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तीसरी तिमाही में FMCG इंडस्ट्री में 6.4% की वृद्धि

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ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में अधिक खपत की वजह से अक्टूबर-दिसंबर में हुआ यह इजाफा

Last Updated- February 06, 2024 | 9:51 PM IST
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देश भर में अच्छी खपत के कारण अक्टूबर-दिसंबर तिमाही के दौरान भारत के दैनिक उपभोक्ता वस्तु (एफएमसीजी) उद्योग में वॉल्यूम के लिहाज से 6.4 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। नील्सनआईक्यू (एनआईक्यू) ने अपनी रिपोर्ट में यह जानकारी दी है।

शोध फर्म ने कहा है कि इस तिमाही के दौरान उद्योग की मूल्य वृद्धि छह प्रतिशत रही। हालांकि देश भर में पिछली तिमाहियों की तुलना में एफएमसीजी क्षेत्र में खपत वृद्धि संतुलित रही है।

ग्रामीण क्षेत्रों में इस तिमाही के दौरान खपत में मामूली गिरावट की वजह से वॉल्यूम वृद्धि में पिछली तिमाही की तुलना में नरमी आई है। हालांकि शहरी क्षेत्रों में यह गिरावट ज्यादा स्पष्ट है। दिसंबर में समाप्त तिमाही में पारंपरिक कारोबार में तिमाही आधार पर 5.3 प्रतिशत की वृदि्ध के साथ कम खपत देखी गई, जबकि जुलाई-सितंबर तिमाही में यह 7.5 प्रतिशत थी।

दूसरी तरफ आधुनिक कारोबार में खपत में 16.8 प्रतिशत की दो अंकों की अच्छी वृद्धि देखी गई है। नील्सनआईक्यू ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि कुछ चुनौतियों के बावजूद आधुनिक कारोबार में सकारात्मक रफ्तार ने संपूर्ण बाजार के परिदृश्य में आशाजनक आयाम जोड़ा है।

शहरी बाजार में औसत पैक का आकार सकारात्मक बना हुआ है और उपभोक्ता बड़े पैक चुन रहे हैं। शोध फर्म ने कहा कि चूंकि ग्रामीण मांग सुधार की राह पर है, इसलिए वहां भी बड़े पैक को प्राथमिकता दी जा रही है। रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2023 में पहली बार शहरी और ग्रामीण बाजारों के बीच उपभोग अंतर कम हो रहा है।

इसमें उत्तर और पश्चिम क्षेत्र योगदान दे रहे हैं। नील्सनआईक्यू इंडिया के प्रमुख (हेड ऑफ कस्टमर सक्सेस) रूजवेल्ट डिसूजा ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र के लिए कई आर्थिक प्रोत्साहनों का समर्थन करने वाला अनुकूल अंतरिम केंद्रीय बजट 2024-25 ग्रामीण रणनीति वाली कंपनियों के लिए अच्छा संकेत होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि तिमाही आधार पर गिरावट के बावजूद ग्रामीण सुधार का असर पूरे साल विकसित होता रहा। साल 2023 की चौथी तिमाही में हम उपभोग में वृद्धि देख रहे हैं, जो मुख्य रूप से भोजन और आवश्यक घरेलू उत्पादों में आदत बनाने वाली श्रेणियों (जैसे बिस्कुट और नूडल्स) से प्रेरित रही है। स्थिर से ऋणात्मक मूल्य वृद्धि के बावजूद ये श्रेणियां फली-फूली हैं, जो लचीलेपन और निरंतर मांग का संकेत देती हैं।

इस तिमाही के दौरान खाद्य और गैर-खाद्य दोनों ही क्षेत्रों में खपत बढ़ी है, क्योंकि पिछले वर्ष की तुलना में खाद्य श्रेणी में अधिक इकाइयां खरीदी गईं, जबकि गैर-खाद्य श्रेणी में बड़े पैक खरीदे गए। रिपोर्ट में कहा गया है कि खाद्य क्षेत्र में मात्रात्मक वृद्धि पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 5.3 प्रतिशत की दर पर रही, जो साल 2023 की तीसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर तिमाही) की 8.7 प्रतिशत से कम है।

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First Published - February 6, 2024 | 9:51 PM IST

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