदी था।  

बिज़नेस स्टैंडर्ड के नमूने में शामिल 837 कंपनियों का वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही में कुल शुद्ध लाभ 15.5 फीसदी बढ़ा है जबकि इस दौरान उनकी आय में 9.5 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इन कंपनियों का कुल समायोजित शुद्ध लाभ वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही में लगभग 3.24 लाख करोड़ रुपये रहा जो वित्त वर्ष 2025 की चौथी तिमाही में 2.81 लाख करोड़ रुपये था। 

दूसरी ओर इन कंपनियों की कुल आय वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही में बढ़कर लगभग 28.65 लाख करोड़ रुपये रही जो वित्त वर्ष 2025 की चौथी तिमाही में 26.16 लाख करोड़ रुपये और वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही में 27.71 लाख करोड़ रुपये थी। चौथी तिमाही में वेतन और पारिश्रमिक तथा ब्याज व्यय जैसे प्रमुख खर्च में वृद्धि धीमी रही जिससे कंपनियों को मुनाफा मार्जिन बढ़ाने में मदद मिली।

वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही में नमूने में शामिल कंपनियों की कुल वेतन वृद्धि 6.4 फीसदी रही जबकि बिक्री एवं मार्केटिंग खर्च में 3.6 फीसदी का इजाफा हुआ। हालांकि कंपनियों की लाभप्रदता को सबसे बड़ा फायदा कम ब्याज लागत का मिला। इस लाभ में बैंकों और गैर-बैंक ऋणदाताओं का दबदबा रहा तथा इनकी हिस्सेदारी नमूने में शामिल कंपनियों के कुल शुद्ध लाभ की लगभग 43 फीसदी रही।

वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही में कंपनियों का कुल ब्याज खर्च केवल 2.8 फीसदी बढ़ा जो पिछली 16 तिमाहियों में सबसे धीमी वृद्धि है। बैंक, वित्त और बीमा (बीएफएसआई) कंपनियों को कम ब्याज दरों से सबसे अधिक लाभ हुआ और वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही में उनके कुल ब्याज खर्च में केवल 2.2 फीसदी की वृद्धि हुई।

वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही में इन कंपनियों का वेतन और पारिश्रमिक व्यय कुल आय का 11.3 फीसदी रहा जो कम से कम पिछली 21 तिमाहियों में सबसे कम है। इसकी तुलना में वित्त वर्ष 2025 की चौथी तिमाही में यह 11.7 फीसदी और वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही में 11.8 फीसदी था। पिछले 5 वर्षों में कंपनियों की आय में वेतन का हिस्सा औसतन 12.1 फीसदी रहा है।

इसी तरह कुल आय में ब्याज खर्च का हिस्सा चौथी तिमाही में घटकर 16.1  फीसदी रहा जो वित्त वर्ष 2025 की चौथी तिमाही में 17.6 फीसदी था। पिछले 5 वर्षों में यह अनुपात औसतन 16.1 फीसदी रहा है। हालांकि विश्लेषकों का कहना है कि कर्मचारी और ब्याज लागत में कमी का लाभ टिकाऊ नहीं हो सकता है क्योंकि उपभोक्ताओं की वास्तविक आय में संभावित गिरावट और बॉन्ड यील्ड में हालिया वृद्धि से मांग में बाधा आ सकती है। सिस्टमैटिक्स इंस्टीट्यूशनल इक्विटी के शोध एवं इक्विटी रणनीति के सह-प्रमुख धनंजय सिन्हा ने कहा, लाभ मार्जिन में वृद्धि कंपनियों की लागत अनुकूलन रणनीति को दर्शाता है 

First Published : May 19, 2026 | 10:27 PM IST