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स्टैंडर्ड चार्टर्ड के 4.5 लाख क्रेडिट कार्ड ग्राहकों को खरीदेगा फेडरल बैंक, बड़े शहरों में पकड़ बढ़ाने की कोशिश

हालांकि, इस डील की सही कीमत का खुलासा अभी नहीं किया गया है, लेकिन फेडरल बैंक के अनुमान के मुताबिक यह पोर्टफोलियो इंप्लाइड इक्विटी के लगभग 1.5 से 1.6 गुना के बराबर है

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सुब्रत पांडा   
Last Updated- April 30, 2026 | 4:01 PM IST

बैंकिंग सेक्टर में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। प्राइवेट सेक्टर के फेडरल बैंक ने गुरुवार को घोषणा की कि वह विदेशी बैंक स्टैंडर्ड चार्टर्ड के भारत स्थित रिटेल क्रेडिट कार्ड पोर्टफोलियो के एक बड़े हिस्से का अधिग्रहण करने जा रहा है। इस डील के तहत फेडरल बैंक लगभग 4,50,000 क्रेडिट कार्ड ग्राहकों को अपने साथ जोड़ेगा। दोनों बैंकों के बीच इस ट्रांजैक्शन को लेकर एक निश्चित समझौता (Definitive Agreement) होने वाला है। इस अधिग्रहण के जरिए फेडरल बैंक की कोशिश अपनी क्रेडिट कार्ड बाजार में हिस्सेदारी बढ़ाने और बड़े शहरों में अपनी पकड़ मजबूत करने की है।

हालांकि, इस डील की सही कीमत का खुलासा अभी नहीं किया गया है, लेकिन फेडरल बैंक के अनुमान के मुताबिक यह पोर्टफोलियो इंप्लाइड इक्विटी के लगभग 1.5 से 1.6 गुना के बराबर है। डील की अंतिम रकम इस बात पर निर्भर करेगी कि ट्रांसफर के समय ग्राहकों का बैलेंस और उनकी सहमति कितनी रहती है। यह ट्रांजैक्शन साल 2026 के अंत तक पूरा होने की उम्मीद है।

बड़े शहरों के प्रीमियम ग्राहकों पर फेडरल बैंक की नजर

फेडरल बैंक के लिए यह डील रणनीतिक रूप से काफी अहम मानी जा रही है। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि स्टैंडर्ड चार्टर्ड से मिलने वाले इन 4.5 लाख कार्डों में से करीब 75 प्रतिशत ग्राहक भारत के टॉप-8 शहरों (टियर-1 मार्केट) से ताल्लुक रखते हैं। इस अधिग्रहण के बाद इन प्रमुख शहरों में फेडरल बैंक की मौजूदगी दोगुनी से भी ज्यादा हो जाएगी। बैंक को उम्मीद है कि उसे पुराने और अनुभवी ग्राहकों का एक तैयार पोर्टफोलियो मिलेगा, जिससे बैंक के खुदरा कारोबार को नई रफ्तार मिलेगी।

अगर आंकड़ों की बात करें तो मार्च 2026 तक फेडरल बैंक के पास कुल 22.4 लाख क्रेडिट कार्ड थे। इस डील के बाद बैंक के नॉन-को-ब्रांडेड क्रेडिट कार्ड कारोबार में करीब 90 फीसदी की बढ़ोतरी होने का अनुमान है। फेडरल बैंक के MD और CEO केवीएस मनियन ने कहा कि यह अधिग्रहण बैंक के रिटेल क्रेडिट कार्ड बिजनेस को और मजबूत करेगा। उन्होंने कहा कि बैंक को जो पोर्टफोलियो मिलने जा रहा है, उसमें अच्छे और पुराने सक्रिय ग्राहक शामिल हैं, और यह उन बाजारों से जुड़ा है जहां फेडरल बैंक अपनी मौजूदगी बढ़ाना चाहता है।

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स्टैंडर्ड चार्टर्ड की बदली रणनीति: अब सिर्फ वेल्थ पर फोकस

वहीं, स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक इस डील के जरिए भारत में अपने कारोबार का फोकस बदल रहा है। बैंक पहले ही साफ कर चुका था कि वह सिर्फ एक प्रोडक्ट, जैसे केवल क्रेडिट कार्ड, पर निर्भर रहने के बजाय ग्राहकों के साथ मल्टी-प्रोडक्ट रिलेशनशिप मजबूत करना चाहता है। अब बैंक का ज्यादा ध्यान वेल्थ मैनेजमेंट और संपन्न ग्राहकों पर है। स्टैंडर्ड चार्टर्ड का यह दूसरा बड़ा कदम है। इससे पहले पिछले साल उसने अपना पर्सनल लोन बिजनेस कोटक महिंद्रा बैंक को बेच दिया था।

स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक के इंडिया और दक्षिण एशिया के वेल्थ और रिटेल बैंकिंग हेड आदित्य मंडलोई ने कहा कि यह कदम ग्राहकों के साथ लंबे और मजबूत रिश्ते बनाने की रणनीति का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि क्रेडिट कार्ड आगे भी बैंक के कारोबार का अहम हिस्सा बने रहेंगे, लेकिन अब बैंक का ज्यादा फोकस अपने वेल्थ प्लेटफॉर्म को मजबूत करने और प्रीमियम ग्राहकों के लिए बेहतर सेवाएं देने पर है। इसी दिशा में बैंक ने हाल ही में ‘मेटल बियॉन्ड’ क्रेडिट कार्ड भी लॉन्च किया है। उन्होंने यह भी कहा कि इस बदलाव के दौरान ग्राहकों को किसी तरह की दिक्कत न हो, इसके लिए स्टैंडर्ड चार्टर्ड और फेडरल बैंक साथ मिलकर काम करेंगे।

विदेशी बैंकों का घटता रिटेल पोर्टफोलियो

भारतीय बैंकिंग सेक्टर में यह दूसरा मौका है जब किसी विदेशी बैंक ने अपना रिटेल क्रेडिट कार्ड पोर्टफोलियो किसी घरेलू प्राइवेट बैंक को बेचा है। इससे पहले एक्सिस बैंक ने सिटीबैंक के भारत के कंज्यूमर बिजनेस और क्रेडिट कार्ड पोर्टफोलियो को 11,603 करोड़ रुपये में खरीदा था। स्टैंडर्ड चार्टर्ड के इस कदम को भारत में उसके कारोबार के फोकस में बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है। वहीं, घरेलू प्राइवेट बैंक रिटेल बैंकिंग और क्रेडिट कार्ड कारोबार में तेजी से अपनी मौजूदगी बढ़ा रहे हैं।

अभी फेडरल बैंक के पास करीब 8 लाख नॉन-को-ब्रांडेड और 13 लाख को-ब्रांडेड क्रेडिट कार्ड हैं। इस अधिग्रहण के बाद बैंक की बाजार में पकड़ और मजबूत होने की उम्मीद है। इस डील में फेडरल बैंक की ओर से अर्पवुड कैपिटल फाइनेंशियल एडवाइजर, खेतान एंड कंपनी लीगल काउंसिल और KPMG ड्यू डिलिजेंस एडवाइजर की भूमिका निभा रहे हैं। वहीं, स्टैंडर्ड चार्टर्ड की ओर से ट्राईलीगल लीगल काउंसिल है। खास बात यह है कि इस सौदे के लिए किसी रेगुलेटरी मंजूरी की जरूरत नहीं होगी, इसलिए इसके 2026 के भीतर पूरा होने की उम्मीद है।

First Published : April 30, 2026 | 3:54 PM IST