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एयर इंडिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी कैंपबेल विल्सन के पद छोड़ने की खबर सामने आई है। हालांकि कंपनी की ओर से अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन रिपोर्ट्स के मुताबिक नए सीईओ के चयन तक विल्सन अपनी जिम्मेदारी निभाते रहेंगे।
उनका संभावित इस्तीफा ऐसे समय में चर्चा में है जब एयरलाइन कई चुनौतियों से जूझ रही है। इनमें नियामकीय जांच, बढ़ता घाटा और वैश्विक तनाव के कारण उड़ानों पर पड़ रहा असर शामिल है।
वित्तीय मोर्चे पर भी कंपनी दबाव में है। एयर इंडिया और उसकी लो-कॉस्ट यूनिट एयर इंडिया एक्सप्रेस को वित्त वर्ष 2024-25 में करीब 98 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। यह नुकसान तब है जब कंपनी संचालन सुधारने, लागत कम करने और टाटा ग्रुप के भीतर एयरलाइंस के एकीकरण जैसे कदम उठा रही है।
कैंपबेल विल्सन ने 2022 में एयर इंडिया की कमान संभाली थी, जब टाटा समूह ने इसे सरकार से अपने हाथ में लिया था। उनके नेतृत्व में एयरलाइन ने खुद को फिर से खड़ा करने के लिए बड़े बदलावों की शुरुआत की। इसमें बेड़े का आधुनिकीकरण और सेवाओं में सुधार पर खास जोर दिया गया।
फिलहाल एयर इंडिया के पास करीब 191 विमानों का बेड़ा है और कंपनी ने भविष्य की जरूरतों को देखते हुए 500 से ज्यादा नए विमानों का ऑर्डर भी दिया है।
एयर इंडिया पर हाल के महीनों में सुरक्षा और नियामक नियमों को लेकर सख्ती बढ़ गई है। साल 2025 में हुए एक भीषण विमान हादसे, जिसमें करीब 260 लोगों की मौत हुई थी, के बाद कंपनी लगातार जांच के दायरे में है।
नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) ने हाल ही में एयर इंडिया में कई खामियां पाई हैं। इनमें ऐसे मामले शामिल हैं जहां बिना वैध एयरवर्थिनेस सर्टिफिकेट के विमान का संचालन किया गया और उड़ानों से पहले आपातकालीन उपकरणों की सही जांच नहीं की गई।
एक अन्य घटना में पिछले महीने वैंकूवर जा रही एयर इंडिया की फ्लाइट को दिल्ली वापस लौटना पड़ा। जांच में पाया गया कि जिस विमान का उपयोग किया जा रहा था, वह उस रूट के लिए अधिकृत नहीं था।
एयर इंडिया ने भी अपनी आंतरिक चुनौतियों को स्वीकार किया है। दिसंबर में कंपनी ने माना था कि प्रक्रियाओं के पालन, आपसी संवाद और नियमों के अनुपालन की संस्कृति में तत्काल सुधार की जरूरत है।
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का असर हवाई यात्रा पर गहराता जा रहा है। Air India समेत कई एयरलाइंस को उड़ानों के रूट बदलने और रद्द करने की वजह से भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। अनुमान है कि इस पूरे घटनाक्रम से भारतीय एयरलाइंस को करीब 2,500 करोड़ रुपये तक का राजस्व नुकसान हो सकता है।
संघर्ष के चलते ईरान और पाकिस्तान के एयरस्पेस पर पाबंदी लगी हुई है। इसके कारण कई उड़ानों को या तो रद्द करना पड़ रहा है या फिर उन्हें लंबे वैकल्पिक रूट से चलाया जा रहा है। इससे समय के साथ-साथ ईंधन खर्च और ऑपरेशनल लागत भी बढ़ गई है।
एयर इंडिया के अनुसार, संघर्ष शुरू होने के बाद से अब तक लगभग 2,500 उड़ानें रद्द करनी पड़ी हैं। मौजूदा स्थिति में कंपनी पश्चिम एशिया के लिए अपनी सामान्य उड़ान सेवाओं का करीब 30 प्रतिशत ही संचालित कर पा रही है, क्योंकि कई एयरपोर्ट और एयरस्पेस या तो बंद हैं या सुरक्षा मानकों पर खरे नहीं उतरते।
कंपनी के CEO कैंपबेल विल्सन ने आंतरिक संदेश में स्थिति को बताते हुए कहा, “संघर्ष शुरू होने के तीन हफ्तों में हमें क्षेत्र के लिए करीब 2,500 उड़ानें रद्द करनी पड़ी हैं। आज की स्थिति में हम अपनी सामान्य पश्चिम एशिया उड़ान सेवाओं का केवल लगभग 30 प्रतिशत ही चला पा रहे हैं, क्योंकि एयरपोर्ट और एयरस्पेस या तो बंद हैं या उन्हें हमारी सुरक्षा सीमा से बाहर माना गया है।”
उन्होंने यह भी कहा कि इस संघर्ष का वित्तीय असर अभी पूरी तरह सामने नहीं आया है और आगे इसका प्रभाव और स्पष्ट होगा। साथ ही कंपनी ने अनावश्यक खर्चों पर नियंत्रण रखने पर जोर दिया है।
यूरोप, ब्रिटेन और उत्तरी अमेरिका जाने वाली उड़ानों पर भी असर पड़ा है। इन रूट्स पर विमानों को लंबे रास्तों से जाना पड़ रहा है, जिससे ईंधन की खपत और परिचालन लागत दोनों बढ़ रही हैं।
पिछले साल हुए हादसे के बाद उठ रहे सवाल अब भी बरकरार हैं। एयर इंडिया उस दर्दनाक विमान दुर्घटना के असर से उबरने की कोशिश कर रही है, लेकिन मामला अब भी पूरी तरह सुलझा नहीं है।
12 जून 2025 को एयर इंडिया की फ्लाइट AI171, जो Sardar Vallabhbhai Patel International Airport अहमदाबाद से लंदन जा रही थी, उड़ान भरने के कुछ ही समय बाद दुर्घटनाग्रस्त हो गई। यह विमान Boeing 787-8 था। टेकऑफ के तुरंत बाद विमान एक मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल परिसर से टकरा गया और उसमें आग लग गई।
इस हादसे में विमान में सवार 242 में से 241 लोगों की मौत हो गई, जबकि जमीन पर मौजूद 19 लोगों की भी जान चली गई। यह घटना भारत की सबसे गंभीर विमान दुर्घटनाओं में से एक मानी जा रही है।
घटना के लगभग 10 महीने बाद भी पीड़ित परिवारों के कई सवाल अनुत्तरित हैं। हाल ही में कई परिवारों ने प्रधानमंत्री Narendra Modi को पत्र लिखकर कॉकपिट वॉइस रिकॉर्डर और फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर की जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की है, ताकि दुर्घटना के कारणों का स्पष्ट पता लगाया जा सके।
यह हादसा अब भी एयरलाइन की परिचालन स्थिति और उसकी दीर्घकालिक योजनाओं पर असर डाल रहा है। जांच और जवाबों का इंतजार जारी है, जबकि पीड़ित परिवार न्याय और स्पष्टता की उम्मीद कर रहे हैं।